16 अक्टूबर 2026 7:31 अपराह्न

उद्यमी : एक विचार, तीन युवा और पुणे से निकली Inuxu और Adgebra की कहानी

जिसने भारतीय भाषाओं को डिजिटल विज्ञापन की नई ताकत से जोड़ा

Inuxu और Adgebra की उद्यमी यात्रा को दर्शाती फीचर इमेज, जिसमें तीन संस्थापक और उनकी टीम डिजिटल विज्ञापन तथा भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में काम करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

सुनने के लिए यहां क्लिक करें

The specified slider id does not exist.

टिक्कू आपचे की रिपोर्ट

भारत में बिजनेस की कहानियां केवल बड़े बिल्डर्स, चमचमाते आर्टिस्टों और करोड़ों अरबों डॉलर के निवेश से नहीं बनीं। कई बार एक बड़ी मछली की कहानी एक छोटे से विचार से शुरू होती है। कुछ लोग किसी समस्या को बाकी लोगों से थोड़ा पहले पहचानते हैं और फिर उसी समस्या का समाधान खोजते-खोजते एक नया रास्ता बनाते हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में ऐसी कहानियां और भी दिलचस्प बातें हैं, क्योंकि यहां आज के छोटे प्रयोग की बड़ी संभावना बन सकती है।

पुणे से शुरू हुई इनक्सू डिजिटल मीडिया टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड की कहानी भी ऐसी ही है। वर्ष 2013 में स्थापित इस कंपनी ने डिजिटल रूप से संचालित व्यवसायों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से अपनी यात्रा शुरू की। आगे इसी यात्रा से एडजेब्रा जैसे डिजिटल विज्ञापन मंच का विकास हुआ, जिसने भारतीय बाजार, भारतीय समुद्री और डिजिटल डिजिटल ग्राहकों को केंद्र में लाकर अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की।

तीन की तिकड़ी ने किया कमाल

इस कहानी के केंद्र में तीन नाम हैं- शशिकांत अनपत, रोहित बागड़ और त्रिशांत उगलमुगले । त्रिनेत्र ने जिस संगीतकार की यात्रा की शुरुआत की, वह आज चौदह वर्ष से अधिक समय की यात्रा में कई पर्यवेक्षण पार कर चुकी है। ये सिर्फ एक कंपनी के बढ़ने की कहानी नहीं है, बल्कि वो भारत की कहानी है जो धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे इंटरनेट के जरिए इंटरनेट बदल रही थी और शेयरहोल्डर को डिजिटल बिजनेस के लिए ले जा रही थी।

2013 में शुरू हुई थी यात्रा

जब साल 2013 में इनक्सू की शुरुआत हुई, तब भारत में टेक्नोलॉजी और इंटरनेट का विस्तार तेजी से हो रहा था, लेकिन डिजिटल बिजनेस की दुनिया आज उतनी विशाल नहीं रही। बड़े शहरों में इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ रहा था और धीरे-धीरे छोटे शहरों और सुपरमार्केट के लोग भी ऑनलाइन दुनिया में अपनी जगह बना रहे थे। ऐसे समय में डिजिटल विज्ञापन का भविष्य और उसके लिए तकनीक तैयार करना आसान काम नहीं था।

इनक्सू की स्थापना समान ही कमजोर दुनिया को ध्यान में रखकर की गई। कंपनी का पीछे का विचार था कि डिजिटल माध्यमों से बिजनेस करने वाले को ऐसी तकनीक उपलब्ध कराई जाए, जिसके माध्यम से वे अपने लक्ष्यों तक बेहतर ढंग से पहुंच सकें। इसके लिए विज्ञापन को केवल स्क्रीन पर दिखाई देने वाली तस्वीरें या संदेश तक सीमित रखने के बजाय उसे उपयोगकर्ता, उसकी पसंद, उसकी भाषा और उसके डिजिटल व्यवहार से जोड़ा गया।

रोहित बागड़, त्रिशांत उगलमुगले और शशिकांत अनपत ने अपनी-अपनी कंपनी और विशेषज्ञों के साथ इस यात्रा को आगे बढ़ाया। किसी भी उद्यम के लिए यह महत्वपूर्ण है कि संस्थापक केवल सपना न देखें, बल्कि उस सपने को जमीन पर उतारने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालें। Inuxu की कहानी में भी यही सामूहिक प्रयास दिखाई देता है।

Adgebra का क्या मतलब है और आम आदमी के लिए इसका मतलब क्या है?

