अरमान अली की रिपोर्ट
जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले से मंगलवार शाम सीआईएसएफ कैंप में हुई फायरिंग की एक गंभीर घटना सामने आई है। मास्का क्षेत्र स्थित सेवा पावर स्टेशन-दो के सीआईएसएफ कैंप में किसी मामूली विवाद के बाद एक जवान ने कथित तौर पर अपने ही साथियों पर गोलियां चला दीं। अचानक हुई फायरिंग से कैंप में अफरा-तफरी मच गई। इस घटना में चार सीआईएसएफ जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद चारों की मौत हो गई।
मृतकों में सीआईएसएफ के एक असिस्टेंट कमांडेंट और एक सब-इंस्पेक्टर के अलावा दो कांस्टेबल शामिल हैं। घटना के बाद सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अधिकारियों में भी हलचल बढ़ गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना को अंजाम देने वाले हेड कांस्टेबल को हिरासत में लिया गया है। सीआईएसएफ मुख्यालय ने मामले की वास्तविक वजह और घटनाक्रम की पूरी जानकारी सामने लाने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए हैं।
मामूली विवाद के बाद बिगड़ी स्थिति
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम मास्का गांव में स्थित सेवा पावर स्टेशन-दो के सीआईएसएफ कैंप में जवानों के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई। शुरुआत में मामला सामान्य विवाद जैसा ही बताया जा रहा था, लेकिन देखते ही देखते स्थिति गंभीर हो गई।
आरोप है कि इसी विवाद के दौरान सीआईएसएफ के एक हेड कांस्टेबल ने अपने साथियों पर गोली चला दी। फायरिंग अचानक होने के कारण वहां मौजूद जवानों को संभलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। गोलियां चलने की आवाज से पूरे कैंप में तनाव और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल घायल जवानों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। उन्हें उपचार के लिए हिमाचल प्रदेश के खैरी स्थित एनएचपीसी अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल पहुंचने के बाद चारों जवानों ने दम तोड़ा
फायरिंग की घटना में चार सीआईएसएफ जवान घायल हुए थे। घटना के तुरंत बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया ताकि उनकी जान बचाई जा सके। हालांकि, घाव गंभीर होने के कारण चारों जवानों की मौत हो गई।
मृतकों की पहचान असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, एसआई लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल रफीक अहमद और कांस्टेबल संदीप कुमार के रूप में हुई है।
एक ही घटना में चार जवानों की मौत से सीआईएसएफ के साथ-साथ उनके परिवारों में भी शोक की स्थिति पैदा हो गई है। सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात जवानों के बीच हुई इस घटना ने कैंप की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और जवानों के बीच विवाद से जुड़ी परिस्थितियों को लेकर भी कई सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इन सवालों का आधिकारिक उत्तर जांच पूरी होने के बाद ही सामने आने की उम्मीद है।
पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे जवान
जिन जवानों की मौत हुई, वे जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे। उनका कैंप हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे बसोहली क्षेत्र के मशका गांव में स्थित था।
सेवा पावर स्टेशन-दो महत्वपूर्ण विद्युत परियोजना क्षेत्र में आता है और इसकी सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ के जवान तैनात किए गए थे। ड्यूटी के दौरान ही कैंप के भीतर यह घटना हुई। इस वजह से घटना को सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से भी गंभीर माना जा रहा है।
कठुआ का यह इलाका भौगोलिक रूप से जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश की सीमा के निकट है। ऐसे क्षेत्र में महत्वपूर्ण पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे जवानों के कैंप के भीतर इस तरह की घटना सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है।
हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार हिरासत में
फायरिंग की घटना को अंजाम देने के आरोप में सीआईएसएफ के हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार को हिरासत में ले लिया गया है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, विवाद के बाद उसी ने कथित तौर पर अपने साथियों पर फायरिंग की।
हालांकि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था, विवाद की शुरुआत किस बात को लेकर हुई और फायरिंग तक स्थिति कैसे पहुंची, इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल संबंधित जवान को हिरासत में लेकर मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
