16 अक्टूबर 2026 8:06 अपराह्न

गणेश पूजा के दौरान बड़ा हादसा: बारिश के पानी के भार से गिरी रेलिंग, महिला की मौत

बारिश के दौरान गणेश पूजा कार्यक्रम में रेलिंग गिरने के बाद मलबा, टूटी कुर्सियां और दुर्घटनास्थल का दृश्य, जिसमें एक महिला की मौत और कई श्रद्धालु घायल हुए।

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रिपोर्ट : रीतेश कुमार गुप्ता

गणेश पूजा के दौरान बुधवार दोपहर एक धर्मशाला में उस समय बड़ा हादसा हो गया, जब तेज बारिश के बीच तिरपाल के सहारे लगी तीसरी मंजिल की रेलिंग अचानक टूटकर नीचे पूजा-अर्चना कर रहे श्रद्धालुओं पर जा गिरी। रेलिंग के साथ तिरपाल और उससे जुड़े अन्य सामान भी नीचे आ गिरे। अचानक हुए इस हादसे से मौके पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और श्रद्धालुओं के बीच चीख-पुकार मच गई। हादसे में कई लोग घायल हुए, जबकि उपचार के दौरान उमा कपूर नाम की एक महिला की मौत हो गई।

घटना बुधवार दोपहर करीब 12:30 बजे हुई। उस समय धर्मशाला के आंगन में बनाए गए गणेश पूजा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। वहां करीब डेढ़ फीट ऊंची गणेश प्रतिमा स्थापित की गई थी और श्रद्धालु पूजा-अर्चना में शामिल थे। इसी दौरान मौसम अचानक खराब हुआ और तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचाव के लिए लगाए गए तिरपाल पर पानी जमा होने लगा। पानी लगातार जमा होने के कारण तिरपाल का वजन बढ़ता गया और उसका दबाव उस रेलिंग पर पड़ने लगा, जिसके सहारे तिरपाल बांधा गया था।

तेज बारिश के बीच अचानक टूट गई रेलिंग

प्रत्यक्ष घटनाक्रम के अनुसार बारिश का पानी तिरपाल पर जमा होने के बाद कुछ ही देर में रेलिंग पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया। इसके बाद तीसरी मंजिल की रेलिंग भरभराकर नीचे गिर पड़ी। ताजा रिपोर्टों में मौके पर पहुंचे अधिकारियों के हवाले से रेलिंग के कमजोर होने और उसके सहारे तिरपाल बांधे जाने की जानकारी सामने आई है। एक रिपोर्ट में रेलिंग की ऊंचाई करीब 15 मीटर और लंबाई लगभग 10 मीटर बताए जाने का भी उल्लेख है। हालांकि हादसे की अंतिम तकनीकी वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

रेलिंग के नीचे गिरते ही वहां बैठे और पूजा में शामिल श्रद्धालु उसकी चपेट में आ गए। रेलिंग की ईंटें, मलबा और तिरपाल नीचे मौजूद लोगों पर गिरने से कई लोगों को चोटें आईं। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ ही क्षणों में पूजा का माहौल अफरा-तफरी में बदल गया। आसपास मौजूद लोगों ने घायलों को मलबे से निकालने और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का प्रयास शुरू किया।

हादसे के बाद मची चीख-पुकार

रेलिंग गिरने के बाद धर्मशाला परिसर में मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। किसी को तत्काल समझ नहीं आया कि अचानक क्या हुआ। कुछ लोग घायलों की मदद के लिए दौड़े तो कई लोग अपने परिजनों और परिचितों को तलाशने लगे। सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अमला भी सक्रिय हुआ। एंबुलेंस की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया।

घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग प्रारंभिक रिपोर्टें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में करीब नौ से दस घायलों की जानकारी दी गई, जबकि अन्य रिपोर्टों में इससे अधिक लोगों के घायल होने का उल्लेख है। कुछ घायलों को गंभीर चोटें आने के कारण बेहतर उपचार के लिए उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसलिए घायलों की अंतिम संख्या और उनकी वर्तमान स्थिति की आधिकारिक पुष्टि प्रशासनिक रिकॉर्ड से होना महत्वपूर्ण है।

उमा कपूर की उपचार के दौरान मौत

हादसे में घायल उमा कपूर को भी उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। उपलब्ध रिपोर्टों में उनकी उम्र अलग-अलग बताई गई है, इसलिए उनकी उम्र को लेकर अंतिम और आधिकारिक आंकड़े की पुष्टि जरूरी है। उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद परिवार और परिचितों में शोक का माहौल है। गणेश उत्सव के दौरान हुई यह घटना श्रद्धालुओं के लिए बेहद दुखद साबित हुई।

अस्पताल में भर्ती अन्य घायलों का उपचार जारी है। कुछ घायलों के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में चोट आने की जानकारी सामने आई है। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा है। गंभीर घायलों को आवश्यकता के अनुसार उच्च चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी अपनाई गई।

धर्मशाला में चल रहा था गणेश महोत्सव

धर्मशाला में गणेश महोत्सव का आयोजन किया जा रहा था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक गणेश उत्सव के तहत वहां कई दिनों से धार्मिक कार्यक्रम चल रहे थे। बुधवार को भी पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का कार्यक्रम था। इसी दौरान बारिश ने आयोजन स्थल की व्यवस्था को प्रभावित किया। श्रद्धालुओं को बारिश से बचाने के लिए आंगन में तिरपाल लगाया गया था। इसी तिरपाल पर पानी जमा होना बाद में हादसे की प्रमुख परिस्थितियों में से एक बना।

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक गणेश प्रतिमा आंगन में बने पंडाल के भीतर स्थापित थी और हादसे में प्रतिमा को नुकसान नहीं पहुंचा। रेलिंग और तिरपाल का हिस्सा प्रतिमा के आसपास मौजूद श्रद्धालुओं पर गिरा। रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि रेलिंग से जुड़े पंडाल के झूमर भी नीचे आ गिरे थे।

डीएम और एसपी समेत अधिकारी मौके पर पहुंचे

हादसे की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. और पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल समेत प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और हादसे की परिस्थितियों की जानकारी ली। इसके बाद जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों के उपचार की स्थिति भी जानी गई। चिकित्सकों से घायलों की हालत और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधाओं के बारे में जानकारी ली गई।

प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान रेलिंग की मजबूती, उसकी पुरानी स्थिति, तिरपाल बांधने की व्यवस्था और बारिश के पानी की निकासी समेत कई पहलुओं को देखा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी में रेलिंग के पुराने और कमजोर होने की बात कही गई है, हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।

मंत्रियों ने अस्पताल पहुंचकर जाना घायलों का हाल

हादसे के बाद कारागार राज्य मंत्री सुरेश राही और भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ला समेत अन्य लोग भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात की तथा उपचार की जानकारी ली। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से चिकित्सकों को घायलों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। ताजा रिपोर्टों में अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जानने वालों में अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों का भी उल्लेख किया गया है।

हादसे ने आयोजन स्थल की सुरक्षा पर उठाए सवाल

धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रहती है। ऐसे में आयोजन स्थल की संरचनात्मक सुरक्षा और अस्थायी इंतजामों की मजबूती बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। इस घटना के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस रेलिंग के सहारे तिरपाल लगाया गया था, उसकी मजबूती की पहले जांच की गई थी या नहीं। तेज बारिश के दौरान तिरपाल पर पानी जमा होने की स्थिति से निपटने के लिए पानी की निकासी की पर्याप्त व्यवस्था थी या नहीं, यह भी जांच का विषय है।

स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि यदि रेलिंग पुरानी या कमजोर थी तो उसके सहारे भारी तिरपाल और अन्य सजावटी सामान क्यों लगाया गया। हालांकि इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट रूप से सामने आएगा। फिलहाल किसी व्यक्ति या संस्था पर लापरवाही का आरोप लगाना जांच के निष्कर्ष से पहले उचित नहीं होगा।

आकाशीय बिजली की चर्चा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं

हादसे के बाद कुछ रिपोर्टों में आकाशीय बिजली गिरने की चर्चा भी सामने आई। हालांकि उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी में इसकी पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल हादसे को आकाशीय बिजली से जोड़ना पुष्ट तथ्य नहीं माना जा सकता। प्रारंभिक जांच में बारिश के पानी के भार और कमजोर रेलिंग के टूटने की स्थिति पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

जांच के बाद स्पष्ट होगी हादसे की वास्तविक वजह

गणेश पूजा के दौरान हुआ यह हादसा कई परिवारों के लिए उत्सव के बीच गहरे दुख का कारण बन गया। एक महिला की मौत और कई श्रद्धालुओं के घायल होने के बाद अब प्रशासन के सामने हादसे की वास्तविक वजह पता लगाने और आयोजन स्थल की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की चुनौती है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि रेलिंग की संरचनात्मक कमजोरी कितनी पुरानी थी, तिरपाल का भार कितना था और बारिश के पानी की निकासी की क्या व्यवस्था थी।

घटना ने यह भी सामने ला दिया है कि धार्मिक और सार्वजनिक आयोजनों में अस्थायी व्यवस्थाएं भी उतनी ही गंभीरता से जांची जानी चाहिए जितनी स्थायी संरचनाएं। खासकर बारिश के मौसम में तिरपाल, पंडाल, रेलिंग, छज्जे और सजावटी सामान की सुरक्षित स्थापना महत्वपूर्ण हो जाती है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस हादसे में केवल प्राकृतिक परिस्थितियां जिम्मेदार थीं या आयोजन स्थल की सुरक्षा व्यवस्था में भी कोई कमी थी।

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