किसी भी तकनीकी अध्ययन के लिए एडजेब्रा को समझने की आवश्यकता नहीं है। इसे एक उदाहरण से समझें। कोई भी कंपनी अपना उत्पाद बेचती है और देश भर में उसके बारे में जानकारी चाहती है, जिसमें वास्तव में उस उत्पाद की आवश्यकता हो सकती है। इसके लिए वह इंटरनेट पर विज्ञापन साइट्स है। लेकिन प्रश्न केवल इतना नहीं है कि विज्ञापन दिखाया जाए। असली सवाल यह है कि विज्ञापन किसे दिखाया जाए, किस तरह दिखाया जाए, किस भाषा में दिखाया जाए और किस तरह दिखाया जाए।

बेहतर डिजिटल विज्ञापन तकनीक काम करती है। एडजेब्रा विभिन्न डिजिटल माध्यमों और विज्ञापन प्रारूपों के माध्यम से उनके ऑनलाइन तक के नामांकन में मदद करता है। वेबसाइट, मोबाइल ऐप, वीडियो, डिस्प्ले विज्ञापन, नेटिवा विज्ञापन और अन्य डिजिटल फ़ॉर्मेट इस व्यवस्था का हिस्सा हो सकते हैं।

सरल शब्दों में कहा गया है तो इसका उद्देश्य है- सही ब्रांड को सही दर्शकों तक सही डिजिटल स्थान पर पहुंचाना।

आज यह बात सामान्य लग सकती है, लेकिन डिजिटल बिजनेस के शुरुआती दौर में यह एक बड़ी चुनौती थी। इंटरनेट पर लोगों की संख्या बढ़ रही थी, लेकिन हर उपयोगकर्ता एक जैसा नहीं था। उसकी अलग भाषा थी, रुचियां अलग थीं, जरूरतें अलग थीं और वह अलग-अलग तरह की वेबसाइटों और ऐप्स का इस्तेमाल करता था। इसलिए विज्ञापन को भी एक ही प्रकार के साथ छोड़ना आवश्यक था।

भारत को केवल एक बाज़ार समर्थित पर्याप्त सुविधा नहीं

भारत दुनिया के सबसे अलग देशों में से एक है। यहां चॉकलेट भाषा ही बाजार का रंग भी बदल जाती है। दिल्ली के ग्राहक जिस भाषा में सहज महसूस करते हैं, जरूरी नहीं कि महाराष्ट्र, बिहार, पंजाब, बंगाल, तमिलनाडु या असम के ग्राहकों के लिए भी यही सहज हो।

यही कारण है कि भारतीय डिजिटल बाजार में क्षेत्रीय सागर का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इंटरनेट का उपयोग केवल महानगरों तक सीमित नहीं हो रहा है। छोटी दुकानें और सुपरमार्केट में रहने वाला व्यक्ति भी समाचार पढ़ने, वीडियो देखने, खरीदारी करने, मछली पकड़ने और मनोरंजन के लिए इंटरनेट का उपयोग करने लगा।

इस बदलाव ने विज्ञापन की दुनिया के सामने भी एक नया सवाल खड़ा किया- क्या भारतीय उपभोक्ता अपनी भाषा में संवाद कर सकते हैं?

एडजेब्रा की सोच इसी प्रश्न के आसपास विकसित हुई। भारतीय नौसेना और क्षेत्रीय उद्यम को डिजिटल विज्ञापन केंद्र में लाने का प्रयास इस मंच को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका अर्थ केवल भाषांतर करना नहीं था। असली चुनौती यह थी कि विज्ञापन उस भाषा और उस बाज़ार के स्वभाव के अनुरूप दे, जहाँ उसे बेचा जाता है।

स्थानीय, भाषा स्थानीय ग्राहक और राष्ट्रीय बाजार

आज कोई भी छोटा व्यापारी अपने शहर से सुपरमार्केट में ग्राहक ढूंढ सकता है। कोई भी घरेलू उत्पाद बनाने वाला कट्टर सोशल मीडिया और वेबसाइट के जरिए दूसरे राज्यों तक पहुंच सकता है। कोई भी क्षेत्रीय खाद्य ब्रांड अपने शहर से राष्ट्रीय बाजार में जगह बना सकता है। कोई भी लघु शिक्षा संस्थान अपने जिले से बाहर के छात्रों तक पहुंच सकता है।

लेकिन ग्राहक तक पहुंच के लिए केवल अच्छा उत्पाद पर्याप्त नहीं होता। ग्राहक को उत्पाद के बारे में जानकारी भी चाहिए और उस जानकारी तक पहुंच का माध्यम भी। डिजिटल विज्ञापन की भूमिका सामने आती है।

