चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
लखनऊ, उत्तर प्रदेश के विद्युत तकनीकी कर्मचारियों की विभिन्न लंबित समस्याओं को लेकर शनिवार को राजधानी लखनऊ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। विद्युत तकनीकी कर्मचारी एकता संघ, उत्तर प्रदेश की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक होटल हेरिटेज इन में केंद्रीय अध्यक्ष विभांशु कुमार सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में प्रदेश भर से आए केंद्रीय पदाधिकारियों, संरक्षकों, जिला अध्यक्षों, महामंत्रियों और अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा तकनीकी कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया।
बैठक के दौरान कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं, पदोन्नति, कार्य परिस्थितियों और सुविधाओं को लेकर व्यापक चर्चा हुई। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि लंबे समय से तकनीकी कर्मचारियों की कई महत्वपूर्ण मांगें लंबित हैं, जिनके कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। यदि इन समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं किया गया तो संगठन को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर हुई चर्चा
बैठक में तकनीकी कर्मचारियों के आमेलन, पदोन्नति और सेवा संबंधी विसंगतियों को प्रमुखता से उठाया गया। पदाधिकारियों का कहना था कि वर्षों से कार्यरत अनेक कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा कैशलेस मेडिकल सुविधा को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग भी जोरदार तरीके से उठाई गई।
संघ ने कहा कि कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है। कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू होने से कर्मचारियों को आकस्मिक परिस्थितियों में आर्थिक कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
फेसियल अटेंडेंस में शिथिलता की मांग
बैठक में फेसियल अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हुई। पदाधिकारियों ने कहा कि तकनीकी कर्मचारियों का कार्यक्षेत्र अत्यंत व्यापक होता है और उन्हें कई बार उपकेंद्रों, फील्ड तथा दूरस्थ क्षेत्रों में कार्य करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में फेसियल अटेंडेंस की वर्तमान व्यवस्था कर्मचारियों के लिए व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर रही है।
संघ ने मांग की कि इस व्यवस्था में आवश्यक शिथिलता प्रदान की जाए ताकि फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और उनका ध्यान तकनीकी कार्यों पर केंद्रित रह सके।
साइकिल भत्ते के स्थान पर मोटरसाइकिल भत्ते की मांग
बैठक में एक महत्वपूर्ण मांग साइकिल भत्ते को समाप्त कर उसकी जगह मोटरसाइकिल भत्ता दिए जाने की भी उठाई गई। पदाधिकारियों का कहना था कि वर्तमान समय में अधिकांश तकनीकी कर्मचारी अपने कार्य निष्पादन के लिए मोटरसाइकिल का उपयोग करते हैं। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों और विद्युत उपकेंद्रों तक पहुंचने के लिए मोटरसाइकिल सबसे प्रभावी साधन है।
ऐसे में पुराने नियमों के तहत मिलने वाला साइकिल भत्ता वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। संगठन ने सरकार और विभागीय अधिकारियों से मोटरसाइकिल भत्ता लागू करने की मांग की है ताकि कर्मचारियों को वास्तविक खर्च के अनुरूप सहायता मिल सके।
शिफ्ट ड्यूटी कर्मचारियों के लिए नाइट अलाउंस की मांग
बैठक में शिफ्ट ड्यूटी में कार्यरत तकनीशियनों के लिए नाइट अलाउंस का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि बिजली व्यवस्था को चौबीसों घंटे सुचारु बनाए रखने के लिए तकनीकी कर्मचारी रात-दिन कार्य करते हैं।
रात्रि पाली में कार्य करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त चुनौतियों और जोखिमों का सामना करना पड़ता है। इसलिए उन्हें विशेष नाइट अलाउंस प्रदान किया जाना चाहिए। संगठन का मानना है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक उत्साह के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे।
प्रत्येक उपकेंद्र पर पर्याप्त स्टाफ की मांग
बैठक में विद्युत उपकेंद्रों पर कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। संघ ने मांग की कि प्रत्येक उपकेंद्र पर कम से कम चार एसएसओ (सब स्टेशन ऑपरेटर) तथा आवश्यक संख्या में हेल्पर नियुक्त किए जाएं।
पदाधिकारियों का कहना था कि वर्तमान में कई उपकेंद्रों पर कर्मचारियों की संख्या आवश्यकता से कम है, जिसके कारण कार्यभार बढ़ रहा है और दुर्घटनाओं की संभावना भी बनी रहती है। पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध होने से विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित तथा प्रभावी बनाया जा सकेगा।
आंदोलन की रणनीति पर बनी सहमति
बैठक के दौरान कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय स्तर पर प्रयासों की समीक्षा भी की गई। पदाधिकारियों ने कहा कि कई मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं और उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है।
इसी को देखते हुए बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि कर्मचारियों की मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा। इस प्रस्ताव का बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों और सदस्यों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। संगठन ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखा जाएगा।
बड़ी संख्या में पदाधिकारी रहे उपस्थित
बैठक में संघ के संरक्षक इं. अशोक कुमार बारी, इं. रामप्रताप, इं. राजकुमार, केंद्रीय महामंत्री अनिल कुमार राठौड़, केंद्रीय कोषाध्यक्ष जय प्रकाश यादव, सीपीएफ ट्रस्टी कलीम कुरैशी, वेद प्रकाश यादव, चंद्रपाल सिंह, अमित सहगल, इंदल चौधरी, सौरभ कुमार, चंद्रजीत यादव, संदीप यादव, शेख तौकीफ, राम सिंह, विजय कुमार, राजेश कुमार, शिवनारायण, महेश कुमार, सुनील कुमार यादव, सुनील प्रजापति, लोकश, चंदन कुमार, अशोक कुमार और संदीप कुमार सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में संगठन के नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और विभागीय प्रबंधन कर्मचारियों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि मांगों के समाधान में देरी होती है तो संगठन कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए आगे की रणनीति तय करेगा।
विद्युत तकनीकी कर्मचारी एकता संघ की इस बैठक को प्रदेश के तकनीकी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें न केवल कर्मचारियों की प्रमुख समस्याओं को मजबूती से उठाया गया बल्कि उनके समाधान के लिए संघर्ष की रूपरेखा भी तैयार की गई।

























