क्षेत्र में गहराया ईंधन संकट : पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें, एम्बुलेंस तक इंतजार को मजबूर
सीमावर्ती इलाके में डीजल-पेट्रोल की किल्लत से बढ़ी परेशानी, बिहार से भी उमड़ रहे ग्राहक
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया जिले के सीमावर्ती इलाकों में इन दिनों डीजल और पेट्रोल का गंभीर संकट गहराता जा रहा है। विकास खंड बनकटा और आसपास के क्षेत्रों में अधिकांश पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म हो जाने से आम लोगों से लेकर जरूरी सेवाओं तक पर असर पड़ने लगा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को भी डीजल के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
तेज गर्मी और भीषण धूप के बीच वाहन चालकों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। कई लोग सुबह से लेकर घंटों तक पेट्रोल पंपों पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में ग्राहकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है।
बनकटा क्षेत्र के कई पेट्रोल पंपों पर खत्म हुआ तेल
जानकारी के अनुसार बासोपट्टी, बनकटा चित्रसेन, किशोरी सिकटिया, रामपुर बुजुर्ग पाण्डेय, भठवां समेत कई इलाकों के पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल का स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो चुका है। ईंधन उपलब्ध न होने के कारण वाहन मालिकों में चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ रही हैं।
कई लोगों ने बताया कि वे लगातार अलग-अलग पंपों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कहीं भी तेल नहीं मिल पा रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी, परिवहन और दैनिक कामकाज पूरी तरह ईंधन पर निर्भर होने के कारण यह संकट लोगों की दिनचर्या पर सीधा असर डाल रहा है।
सोहनपुर पेट्रोल पंप पर उमड़ी भारी भीड़
सोहनपुर स्थित पेट्रोल पंप पर जब लोगों को तेल उपलब्ध होने की सूचना मिली तो बड़ी संख्या में ग्राहक वहां पहुंच गए। देखते ही देखते पंप के बाहर वाहनों की लंबी कतार लग गई। बाइक, कार, ट्रैक्टर और अन्य वाहनों की भीड़ के कारण आसपास का इलाका काफी देर तक व्यस्त बना रहा।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मौके पर तैनात करना पड़ा। पुलिसकर्मियों ने लाइन बनवाकर लोगों को क्रम से पेट्रोल और डीजल दिलाने की व्यवस्था संभाली। भीड़ अधिक होने के कारण कई बार अफरा-तफरी जैसी स्थिति भी बनी, लेकिन पुलिस ने लोगों को शांत रखते हुए व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया।
बिहार से भी पहुंच रहे ग्राहक, बढ़ा दबाव
देवरिया का यह इलाका बिहार सीमा से सटा हुआ है। ऐसे में बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में वाहन चालक डीजल और पेट्रोल लेने पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमावर्ती दबाव के कारण उपलब्ध ईंधन बहुत तेजी से खत्म हो जा रहा है।
पेट्रोल पंप संचालकों के सामने भी चुनौती बढ़ गई है, क्योंकि सीमित आपूर्ति में स्थानीय और बाहरी दोनों क्षेत्रों की मांग पूरी करना मुश्किल हो रहा है। इससे कई जगहों पर तेल आने के कुछ ही घंटों के भीतर स्टॉक खत्म हो जा रहा है।
एम्बुलेंस तक को लगानी पड़ रही लाइन
ईंधन संकट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। एम्बुलेंस चालकों को भी डीजल के लिए सामान्य वाहनों की तरह कतार में खड़ा होना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो किसी आपातकालीन परिस्थिति में बड़ी दिक्कत खड़ी हो सकती है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली गाड़ियों का समय पर ईंधन न मिलना गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था बनाई जाए, ताकि आपातकालीन वाहनों को प्राथमिकता के आधार पर ईंधन मिल सके।
भीषण गर्मी में ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी
सोहनपुर पेट्रोल पंप पर व्यवस्था संभालने में जुटे पुलिसकर्मियों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार धूप में खड़े होकर भीड़ नियंत्रित करना आसान नहीं है। कई पुलिसकर्मी लंबे समय तक ड्यूटी करने के बाद कुर्सियों पर बैठकर लोगों को लाइन में लगाने और व्यवस्था बनाए रखने का काम करते दिखाई दिए।
तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच ड्यूटी कर रहे जवानों को काफी कठिनाई उठानी पड़ रही है। कई बार उन्हें सिर पर टोपी तक पहनने का मौका नहीं मिल पा रहा, क्योंकि भीड़ को संभालने में लगातार सक्रिय रहना पड़ रहा है।
आपूर्ति बाधित होने से पैदा हुई समस्या
इस पूरे मामले में पूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि डिपो से समय पर आपूर्ति नहीं मिलने के कारण यह स्थिति बनी है। पूर्ति निरीक्षक ने बताया कि पेट्रोल और डीजल की सप्लाई बाधित होने से कई पंपों पर स्टॉक खत्म हो गया है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है और स्थिति में सुधार किया जाएगा। हालांकि तब तक लोगों की परेशानियां कम होती नहीं दिख रही हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा चला तो इसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है। खेती-किसानी के इस मौसम में ट्रैक्टर, पंपिंग सेट और माल ढुलाई वाले वाहन डीजल पर निर्भर हैं।
इसके अलावा छोटे व्यापारी, स्कूल वाहन, निजी परिवहन और दैनिक मजदूरी करने वाले लोग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। ईंधन संकट के कारण परिवहन लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
प्रशासन से त्वरित समाधान की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और तेल कंपनियों से जल्द आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल की नियमित आपूर्ति शुरू होगी और लोगों को इस परेशानी से राहत मिलेगी। फिलहाल सीमावर्ती देवरिया का यह इलाका ईंधन संकट की मार झेल रहा है और आम जनता गर्मी के साथ-साथ लंबी लाइनों की दोहरी परेशानी से जूझ रही है।