जांच एजेंसियां घटना से जुड़े प्रत्येक पहलू को समझने का प्रयास करेंगी। इसमें फायरिंग से पहले जवानों के बीच हुई बातचीत, विवाद की वजह, कैंप में मौजूद अन्य जवानों की भूमिका और घटना के समय की परिस्थितियां महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
सीआईएसएफ मुख्यालय ने दिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश
चार जवानों की मौत की गंभीर घटना को देखते हुए सीआईएसएफ मुख्यालय ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए हैं। इसका उद्देश्य घटना के पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच करना और यह पता लगाना है कि आखिर विवाद किस तरह इतना बढ़ गया कि हथियार का इस्तेमाल हो गया।
कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के दौरान घटना से जुड़े विभिन्न तथ्यों की जांच की जा सकती है। कैंप में उस समय कौन-कौन से जवान मौजूद थे, हथियारों की स्थिति क्या थी, फायरिंग से पहले क्या हुआ और घटना के बाद तत्काल क्या कदम उठाए गए—इन तमाम बिंदुओं को जांच के दायरे में लिया जाना स्वाभाविक है।
जांच से यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि घटना अचानक हुई या उससे पहले किसी तरह का तनाव मौजूद था। आधिकारिक जांच पूरी होने से पहले घटना के कारणों को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
चार परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
एक साथ चार जवानों की मौत ने उनके परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। देश और महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा में तैनात जवानों के परिवार हमेशा उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद रखते हैं। ऐसे में ड्यूटी के दौरान अपने ही कैंप में हुई फायरिंग में जवानों की जान जाना बेहद पीड़ादायक घटना है।
मृतकों में असिस्टेंट कमांडेंट से लेकर सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबल स्तर के जवान शामिल हैं। इससे घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। चारों जवान अपने-अपने स्तर पर सीआईएसएफ की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे।
घटना के बाद उनके सहकर्मियों और अधिकारियों के बीच भी शोक का माहौल है। सुरक्षा बलों में किसी जवान की ड्यूटी के दौरान मृत्यु अपने आप में गंभीर विषय होता है, लेकिन जब मौत का कारण किसी बाहरी हमले के बजाय कैंप के भीतर हुई फायरिंग हो, तो जांच की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
जांच से सामने आएगा फायरिंग का वास्तविक कारण
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में घटना की शुरुआत को दो जवानों के बीच हुए विवाद से जोड़ा गया है। लेकिन विवाद की प्रकृति और उसके बाद फायरिंग की पूरी परिस्थितियां अभी जांच का विषय हैं। इसलिए घटना के कारणों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ सकेगा।
सीआईएसएफ मुख्यालय द्वारा कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच से यह पता चलने की उम्मीद है कि कैंप में उस शाम वास्तव में क्या हुआ था और मामूली कहे जा रहे विवाद ने किस तरह इतना गंभीर रूप ले लिया।
इस घटना ने सुरक्षा बलों के कैंपों में अनुशासन, हथियारों की सुरक्षा और जवानों के बीच विवाद की स्थिति में तत्काल हस्तक्षेप जैसे मुद्दों को भी चर्चा में ला दिया है। हालांकि, इन पहलुओं पर किसी भी निष्कर्ष के लिए आधिकारिक जांच के परिणाम का इंतजार करना जरूरी होगा।
कठुआ की घटना ने खड़े किए कई सवाल
मास्का के सेवा पावर स्टेशन-दो स्थित सीआईएसएफ कैंप में हुई फायरिंग ने चार परिवारों से उनके प्रियजन छीन लिए। असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, एसआई लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल रफीक अहमद और कांस्टेबल संदीप कुमार की मौत के बाद अब पूरी नजर जांच पर है।
घटना के आरोपी हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार को हिरासत में लिया जा चुका है और सीआईएसएफ मुख्यालय ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश भी दे दिए हैं। ऐसे में आने वाले समय में जांच से घटना की पूरी कड़ी सामने आने की उम्मीद है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि कठुआ के सीआईएसएफ कैंप में मामूली विवाद के बाद हुई फायरिंग ने चार जवानों की जान ले ली है। घटना ने सुरक्षा बल के भीतर हुई हिंसक वारदात को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है। अब जांच रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी, फायरिंग किन परिस्थितियों में हुई और इस दुखद घटना के लिए जिम्मेदार परिस्थितियां कौन-सी थीं।