यदि किसी छोटे शहर के ग्राहक को उसकी अपनी भाषा में कोई विज्ञापन दिखाई देता है, तो वह उसे अधिक स्वाभाविकता और सार्थकता के लिए संदेश भेज सकता है। भारतीय समुद्री मील में डिजिटल विज्ञापन का महत्व बढ़ा है।

फॉर्च्यून इंडिया के “सुपर 30” तक की जानकारी

वर्ष 2021 में इनक्सू की मुंबई यात्रा का एक महत्वपूर्ण अवलोकन रहा। फॉर्च्यून इंडिया के नवंबर 2021 अंक में इनक्सू डिजिटल मीडिया टेक्नोलॉजीज में “सुपर 30 कंपनियां 2021” शामिल हुई। इस कंपनी को राष्ट्रीय व्यापारी मंच पर एक व्यापक पहचान मिली।

यह पहचान इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि तब तक कंपनी डिजिटल विज्ञापन के क्षेत्र में अपनी एक अलग जगह बनाने की कोशिश कर चुकी थी। Adgebra के माध्यम से क्षेत्रीय भाषाओं, डिजिटल प्रकाशकों और ब्रांडों के बीच एक ऐसा नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा था, जिसमें विज्ञापनदाता अपने संभावित ग्राहकों तक पहुंच सकें और डिजिटल प्रकाशकों को भी विज्ञापन से आय प्राप्त हो सके।

किसी उभरती कंपनी के लिए ऐसी पहचान केवल सम्मान नहीं होती। वह बाजार में भरोसा बनाने का एक अवसर भी होती है। खासकर तब, जब कंपनी को बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के बीच अपनी जगह बनानी हो।

महामारी ने बदला बाजार, कंपनी ने बदली रणनीति

हर कारोबारी कहानी में ऐसे दौर आते हैं जब परिस्थितियां योजना के अनुसार नहीं चलतीं। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया। विज्ञापन उद्योग भी इससे अछूता नहीं रहा। अनेक कंपनियों ने अपने विज्ञापन बजट कम किए और कारोबार की प्राथमिकताएं बदल गईं।

लेकिन संकट के दौर में कुछ नए बाजार भी तेजी से उभरे। ऑनलाइन गेमिंग, स्वास्थ्य बीमा, डिजिटल वित्तीय सेवाओं और शेयर बाजार से जुड़े ऑनलाइन कारोबारों में लोगों की रुचि बढ़ी। घर से काम और घर से खरीदारी का चलन बढ़ा तो डिजिटल माध्यमों का महत्व भी बढ़ गया।

ऐसे समय में Inuxu ने भी बदलते बाजार के अनुरूप अपनी रणनीति को ढालने की कोशिश की। कंपनी ने नए क्षेत्रों में अवसर तलाशे और ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुसार अपने डिजिटल विज्ञापन समाधान को आगे बढ़ाया।

यहीं उद्यमिता का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामने आता है। कारोबार में हर परिस्थिति के लिए एक ही योजना काम नहीं करती। परिस्थितियां बदलती हैं तो कारोबारी सोच को भी बदलना पड़ता है। जो उद्यमी बाजार के बदलाव को समय रहते समझ लेता है, उसके लिए संकट के बीच भी नए रास्ते निकल सकते हैं।

Self-Service मॉडल से आसान हुआ विज्ञापन

डिजिटल विज्ञापन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव Self-Service मॉडल का भी रहा। इसका सरल अर्थ है कि ग्राहक को हर छोटी जरूरत के लिए किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर न रहना पड़े। वह स्वयं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जाकर अपनी जरूरत के अनुसार विज्ञापन अभियान तैयार कर सके, बजट तय कर सके और परिणाम देख सके।

Adgebra ने इस दिशा में भी काम किया। इससे छोटे और मध्यम कारोबारों के लिए डिजिटल विज्ञापन को अधिक सरल बनाने की संभावना पैदा हुई। एक छोटे कारोबारी के लिए यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसके पास बड़े कॉरपोरेट ब्रांड की तरह भारी विज्ञापन टीम या बड़ी एजेंसी का बजट हमेशा उपलब्ध नहीं होता।

