समरसता का संदेश लेकर धर्मनगरी पहुंची कलश वंदन यात्रा, रविदास धाम के विकास पर फिर उठे सवाल

चित्रकूट में संत रविदास जी की 650वीं जयंती पर निकली कलश वंदन यात्रा, स्वागत समारोह, लालापुर स्थित रविदास मंदिर व कुटिया के विकास की मांग तथा रिपोर्टर संजय सिंह राणा की तस्वीर सहित फीचर इमेज।

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— संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में चित्रकूट जनपद में आयोजित कलश वंदन यात्रा ने सामाजिक समरसता, भाईचारे और समानता का संदेश देते हुए लोगों का व्यापक ध्यान आकर्षित किया। धर्मनगरी चित्रकूट पहुंची इस भव्य यात्रा का विभिन्न स्थानों पर श्रद्धा और उत्साह के साथ स्वागत किया गया। यात्रा में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, संत समाज और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की भागीदारी देखने को मिली। हालांकि इस आयोजन के बीच लालापुर स्थित संत रविदास महाराज की कुटिया और मंदिर की उपेक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया, जिसने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत, श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह

कलश वंदन यात्रा जैसे ही चित्रकूट जिले के विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरी, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और जयघोष के साथ उसका स्वागत किया। विशेष रूप से मानिकपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत भौंरी में यात्रा का भव्य अभिनंदन किया गया। ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं ने बड़ी संख्या में शामिल होकर संत रविदास जी के संदेशों के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

यात्रा के दौरान पूरे मार्ग में धार्मिक और सामाजिक एकता का वातावरण दिखाई दिया। लोगों ने इसे केवल धार्मिक आयोजन न मानकर सामाजिक समरसता को मजबूत करने वाला अभियान बताया।

जनप्रतिनिधियों ने उठाया कलश, दिया समरसता का संदेश

कलश वंदन यात्रा में भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष महेन्द्र कोटार्य तथा मानिकपुर क्षेत्र पंचायत प्रमुख अरविन्द कुमार मिश्रा ने स्वयं कलश धारण कर यात्रा में सहभागिता निभाई। दोनों नेताओं ने संत रविदास जी के विचारों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए सामाजिक समानता और आपसी सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया।

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यात्रा में पूर्व राज्यमंत्री एवं पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय तथा को-ऑपरेटिव सहकारी समिति के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल भी शामिल हुए। उनकी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक महत्व प्रदान किया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि संत रविदास का जीवन समाज के अंतिम व्यक्ति तक सम्मान और समान अवसर पहुंचाने की प्रेरणा देता है।

समरसता संकल्प अभियान का जिले में हुआ आयोजन

संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित इस यात्रा का उद्देश्य समाज में जातीय भेदभाव समाप्त कर आपसी भाईचारे और समानता का संदेश देना बताया गया। यात्रा के दौरान संत रविदास के जीवन, उनके विचारों और सामाजिक योगदान पर चर्चा की गई।

वक्ताओं ने कहा कि संत रविदास ने सदियों पहले जिस समतामूलक समाज की कल्पना की थी, आज भी उनके विचार उतने ही प्रासंगिक हैं। समाज के सभी वर्गों को उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।

वाल्मीकि आश्रम का हुआ कायाकल्प, लेकिन रविदास धाम की उपेक्षा क्यों?

कलश वंदन यात्रा के बीच एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी सामने आया। लालापुर स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम के विकास और कायाकल्प के कार्यों की सराहना की जा रही है, लेकिन उसी परिसर की तलहटी में स्थित संत रविदास महाराज की कुटिया और मंदिर की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की।

श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि समरसता संकल्प अभियान वास्तव में संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है, तो उनके ऐतिहासिक और आस्था से जुड़े स्थलों के संरक्षण एवं विकास को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए। लोगों का मानना है कि केवल यात्राएं और आयोजन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उन स्थानों का भी समुचित विकास होना चाहिए जिनका संत रविदास के जीवन और परंपरा से गहरा संबंध माना जाता है।

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गुरु पूर्णिमा पर भी नहीं दिखा अपेक्षित प्रभाव

स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर लालापुर स्थित संत रविदास मंदिर और कुटिया में समरसता संकल्प अभियान का प्रभाव अपेक्षित रूप से दिखाई नहीं दिया। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि संत रविदास की जयंती और समरसता अभियान को व्यापक स्तर पर मनाया जा रहा है तो ऐसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष कार्यक्रम और विकास कार्य भी दिखाई देने चाहिए थे।

इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र के लोगों ने संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित करते हुए मांग की है कि भविष्य में इस ऐतिहासिक स्थल की उपेक्षा समाप्त की जाए।

स्थानीय लोगों की प्रमुख मांग

ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का कहना है कि लालापुर स्थित संत रविदास महाराज मंदिर और कुटिया का सौंदर्यीकरण, आधारभूत सुविधाओं का विकास, परिसर की साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था तथा पहुंच मार्ग को बेहतर बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

लोगों का यह भी कहना है कि जिस प्रकार अन्य धार्मिक स्थलों का संरक्षण और विकास किया जा रहा है, उसी प्रकार संत रविदास से जुड़े इस महत्वपूर्ण स्थल को भी योजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए।

सामाजिक संदेश के साथ विकास की उम्मीद

कलश वंदन यात्रा ने निश्चित रूप से समाज में समरसता, भाईचारे और समानता का संदेश देने का कार्य किया है। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि संत रविदास के विचार आज भी समाज को जोड़ने की शक्ति रखते हैं। हालांकि यात्रा के दौरान उठे सवाल यह भी संकेत देते हैं कि सामाजिक संदेश के साथ-साथ संत रविदास से जुड़े ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के संरक्षण तथा विकास की दिशा में ठोस पहल की अपेक्षा बनी हुई है।

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अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित प्रशासन और जनप्रतिनिधि लालापुर स्थित संत रविदास महाराज मंदिर एवं कुटिया के कायाकल्प को लेकर क्या कदम उठाते हैं। यदि इन स्थलों के विकास की दिशा में प्रभावी पहल होती है, तो यह समरसता संकल्प अभियान की भावना को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा तथा श्रद्धालुओं की लंबे समय से चली आ रही अपेक्षाओं को भी पूरा करेगा।

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Author: यायावर

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