चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे आउटसोर्स और संविदा बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बिजली के पोल, लाइन, ट्रांसफार्मर और अन्य विद्युत उपकरणों पर जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लगातार दुर्घटनाग्रस्त होने को लेकर पावर कारपोरेशन संविदा कर्मचारी संघ ने गहरी नाराजगी जताई है। संगठन ने घटनाओं को बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसके लिए उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
संघ का कहना है कि बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर चेतावनी दिए जाने के बावजूद यदि पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित और अनुभवी कर्मचारियों की तैनाती नहीं की जाती है, तो दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहेगा। संगठन के अनुसार पिछले 49 दिनों के दौरान प्रदेश में 56 आउटसोर्स बिजली कर्मचारियों के दुर्घटनाग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 30 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है, जबकि 26 कर्मचारी गंभीर रूप से घायल बताए गए हैं।
पहले ही दी गई थी कर्मचारियों की कमी को लेकर चेतावनी
पावर कारपोरेशन संविदा कर्मचारी संघ ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों को लेकर प्रबंधन को पहले ही आगाह किया जा चुका था। संगठन की ओर से 29 मई 2026 को उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को पत्र भेजा गया था।
इस पत्र में कर्मचारियों की संख्या में कमी और अनुभवी आउटसोर्स कर्मियों को हटाए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। संघ का आरोप है कि नियमों की अनदेखी करते हुए कई अनुभवी आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने से विद्युत विभाग में कार्यबल का संतुलन बिगड़ गया है।
संगठन के मुताबिक कर्मचारियों की कमी का सीधा असर मौजूदा कर्मचारियों के कार्यभार पर पड़ा है। सीमित संख्या में कर्मचारियों से अधिक काम लिया जा रहा है और कई स्थानों पर ऐसे कर्मचारियों को भी लाइन संबंधी कार्यों में लगाया जा रहा है, जिनके पास पर्याप्त अनुभव नहीं है।
बिजली लाइन पर काम करना अत्यंत जोखिमपूर्ण माना जाता है। ऐसे कार्यों में तकनीकी दक्षता, पर्याप्त प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन बेहद जरूरी होता है। संघ का दावा है कि कर्मचारियों की कमी के चलते इन सभी पहलुओं पर दबाव बढ़ रहा है।
एक कर्मचारी के भरोसे चल रहा काम?
संघ ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां एक ही कर्मचारी से काम लिया जा रहा है। संगठन के अनुसार बिजली संबंधी जोखिमपूर्ण कार्यों में कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या का होना आवश्यक है, ताकि काम के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया जा सके और किसी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध हो।
लेकिन यदि एक कर्मचारी पर ही कई प्रकार की जिम्मेदारियां डाल दी जाएं तो न केवल काम का दबाव बढ़ता है, बल्कि दुर्घटना की आशंका भी बढ़ सकती है। संगठन का कहना है कि फील्ड में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के मामले में इस स्थिति को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
अनुभवी कर्मचारियों को वापस लेने की मांग
29 मई को भेजे गए पत्र के माध्यम से संविदा कर्मचारी संघ ने प्रबंधन से कई मांगें रखी थीं। इनमें सबसे प्रमुख मांग उन अनुभवी आउटसोर्स कर्मचारियों को दोबारा काम पर लेने की थी, जिन्हें हटाया गया है।
संगठन का कहना था कि लंबे समय से बिजली विभाग में काम कर चुके कर्मचारियों को विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों और अन्य तकनीकी कार्यों का व्यावहारिक अनुभव होता है। ऐसे कर्मचारियों को हटाए जाने के बाद उनकी जगह नए या कम अनुभवी कर्मचारियों को जिम्मेदारी देने से फील्ड में जोखिम बढ़ सकता है।
इसके साथ ही संघ ने उपभोक्ताओं की लगातार बढ़ती संख्या के अनुपात में कर्मचारियों की तैनाती किए जाने की मांग भी की थी। संगठन का तर्क है कि बिजली कनेक्शनों और उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने के साथ ही विद्युत व्यवस्था को संभालने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।
प्रबंधन पर मांगों की अनदेखी का आरोप
पावर कारपोरेशन संविदा कर्मचारी संघ का आरोप है कि 29 मई को पत्र के माध्यम से चेतावनी दिए जाने के बावजूद प्रबंधन ने इन मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया। संगठन का कहना है कि यदि उस समय कर्मचारियों की कमी और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी निर्णय लिया जाता तो मौजूदा स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता था।
संघ के मुताबिक कर्मचारियों पर बढ़ता कार्य दबाव, अनुभव की कमी और पर्याप्त मानव संसाधन का अभाव बिजली क्षेत्र में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ा सुरक्षा जोखिम बन गया है।
हालांकि दुर्घटनाओं और कर्मचारियों की मौत के वास्तविक कारणों का निर्धारण विस्तृत और स्वतंत्र जांच के बाद ही किया जा सकता है। इसलिए संगठन ने घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटनाओं के पीछे तकनीकी खामी, सुरक्षा नियमों की अनदेखी, पर्याप्त स्टाफ की कमी, प्रशिक्षण का अभाव अथवा अन्य कोई कारण जिम्मेदार है।
56 हादसों के आंकड़े ने बढ़ाई चिंता
संघ की ओर से सामने रखे गए आंकड़े बेहद गंभीर हैं। संगठन के अनुसार महज 49 दिनों में 56 आउटसोर्स बिजली कर्मचारी दुर्घटनाओं का शिकार हुए हैं। इनमें 30 कर्मचारियों की जान चली गई, जबकि 26 गंभीर रूप से घायल हुए।
यदि इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होती है तो यह बिजली क्षेत्र में फील्ड कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करता है। विद्युत कार्यों में एक छोटी सी चूक भी कर्मचारी के जीवन के लिए घातक साबित हो सकती है। ऐसे में सुरक्षा प्रशिक्षण, सुरक्षात्मक उपकरण, पर्याप्त स्टाफ और कार्य से पहले आवश्यक तकनीकी जांच को प्राथमिकता देना जरूरी है।
संगठन का कहना है कि दुर्घटना के बाद केवल मुआवजा या राहत देना पर्याप्त नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि दुर्घटना की मूल वजह सामने लाई जाए और भविष्य में उसी प्रकार की घटना दोबारा न हो, इसके लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
पावर कारपोरेशन संविदा कर्मचारी संघ ने दुर्घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच के साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही, सुरक्षा नियमों की अनदेखी या निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
संघ ने यह भी मांग की है कि सभी आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही जोखिमपूर्ण कार्यों में पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की तैनाती, नियमित सुरक्षा प्रशिक्षण और अनुभवी कर्मियों की सेवाओं का उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर ठोस नीति की जरूरत
बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा केवल विभागीय विषय नहीं है। यह सीधे तौर पर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था और करोड़ों उपभोक्ताओं से जुड़ा मामला है। फील्ड में काम करने वाले कर्मचारी सुरक्षित रहेंगे तभी बिजली आपूर्ति से जुड़े कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकेगा।
संविदा कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो दुर्घटनाओं का सिलसिला रोकना मुश्किल हो सकता है। संगठन चाहता है कि पावर कारपोरेशन प्रबंधन कर्मचारियों की संख्या, प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और कार्यस्थल की परिस्थितियों की व्यापक समीक्षा करे।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं के बाद क्या प्रबंधन कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था में ठोस बदलाव करेगा? क्या अनुभवी आउटसोर्स कर्मचारियों की कमी और बढ़ते कार्यभार की समस्या का समाधान किया जाएगा? और क्या दुर्घटनाओं की निष्पक्ष जांच के बाद जवाबदेही तय होगी?
बिजली व्यवस्था को बनाए रखने के लिए दिन-रात जोखिम उठाने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। संगठन की मांग है कि दुर्घटनाओं को केवल आंकड़ों के रूप में देखने के बजाय प्रत्येक घटना के पीछे मौजूद कारणों की गंभीरता से पड़ताल की जाए और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसमें कर्मचारी सुरक्षित वातावरण में अपना कार्य कर सकें।
मुख्य बिंदु : 49 दिनों में 56 आउटसोर्स बिजली कर्मचारी दुर्घटनाग्रस्त होने का दावा | 30 कर्मचारियों की मौत | 26 गंभीर रूप से घायल | 29 मई को प्रबंधन को भेजा गया था पत्र | अनुभवी कर्मचारियों को वापस लेने की मांग | उच्चस्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग













