रिपोर्ट: अंजनी कुमार त्रिपाठी
प्रयागराज। महाकुंभ के दौरान चर्चा में आईं मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया, जिन्हें अब साध्वी हर्षानंद गिरि के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार चर्चा का विषय उनका संन्यास के बाद अपने माता-पिता के साथ रहना और इस पर कुछ संतों द्वारा उठाए गए सवाल हैं। इन आरोपों और आलोचनाओं पर साध्वी हर्षानंद गिरि ने खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें अपने परिवार के साथ रहना सबसे सुरक्षित लगता है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाने वाले संतों से सवाल करते हुए कहा कि यदि कोई उनकी सुरक्षा की शत-प्रतिशत जिम्मेदारी लेने को तैयार है तो वह आश्रम में रहने के लिए भी तैयार हैं।
गुरु पूर्णिमा पर मीडिया से साझा किया अपना पक्ष
साध्वी हर्षानंद गिरि ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों ने उनसे संन्यास के बाद परिवार के साथ रहने को लेकर सवाल किए थे। इसी दौरान उन्होंने अपनी स्थिति और सोच को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि कुछ संत यह सवाल उठा रहे हैं कि संन्यास लेने के बाद भी वह अपने माता-पिता के साथ क्यों रह रही हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि उनके पास अभी स्थायी रूप से रहने की कोई अलग व्यवस्था नहीं है।
उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े आश्रमों और संसाधनों वाले संतों के लिए इस स्थिति को समझना आसान होना चाहिए। फिलहाल उनके सामने सबसे व्यावहारिक विकल्प अपने परिवार के साथ रहना ही है।
‘मेरे पास अभी सीमित विकल्प हैं’
साध्वी हर्षानंद गिरि ने बताया कि वर्तमान समय में उनके सामने केवल कुछ ही विकल्प उपलब्ध हैं। पहला, अपने गुरु के आश्रम में रहना, जहां वह स्वयं को बोझ नहीं बनाना चाहतीं। दूसरा, अपने माता-पिता के साथ रहना और तीसरा, बिना किसी स्थायी व्यवस्था के इधर-उधर भटकना।
उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में उन्होंने अपने परिवार के साथ रहने का निर्णय लिया है, क्योंकि यही उन्हें सबसे सुरक्षित और उचित विकल्प प्रतीत होता है। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति को परिस्थितियों को समझे बिना केवल बाहरी दृष्टिकोण से निर्णय नहीं देना चाहिए।
‘आज बेटियां पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं’
साध्वी हर्षानंद गिरि ने महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश में आए दिन महिलाओं और बेटियों के साथ अपराध की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे माहौल में वह स्वयं को अपने माता-पिता के घर में सबसे अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा केवल एक औपचारिक व्यवस्था नहीं, बल्कि मानसिक विश्वास का विषय भी है। जब तक उन्हें ऐसा स्थान नहीं मिलता जहां वे पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर सकें, तब तक परिवार के साथ रहना ही उनके लिए सबसे बेहतर विकल्प है।
‘सुरक्षा की 100 प्रतिशत गारंटी मिले तो आश्रम में रहने को तैयार हूं’
आलोचना करने वाले संतों को जवाब देते हुए साध्वी हर्षानंद गिरि ने कहा कि यदि कोई संत उनकी सुरक्षा की सौ प्रतिशत जिम्मेदारी लेने को तैयार हो, तो वह तत्काल आश्रम में रहने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि केवल आरोप लगाने या सवाल उठाने से समस्या का समाधान नहीं होता। यदि वास्तव में किसी को उनकी जीवनशैली या रहने की व्यवस्था पर आपत्ति है तो उसे व्यावहारिक समाधान भी प्रस्तुत करना चाहिए।
‘कुछ संत मेरी हर बात से परेशान क्यों हैं?’
साध्वी हर्षानंद गिरि ने आलोचना करने वाले संतों के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि कुछ संत उनकी छोटी-छोटी बातों से इतना परेशान क्यों हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है जैसे कुछ लोग उनकी हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि कुछ संत तो “संत कम और मेरी सास ज्यादा बन गए हैं।”
उनका कहना था कि किसी संन्यासी के जीवन का मूल्यांकन केवल उसके पहनावे, रहने की जगह या व्यक्तिगत निर्णयों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
संन्यास के बाद भी उठ रहे हैं कई सवाल
गौरतलब है कि साध्वी हर्षानंद गिरि ने 18 अप्रैल को उज्जैन स्थित मौनी तीर्थ आश्रम में महामंडलेश्वर सुमनानंद से दीक्षा लेकर संन्यास ग्रहण किया था। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने गृहस्थ जीवन का त्याग करने की घोषणा की थी।
हालांकि संन्यास लेने के बाद भी उनके पहनावे, मेकअप, सोशल मीडिया पर सक्रियता और माता-पिता के घर आने-जाने को लेकर कुछ संतों ने सवाल उठाए हैं। इन मुद्दों को लेकर समय-समय पर धार्मिक और सामाजिक स्तर पर बहस भी देखने को मिली है।
सोशल मीडिया पर भी जारी है चर्चा
महाकुंभ के दौरान चर्चित होने के बाद से साध्वी हर्षानंद गिरि लगातार सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चाओं का हिस्सा बनी हुई हैं। उनके हर बयान और गतिविधि पर लोगों की नजर रहती है। जहां एक वर्ग उनके पक्ष में अपनी राय रखता है, वहीं कुछ लोग उनके संन्यास जीवन को लेकर सवाल भी उठाते रहे हैं।
ताजा बयान के बाद भी सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। समर्थकों का कहना है कि किसी भी महिला की सुरक्षा और व्यक्तिगत परिस्थितियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जबकि आलोचक संन्यास की पारंपरिक मर्यादाओं का हवाला दे रहे हैं।
साध्वी हर्षानंद गिरि ने अपने ताजा बयान के माध्यम से स्पष्ट कर दिया है कि परिवार के साथ रहने का उनका निर्णय परिस्थितियों और सुरक्षा की आवश्यकता को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई उनकी सुरक्षा की शत-प्रतिशत जिम्मेदारी लेने को तैयार हो तो वह आश्रम में रहने के लिए भी तैयार हैं। उनके इस बयान ने एक बार फिर संन्यास, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर नई चर्चा को जन्म दे दिया है।













