कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसके नवीनतम उपचारों की जानकारी देने के उद्देश्य से आयोजित एक दिवसीय व्याख्यान में विश्व प्रसिद्ध कैंसर वैज्ञानिक एवं गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि “कैंसर का सबसे अच्छा इलाज कैंसर से बचाव है।” उन्होंने कहा कि समय रहते सावधानी, नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मदन मोहन मालवीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित “एडवांसेज इन द प्रिवेंशन एंड ट्रीटमेंट ऑफ कैंसर” विषयक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए प्रो. सिंह ने कहा कि देश में लगातार बढ़ रही क्रॉनिक बीमारियां स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। कैंसर भी उन्हीं गंभीर बीमारियों में शामिल है, जिसके प्रति समाज को अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है।
प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है कैंसर का उल्लेख
अपने व्याख्यान में प्रो. सिंह ने कैंसर के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारतीय चिकित्सा परंपरा में भी इस रोग का उल्लेख मिलता है। उन्होंने कहा कि चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में कैंसर जैसी अवस्थाओं का वर्णन ‘ग्रंथि’ और ‘अर्बुद’ के रूप में किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि यह रोग आधुनिक युग की देन नहीं, बल्कि प्राचीन काल से मानव समाज के सामने मौजूद चुनौती रहा है।
तीन प्रमुख कारकों से बढ़ता है कैंसर का खतरा
प्रो. सिंह ने कैंसर के प्रमुख कारणों की चर्चा करते हुए कहा कि रासायनिक (केमिकल), भौतिक (फिजिकल) और जैविक (बायोलॉजिकल) कारक इसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने युवाओं से तंबाकू, धूम्रपान और अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि स्वस्थ जीवनशैली कैंसर की रोकथाम का सबसे प्रभावी माध्यम है।
एबीसी मॉडल से समझाया कैंसर का विज्ञान
जटिल वैज्ञानिक विषय को सरल भाषा में समझाते हुए उन्होंने कोशिकाओं के नियंत्रण तंत्र को एबीसी मॉडल यानी एक्सीलेटर, ब्रेक और क्लच के उदाहरण से स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि शरीर में मौजूद ट्यूमर सप्रेसर जीन और प्रोटो-ऑन्को जीन सामान्य परिस्थितियों में कोशिकाओं की वृद्धि को नियंत्रित करते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ जाता है तो कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और कैंसर का रूप ले सकती हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि आधुनिक अनुसंधान ऐसे उपचार विकसित कर रहा है जिनके माध्यम से कैंसर कोशिकाओं तक रक्त वाहिकाओं की पहुंच को सीमित किया जा सकता है। इससे कैंसर के विकास की गति को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
छात्र-छात्राओं ने पूछे सवाल, विशेषज्ञ ने दिए जवाब
व्याख्यान के दौरान छात्र-छात्राओं ने कैंसर से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे। प्रो. सिंह ने सरल और वैज्ञानिक ढंग से उनके प्रश्नों का उत्तर देते हुए कैंसर की रोकथाम, पहचान और उपचार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए प्रमाणिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की।
कैंसर पूरे परिवार को प्रभावित करता है : प्रबंधक
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्रबंधक राघवेंद्र वीर विक्रम सिंह ने कैंसर से जुड़े अपने निजी अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि कैंसर केवल एक व्यक्ति की बीमारी नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। आर्थिक, मानसिक और सामाजिक स्तर पर परिवार को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए समय पर जांच और उपचार के साथ-साथ जागरूकता भी अत्यंत आवश्यक है।
सरस्वती वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। अध्यक्षीय संबोधन एवं आभार ज्ञापन प्राचार्य प्रो. सतीश चंद्र गौड़ ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रंजीत सिंह ने किया।
इस अवसर पर प्रो. सुधीर कुमार शुक्ला, प्रो. मनोज कुमार, प्रो. राकेश कुमार, डॉ. मनीष नाथ त्रिपाठी, डॉ. अमीर लाल, डॉ. दिनेश शर्मा, डॉ. अजय सिंह, डॉ. महेंद्र कुमार मिश्र, डॉ. शैलेंद्र पाठक, डॉ. अमन तिवारी, डॉ. विदुषी सिंह, डॉ. कीर्ति कुमार जायसवाल, डॉ. सुशील पांडे, डॉ. अवनीत सिंह, डॉ. ज्ञान प्रकाश, डॉ. धर्मजीत तथा लाइब्रेरियन राजेश धर द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यालय अधीक्षक प्रवीण शाही तथा शिव प्रसाद की विशेष भूमिका रही। व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को कैंसर की रोकथाम, शुरुआती पहचान और आधुनिक उपचार संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं। विशेषज्ञों ने कहा कि जागरूकता, नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वस्थ जीवनशैली ही कैंसर के खिलाफ सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है।