डिजिटल तकनीक की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वह बड़े और छोटे कारोबार के बीच की दूरी कुछ हद तक कम कर सकती है। अगर सही तकनीक उपलब्ध हो तो एक छोटा कारोबारी भी अपने सीमित बजट के साथ अपने लक्षित ग्राहकों तक पहुंचने की कोशिश कर सकता है।

तीन संस्थापक, तीन जिम्मेदारियां और एक लक्ष्य

किसी भी कंपनी की सफलता को केवल उसके प्रमुख व्यक्ति के नाम से जोड़ना आसान होता है। लेकिन इनक्सू की कहानी तीन संस्थापकों के साझा प्रयास की कहानी है। रोहित बागड़, त्रिशांत उगलमुगले और शशिकांत अनपत ने अलग-अलग कर्मचारियों के साथ मिलकर कंपनी की नींव को मजबूत किया।

रोहित बागड़ ने नेतृत्व और उद्यमिता दिशा की जिम्मेदारी निभाई, त्रिशांत उगलमुगले ने ऑपरेशन से जुड़े पक्ष को आगे बढ़ाया और शशिकांत अनपत ने उत्पाद और विज्ञापन सूची से संबंधित कार्य में भूमिका निभाई।

किसी भी चित्र के लिए यह विभाजन महत्वपूर्ण होता है। एक व्यक्तिगत विचार दे सकता है, लेकिन उसे उत्पाद बनाने के लिए तकनीकी समझ होनी चाहिए। उत्पाद बन जाए तो उसे बाज़ार तक ले जाने के लिए बाज़ार रणनीति बनानी चाहिए। ग्राहक आ जाए तो संचालन, सेवा और प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए एक मजबूत व्यवस्था होनी चाहिए।

यानि बिज़नेस में सफलता किसी एक प्रतिभा से नहीं, बल्कि कई प्रतिभाओं के साथ एक साथ काम करने से मिलती है।

भारतीय बाजार के लिए भारतीय सोच

एडजेब्रा को एक स्वदेशी डिजिटल विज्ञापन मंच के रूप में विकसित करने की सोच के पीछे भारतीय बाजार की विविधता को समझने की कोशिश दिखाई देती है। भारत में विज्ञापन का अर्थ केवल एक राष्ट्रीय संदेश तैयार करना नहीं है। यहां भाषा क्षेत्र, संस्कृति, खान-पान, खरीदारी की आदत और उपभोक्ता व्यवहार तक बदल दिया जाता है।

एक ही उत्पाद का विज्ञापन अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरह से प्रस्तुत किया जा सकता है। यही भारत की चुनौती भी है और अवसर भी।

बड़ी इंटरनेशनल कंपनी के बीच किसी भी भारतीय कंपनी के लिए अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं है। लेकिन स्थानीय बाज़ार की गहरी समझ उसे अलग रास्ता दे सकती है। इनक्सू और एडजेब्रा ने इसी स्थानीय समझ को अपनी मशीन बनाने का प्रयास किया।

D2C बिजनेस ने खोला नया दरवाजा

पिछले कुछ वर्षों में भारत में D2C यानी डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर बिजनेस तेजी से बढ़ा है। इसका मतलब यह है कि कोई भी ब्रांड अपने उत्पाद को सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकता है, बीच में पारंपरिक वितरण व्यवस्था पूरी तरह से अपरिवर्तित है। इंटरनेट और डिजिटल पेमेंट ने इस बदलाव को और गति दी।

इस बिजनेस में नए मॉडल ने छोटी इंडस्ट्री के लिए भी मौका पैदा किया। अब किसी भी उत्पाद को बाजार में बेचने के लिए हर जगह दुकान खोलना जरूरी नहीं है। एक वेबसाइट, मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया और डिजिटल विज्ञापन के माध्यम से ग्राहक तक पहुंचने की कोशिश की जा सकती है।

लेकिन यहां भी यही प्रश्न वापस आता है—ग्राहक तक कलाकार कैसे?

यही वह जगह है जहां डिजिटल विज्ञापन मंचों की भूमिका अहम है। एडजेब्रा ने भारतीय डी2सी व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपनी सेवाओं और समाधानों को भी आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।

पुरस्कारों ने साहस बढ़ाया

इनक्सू और एडजेब्रा की यात्रा में समय-समय पर मिले विभिन्न पुरस्कारों से कंपनी की पहचान मजबूत हुई। फैक्ट्री और उद्योग जगत से जुड़ी कई सम्मानों वाली कंपनी का नाम सामने आया। इनमें एडटेक क्षेत्र से जुड़े सम्मान, ट्रेलर और व्यावसायिक उत्कृष्टता से जुड़े पुरस्कार और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान शामिल है।

