16 अक्टूबर 2026 6:00 अपराह्न

10.936 किलो चरस के साथ अंतर्राज्यीय तस्कर गिरफ्तार, डिलीवरी से पहले पुलिस ने दबोचा

10.936 किलो चरस के साथ गिरफ्तार अंतर्राज्यीय तस्कर, पुलिस टीम, बरामद चरस के पैकेट और रिपोर्टर चुन्नीलाल प्रधान

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चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

गोंडा। मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पुलिस और एएनटीएफ की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता मिली है। टीम ने एक अंतर्राज्यीय चरस तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 10.936 किलोग्राम अवैध चरस बरामद की है। बरामद चरस को 21 अलग-अलग पैकेटों में रखा गया था। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक हुंडई ईऑन कार और मोबाइल फोन भी कब्जे में लिया है।

पुलिस के मुताबिक आरोपी बड़ी मात्रा में चरस लेकर ग्राहक को डिलीवरी देने के लिए पहुंचा था। इससे पहले कि वह नशीले पदार्थ की खेप ग्राहक तक पहुंचा पाता, संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। बरामद चरस की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपये बताई गई है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और नशीले पदार्थ की सप्लाई की पूरी कड़ी का पता लगाने में जुटी है।

मुखबिर की सूचना पर सक्रिय हुई संयुक्त टीम

पुलिस के अनुसार मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े लोगों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि एक व्यक्ति भारी मात्रा में चरस लेकर पहुंचा है और जल्द ही किसी ग्राहक को इसकी डिलीवरी करने वाला है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए कोतवाली नगर पुलिस और एएनटीएफ बाराबंकी की संयुक्त टीम को सक्रिय किया गया।

टीम ने सूचना के आधार पर संदिग्ध स्थान की निगरानी शुरू कर दी। पुलिस को आशंका थी कि तस्कर वाहन के जरिए नशीले पदार्थ की खेप लेकर पहुंचेगा। इसके बाद टीम ने संभावित रास्तों पर नजर रखते हुए घेराबंदी की और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी।

रेलवे गेस्ट हाउस के पास कार रोककर हुई तलाशी

पुलिस कार्रवाई 28 सितंबर 2026 को उस समय हुई, जब संयुक्त टीम ने रेलवे गेस्ट हाउस के पास तालाब की ओर जाने वाली सड़क पर घेराबंदी की। इसी दौरान पुलिस टीम को एक संदिग्ध हुंडई ईऑन कार आती दिखाई दी। टीम ने कार को रोककर उसमें सवार व्यक्ति से पूछताछ शुरू की।

पूछताछ के दौरान पुलिस को संदेह होने पर वाहन की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान कार में मौजूद गिर्जेश कुमार वर्मा के कब्जे से बड़ी मात्रा में चरस बरामद हुई। जब बरामद पदार्थ की जांच की गई तो उसका कुल वजन 10.936 किलोग्राम पाया गया।

चरस को छोटे-बड़े कुल 21 पैकेटों में रखा गया था। पुलिस ने सभी पैकेटों को कब्जे में लेते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही जिस हुंडई ईऑन कार का इस्तेमाल खेप पहुंचाने के लिए किया जा रहा था, उसे भी जब्त कर लिया गया।

21 पैकेटों में छिपाकर लाई गई थी चरस

पुलिस के मुताबिक आरोपी के पास से बरामद चरस को एक साथ न रखकर 21 पैकेटों में अलग-अलग रखा गया था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में चरस कहां से खरीदी गई थी और इसे किन-किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।

इतनी बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद पुलिस की जांच केवल गिरफ्तार आरोपी तक सीमित नहीं है। अधिकारियों का प्रयास है कि चरस की खरीद से लेकर परिवहन और संभावित बिक्री तक जुड़े सभी लोगों की पहचान की जाए। पुलिस इस मामले में आरोपी से पूछताछ के आधार पर आगे की कड़ियां जोड़ रही है।

