अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट
हरदोई। उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के बीच विवाहित महिला अभ्यर्थियों के सामने जाति प्रमाण पत्र को लेकर एक नई प्रशासनिक परेशानी खड़ी हो गई है। हरदोई जिले में कई महिला अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों का कहना है कि शिक्षक भर्ती के आवेदन के लिए पिता पक्ष की तहसील से जारी डिजिटल जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता बताई जा रही है। ऐसे में विवाह के बाद दूसरे परिवार में रहने वाली महिलाओं को अपने मायके की तहसील से संबंधित दस्तावेज बनवाने के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि एक ओर शिक्षक भर्ती में आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर 2026 निर्धारित है, वहीं दूसरी ओर पिता पक्ष से जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं होने से उनका आवेदन अधर में पड़ सकता है। कई परिवारों का दावा है कि वे प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसील और संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिल पा रहा है।
पिता पक्ष से डिजिटल जाति प्रमाण पत्र की मांग से बढ़ी परेशानी
महिला अभ्यर्थियों के अनुसार शिक्षक भर्ती के आवेदन में जाति संबंधी दस्तावेजों को लेकर पिता पक्ष से जारी डिजिटल प्रमाण पत्र की आवश्यकता सामने आने के बाद समस्या गंभीर हो गई है। विवाहित महिलाओं के लिए यह स्थिति इसलिए कठिन है क्योंकि विवाह के बाद उनका निवास, पारिवारिक पता और कई सरकारी अभिलेख ससुराल पक्ष से जुड़े होते हैं, जबकि जाति प्रमाण पत्र के लिए उन्हें पिता पक्ष से संबंधित अभिलेखों की जरूरत पड़ रही है।
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अभिभावकों का कहना है कि प्रमाण पत्र बनवाने के उद्देश्य से जब वे तहसील पहुंच रहे हैं तो उन्हें प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग तरह की जानकारी मिल रही है। इससे आवेदन की समय सीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेज तैयार कराना चुनौती बन गया है।
लेखपालों के सामने भी शासनादेश की स्पष्टता का सवाल
अभ्यर्थियों और उनके परिवारों की ओर से लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार कुछ मामलों में लेखपालों का कहना है कि उनके पास ऐसा कोई स्पष्ट शासनादेश उपलब्ध नहीं है, जिसके आधार पर वे पिता पक्ष की तहसील से महिला अभ्यर्थी के लिए जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकें।
यही स्थिति अब अभ्यर्थियों के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण बन गई है। एक तरफ भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेजों की आवश्यकता बताई जा रही है और दूसरी तरफ संबंधित स्तर पर प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने की शिकायत सामने आ रही है। इससे महिला अभ्यर्थियों को आशंका है कि यदि समय रहते प्रमाण पत्र नहीं बन पाया तो वे शिक्षक भर्ती का आवेदन पूरा नहीं कर पाएंगी।
15 अक्टूबर की अंतिम तारीख ने बढ़ाई चिंता
शिक्षक भर्ती के आवेदन की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर 2026 बताई जा रही है। समय सीमा नजदीक आने के साथ ही अभ्यर्थियों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। महिला अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में आवेदन करने के लिए आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध होना बेहद जरूरी है।
उनका कहना है कि यदि प्रमाण पत्र बनवाने में ही कई दिन या सप्ताह लग गए और आवेदन की अंतिम तारीख निकल गई तो उनकी मेहनत और तैयारी पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। यही वजह है कि प्रभावित अभ्यर्थी और उनके परिवार चाहते हैं कि शासन और जिला प्रशासन इस मामले में जल्द स्पष्ट आदेश जारी करे।
विवाहित महिला अभ्यर्थियों ने उठाई प्रक्रिया आसान करने की मांग
महिला अभ्यर्थियों का कहना है कि विवाह के बाद भी यदि किसी भर्ती में उनके पिता पक्ष से संबंधित जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता है तो उसे उपलब्ध कराने की प्रक्रिया स्पष्ट और सरल होनी चाहिए। उनका कहना है कि उन्हें प्रमाण पत्र के लिए एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भटकना न पड़े और संबंधित अधिकारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समयबद्ध तरीके से प्रमाण पत्र जारी कर सकें।
अभ्यर्थियों के बीच इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि आवेदन की अंतिम तारीख घोषित होने के बावजूद प्रमाण पत्र को लेकर उत्पन्न व्यावहारिक समस्या का समाधान अभी तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। उनका कहना है कि सरकारी भर्ती में पारदर्शिता के साथ-साथ ऐसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को भी सरल बनाया जाना चाहिए, ताकि किसी अभ्यर्थी को केवल दस्तावेज संबंधी समस्या के कारण आवेदन से वंचित न होना पड़े।
सरकार से स्पष्ट शासनादेश जारी करने की मांग
प्रभावित महिला अभ्यर्थियों और उनके परिवारों की मांग है कि शासन इस मामले में तत्काल स्थिति स्पष्ट करे। उनका कहना है कि यदि पिता पक्ष की तहसील से जाति प्रमाण पत्र आवश्यक है तो संबंधित तहसील के लेखपाल और अन्य राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि पात्र महिला अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र समय पर तैयार हो सकें।
अभ्यर्थियों का कहना है कि शासनादेश की स्पष्टता होने पर तहसील स्तर पर भी भ्रम की स्थिति समाप्त होगी और अधिकारी निर्धारित नियमों के तहत आवेदन पर कार्रवाई कर सकेंगे। इससे महिला अभ्यर्थियों को बार-बार तहसील के चक्कर लगाने से भी राहत मिल सकती है।
दस्तावेज की समस्या से भर्ती का अवसर प्रभावित होने की आशंका
शिक्षक बनने की तैयारी कर रही महिला अभ्यर्थियों के लिए भर्ती का प्रत्येक अवसर महत्वपूर्ण होता है। कई अभ्यर्थी लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रही हैं। ऐसे में यदि दस्तावेज संबंधी किसी तकनीकी या प्रशासनिक समस्या के कारण उनका आवेदन जमा नहीं हो पाता है तो उन्हें दोबारा अवसर के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
हरदोई में सामने आई इस समस्या को लेकर अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार को आवेदन प्रक्रिया के दौरान आने वाली ऐसी व्यावहारिक दिक्कतों पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। उनका आग्रह है कि संबंधित विभाग, जिला प्रशासन और राजस्व विभाग आपसी समन्वय से समस्या का समाधान निकालें तथा अभ्यर्थियों को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराएं।
समय रहते समाधान की उम्मीद
महिला अभ्यर्थियों की नजर अब शासन और प्रशासन के अगले कदम पर है। आवेदन की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर 2026 होने के कारण उनका कहना है कि समाधान में देरी उनके लिए परेशानी बढ़ा सकती है। अभ्यर्थी चाहते हैं कि पिता पक्ष की तहसील से डिजिटल जाति प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं और प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को समयबद्ध किया जाए।
महिला अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती में उनकी योग्यता और तैयारी का मूल्यांकन होना चाहिए तथा केवल प्रमाण पत्र संबंधी प्रक्रिया की अस्पष्टता उनके आवेदन में बाधा नहीं बननी चाहिए। अब देखना होगा कि शासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और पिता पक्ष से जाति प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर राजस्व अधिकारियों के लिए क्या स्पष्ट व्यवस्था सामने आती है।