दुबई में आयोजित इंडियन अचीवर्स फोरम के 36 वें अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में को गोल्डन पिनेकल अवार्ड 2023 से सम्मानित किया गया। इसके बाद 15 फरवरी 2024 को नई दिल्ली इंडिया हैबिटेट सेंटर में एआईबीसीएफ के राष्ट्रीय सम्मेलन में बिजनेस एक्सीलेंस अवार्ड का आयोजन किया गया जिसमें कंपनी से संबंधित प्रतिष्ठित जानकारी शामिल है।

पुरस्कार किसी भी व्यवसाय की अंतिम मंजिल नहीं होती। वे उस यात्रा के निरीक्षण करते हैं, जो यह संकेत देते हैं कि कंपनी ने अपने क्षेत्र में कुछ ऐसा किया है, जिस उद्योग या उद्यम ने पहचान दी है। असली चुनौती इसके बाद शुरू होती है—उसे पहचानना, बनाए रखना और आगे बढ़ाना।

चौदह वर्ष बाद भी यात्रा जारी

2013 से 2026 तक का सफर किसी भी नई कंपनी के लिए महत्वपूर्ण है। इन वर्षों में डिजिटल दुनिया पूरी तरह से बदल चुकी है। पहले कंप्यूटर इंटरनेट इंटरनेट वाला उपयोगकर्ता अब मोबाइल फोन पर हर समय ऑनलाइन रहता है। वीडियो ने विज्ञापन की दुनिया बदल दी है। सोशल मीडिया ने ग्राहक और ब्रांड के बीच की दूरी कम कर दी है। और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डिजिटल बिजनेस की अगली बड़ी दिशा बन रही है।

ऐसे समय में किसी भी कंपनी के लिए लगातार अपने उत्पाद और रणनीति में बदलाव जरूरी है। इनक्सू भी अब कृत्रिम उत्कृष्टता और मशीन लर्निंग जैसे तकनीकों का उपयोग एडटेक क्षेत्र में नए समाधान विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात करता है।

इसका मतलब साफ है—यह कहानी केवल अतीत की आपूर्ति की कहानी नहीं है। कंपनी के सामने आने वाले वर्षों के नए टेक्निकल टीचर भी हैं और नए अवसर भी।

यह कहानी आम आदमी के लिए क्या है?

किसी प्रोटोटाइप की कहानी उतनी ही सरल है, जब वह अन्य लोगों को भी कुछ देखने के लिए मजबूर करती है। इनक्सू और एडजेब्रा की यात्रा में आम पाठकों के लिए और भी बहुत कुछ सीखें।

सबसे पहली सीख यह है कि समस्या को पहचानना आपके लिए एक अवसर हो सकता है। जब भी किसी क्षेत्र में कोई कमी दिखे तो यह जरूरी नहीं कि उसे बचाया जाए। कई बार इसी तरह नया बिजनेस खड़ा करने का आधार बन सकता है।

दूसरी बात यह है कि स्थानीय बाजार को छोटा नहीं करना चाहिए। भारत में स्थानीय भाषा और स्थानीय शास्त्रीय का बाजार बहुत बड़ा है। जो कलाकार इस विविधता में भिन्न है, वह अपने लिए अलग-अलग अवसर की खोज कर सकता है।

तीसरी सीख यह है कि कौन सी तकनीक तब उपयोगी होती है जब वह किसी वास्तविक समस्या का समाधान करे। केवल तकनीकी शब्दों से व्यवसाय नहीं बनता। ग्राहक की ज़रूरत के सामान और उसके लिए सरल समाधान तैयार करना सबसे महत्वपूर्ण है।

चौथी सीख यह है कि संकट में समय रुकना ही एकमात्र विकल्प नहीं है। बाज़ी हज़ार हैं तो मुख्यधारा मार्ग भी दिखते हैं। महामारी के दौरान डिजिटल कारोबार को बढ़ावा मिला और कई कंपनियों ने एक ही बदलाव में नए अवसर तलाशे।

और पांचवीं सीख शायद सबसे महत्वपूर्ण है—एक अच्छी टीम की ताकत। शशिकांत अनपत, रोहित बागड़ और त्रिशांत उगलमुगले की भागीदारी से यह पता चलता है कि अलग-अलग स्वामित्व वाले लोग जब एक साझा उद्देश्य के साथ आते हैं तो एक विचार को व्यवसाय में बदला जा सकता है।