बिहार से सस्ते दाम पर खरीदकर यूपी में महंगे दाम पर बेचता था

पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह बिहार के खजुरिहा से चरस खरीदकर लाता था। उसके अनुसार वहां उसे यह नशीला पदार्थ अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिल जाता था। इसके बाद वह उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में इसे ऊंचे दाम पर बेचने का काम करता था।

पुलिस के मुताबिक इस बार भी आरोपी चरस की बड़ी खेप लेकर पहुंचा था। उसका उद्देश्य इसे एक ग्राहक तक पहुंचाना था। हालांकि ग्राहक तक खेप पहुंचने से पहले ही पुलिस और एएनटीएफ की संयुक्त टीम ने कार्रवाई कर दी।

पूछताछ में सामने आई इस जानकारी के बाद जांच एजेंसियों के सामने अब एक बड़ा सवाल यह है कि आरोपी लंबे समय से इस कारोबार में सक्रिय था या हाल के दिनों में उसने तस्करी शुरू की थी। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे और अलग-अलग जिलों में नशीले पदार्थ की सप्लाई किस माध्यम से की जाती थी।

रोजाना 2 हजार रुपये किराये पर ली थी कार

पुलिस के अनुसार तस्करी के लिए इस्तेमाल की जा रही हुंडई ईऑन कार आरोपी की अपनी नहीं थी। पूछताछ में उसने बताया कि उसने यह कार उत्तम सक्सेना नाम के व्यक्ति से किराये पर ली थी। कार के लिए वह प्रतिदिन 2,000 रुपये किराया दे रहा था।

जांच टीम अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि वाहन मालिक को कार के इस्तेमाल के उद्देश्य की जानकारी थी या नहीं। पुलिस वाहन से जुड़े दस्तावेजों और आरोपी के मोबाइल फोन की भी जांच कर रही है। मोबाइल फोन से संभावित संपर्कों और बातचीत के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

डिलीवरी से पहले ही पुलिस ने कर दिया खेल खत्म

पुलिस की कार्रवाई की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि आरोपी चरस की खेप ग्राहक तक पहुंचा पाता, उससे पहले ही उसे पकड़ लिया गया। यदि पुलिस समय रहते कार्रवाई नहीं करती तो 10.936 किलोग्राम चरस की यह खेप अलग-अलग स्थानों पर पहुंच सकती थी।

संयुक्त टीम की कार्रवाई के बाद बरामद नशीले पदार्थ को कब्जे में लेकर आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। पुलिस ने वाहन और मोबाइल फोन को भी जांच का हिस्सा बनाया है। मामले में आगे की कार्रवाई बरामदगी, पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।

करोड़ों रुपये की बताई जा रही बरामद चरस की कीमत

पुलिस ने बरामद चरस की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये बताई है। हालांकि किसी भी बरामद नशीले पदार्थ की वास्तविक कीमत उसके स्रोत, गुणवत्ता और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। पुलिस का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में चरस की बरामदगी मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण कार्रवाई है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि आरोपी को चरस की आपूर्ति कौन करता था। इसके अलावा संभावित खरीदार और डिलीवरी नेटवर्क की जानकारी भी जुटाई जा रही है। यदि पूछताछ और जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

मुकदमा दर्ज कर आरोपी को भेजा गया जेल

बरामदगी के बाद कोतवाली नगर पुलिस ने आरोपी गिर्जेश कुमार वर्मा के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने मामले की कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया।

न्यायालय से आदेश मिलने के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया। पुलिस अब मामले की आगे की विवेचना कर रही है। जांच में आरोपी के मोबाइल फोन, वाहन और पूछताछ से मिली जानकारी को आधार बनाकर चरस की पूरी सप्लाई चेन तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

मादक पदार्थों की इतनी बड़ी खेप पकड़े जाने से यह भी स्पष्ट होता है कि तस्कर नशीले पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किराये के वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस और एएनटीएफ की संयुक्त कार्रवाई के बाद अब जांच की दिशा उन लोगों की ओर भी है, जो इस नेटवर्क में पर्दे के पीछे रहकर नशीले पदार्थों की खरीद, परिवहन और बिक्री में भूमिका निभा सकते हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध बिक्री के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। बरामदगी के इस मामले में आरोपी से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।

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