पुणे से ओके स्टोरी, भारत तक पहुंच संदेश

Inuxu और Adgebra की कहानी को केवल एक डिजिटल विज्ञापन कंपनी की कहानी माना जा सकता है, जिसका पूरा अर्थ नहीं लगाया जाएगा। यह कहानी भारत के बदलाव की कहानी भी है, जहां अब केवल महानगरों की सुविधा ही इंटरनेट नहीं रह गई है।

आज छोटे शहरों का युवा भी ऑनलाइन बिजनेस कर रहा है। स्थानीय भाषा में समाचार पढ़ रहे हैं। वीडियो देख रहा हूँ। ऑनलाइन खरीदारी की जा रही है। डिजिटल भुगतान किया जा रहा है। अपने प्रोडक्ट को सोशल मीडिया पर बेच रहा है। ऐसे में भारत के डिजिटल बाजार के बारे में सिर्फ महानगरों की भाषा और सोच को लेकर समझदारी नहीं हो सकती है।

संभावित क्षेत्रीय झीलों और स्थानीय औद्योगिक की भूमिका बहुसंख्यक है। विज्ञापन भी उसी के साथ बदलता रहता है।

Adgebra के समान बदलाव के बीच अपनी जगह बनाने की कोशिश की जा रही है। आईएस ट्रैवल बताता है कि डिजिटल भारत केवल बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी का बाजार नहीं है। यहां भारतीय उद्यमियों के लिए भी बहुत बड़ा मौका मौजूद है, व्यापारी अपनी जमीन पर, अपने ग्राहक और तकनीकी तकनीक को स्वीकार करते हैं।

तीन नाम, एक यात्रा और स्थिर निर्मित माइलस्टोन

शशिकांत अनपत, रोहित बागड़ और त्रिशांत उगलमुगले की कहानी को एक वाक्य में शामिल किया गया था तो इसमें केवल इतना ही कहा गया था कि सत्य नहीं होगा कि तीन विद्यार्थियों ने मिलकर एक कंपनी शुरू की। असल कहानी यह है कि उन्होंने भारत की एक जरूरत पर आपत्ति जताई और उसे बिजनेस का आधार बनाने की कोशिश की।

2013 में शुरू हुई फॉर्च्यून इंडिया की 2021 की सुपर 30 कंपनी की सूची तक यात्रा। इसके बाद राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न सम्मानों से यात्रा में नए पर्यवेक्षण जोड़े गए। एडजेब्रा ने भारतीय समुद्र तट, स्थानीय द्वीप, डिजिटल प्रकाशकों और बस्तियों के बीच अपनी भूमिका को लगातार विस्तार की कोशिश की।

आज जब डिजिटल विज्ञापन की दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वीडियो, मोबाइल और डेटा आधारित तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रही है, तब इस यात्रा की अगली मंजिल भी नई होगी। बिज़नेस की दुनिया में कोई भी सफलता निश्चित नहीं है। हर उपलब्धि के बाद नई चुनौती सामने खड़ी होती है।

शायद यही एंटरप्राइजिता की सबसे खूबसूरत बात है। मंजिल मंजिल ही यात्रा समाप्त नहीं हुई, बल्कि अगली मंजिल दिखाई देती है।

से शुरू हुई इनक्सू की यही कहानी निरंतर यात्रा का उदाहरण है- एक विचार से शुरुआत, तीन बच्चों की साझेदारी, शेयर बाजार की समझ, भारतीय दावे पर भरोसा और प्रौद्योगिकी के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ने का पुणे का प्रयास।

और शायद यही कारण है कि शशिकांत अनपत, रोहित बागड़ और त्रिशांत उगलमुगले की यह टिकरी पिछले तेरह वर्षों से लगातार नए माइलस्टोन की ओर से दिखाई देती है।

यही है हमारे “उद्यमी” कॉलम की पहली कहानी—क्योंकि भारत की अगली बड़ी टैक्सी कहानी बड़े किसी महानगर के प्लाजा ऑफिस से ही निकलेगी, यह जरूरी नहीं है। वह किसी छोटे शहर के युवाओं के विचार भी जन्म से ले सकता है, जो आज किसी भी समस्या को देख सकता है और उसका समाधान दुनिया के सामने रख सकता है।

क्योंकि बिजनेस सिर्फ पैसे का नाम नहीं। व्यवसाय किसी भी समस्या को अवसर में परिवर्तन की कला भी है। और प्रोटोटाइप वही है, जो आने वाले कल की जरूरत है उसे आज पहचान ले।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Read More

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें