16 अक्टूबर 2026 7:31 अपराह्न

कालूपुर पाही में विद्यालय मार्ग बदहाल, गड्ढों और कीचड़ के बीच स्कूल पहुंच रहे बच्चे

कालूपुर पाही में दो विद्यालयों को जोड़ने वाला गड्ढों और कीचड़ से भरा मार्ग, विद्यालय भवन और रिपोर्टर सूरज सिंह राणा

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सूरज सिंह राणा की रिपोर्ट

दो विद्यालयों को जोड़ने वाला रास्ता बना परेशानी का सबब

चित्रकूट के सदर ब्लॉक कर्वी अंतर्गत ग्राम पंचायत कालूपुर पाही में दो विद्यालयों को जोड़ने वाला मार्ग इन दिनों ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है। सड़क पर जगह-जगह बने गड्ढे, जमा कीचड़ और खराब रास्ते के कारण विद्यालय तक पहुंचना आसान नहीं रह गया है। बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी उन बच्चों को उठानी पड़ती है, जिन्हें रोज इसी रास्ते से होकर विद्यालय जाना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय तक पहुंचने वाला यह मार्ग लंबे समय से बदहाल स्थिति में है। सड़क की मरम्मत और रास्ते को सुगम बनाने की मांग कई बार उठाई जा चुकी है। ग्रामीणों के मुताबिक संबंधित अधिकारियों को भी समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक ऐसा कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया, जिससे बरसात के दिनों में बच्चों और ग्रामीणों को राहत मिल सके।

गड्ढों और कीचड़ से होकर स्कूल पहुंचने की मजबूरी

कालूपुर पाही के इस मार्ग की सबसे बड़ी समस्या सड़क पर बने गड्ढे और बारिश के बाद जमा होने वाला कीचड़ है। सामान्य दिनों में जहां ग्रामीण किसी तरह रास्ता पार कर लेते हैं, वहीं बारिश होते ही सड़क की स्थिति काफी कठिन हो जाती है। पानी और कीचड़ के बीच गड्ढों का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। विद्यालय जाने वाले बच्चों के लिए यह रास्ता रोज की चुनौती बन जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार कई बार बच्चों को जूते-चप्पल हाथ में लेकर कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। छोटे बच्चों के लिए स्थिति और भी कठिन हो जाती है। रास्ते में फिसलन होने के कारण उनके गिरने और चोटिल होने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा कपड़ों पर कीचड़ लग जाने से विद्यालय पहुंचने के बाद भी बच्चों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।

बारिश में बढ़ जाती है रास्ते की मुश्किल

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में कालूपुर पाही के विद्यालय मार्ग की स्थिति सबसे ज्यादा खराब हो जाती है। सड़क के गड्ढों में पानी भर जाने और आसपास की मिट्टी के गीली होने से पूरा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। जहां सड़क की सतह पहले से खराब है, वहां बारिश के बाद आवागमन और कठिन हो जाता है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क की स्थिति ऐसी होने पर दोपहिया वाहन चालकों को भी सावधानी से निकलना पड़ता है। पैदल चलने वाले बच्चों और बुजुर्गों के लिए समस्या और बढ़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है।

शिकायतों के बाद भी स्थायी समाधान का इंतजार

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की समस्या को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है। लोगों ने अपने स्तर से संबंधित जिम्मेदारों तक समस्या पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन अभी तक मार्ग की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल शिकायत दर्ज होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मौके पर निरीक्षण कर समस्या की वास्तविक स्थिति समझना और उसके स्थायी समाधान के लिए कार्य कराना जरूरी है।

स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब विद्यालय तक पहुंचने वाला रास्ता ही सुरक्षित नहीं है तो बच्चों की शिक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को किस तरह सुचारु माना जा सकता है। उनका कहना है कि विद्यालय भवन, शिक्षण व्यवस्था और अन्य सुविधाओं के साथ-साथ बच्चों के विद्यालय तक पहुंचने के रास्ते पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि ग्राम प्रधान, विधायक और जिला पंचायत सदस्य स्तर पर इस समस्या को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय से जुड़ा मार्ग किसी एक परिवार या मोहल्ले की निजी जरूरत नहीं है, बल्कि यह बच्चों और ग्रामीणों के रोजमर्रा के आवागमन से जुड़ा सार्वजनिक रास्ता है। इसलिए इसकी स्थिति सुधारना स्थानीय प्राथमिकता में शामिल होना चाहिए।

ग्रामीणों के मुताबिक यदि जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण करें तो समस्या का समाधान निकालना मुश्किल नहीं होना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि बरसात में रास्ते की वास्तविक स्थिति को देखा जाए और केवल अस्थायी मिट्टी डालने या खानापूर्ति के बजाय टिकाऊ सड़क निर्माण अथवा मरम्मत की दिशा में कदम उठाया जाए।

शिक्षा के दावों के बीच रास्ते की हकीकत

सरकार और प्रशासन की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने, विद्यालयों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने और स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जाता है। लेकिन कालूपुर पाही की स्थिति एक अलग सवाल खड़ा करती है। यदि विद्यालय तक जाने वाला रास्ता बारिश में गड्ढों और कीचड़ से भर जाए, तो शिक्षा तक पहुंच की इस बुनियादी जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

शिक्षा केवल विद्यालय की चारदीवारी के भीतर उपलब्ध होने वाली सुविधा नहीं है। बच्चे सुरक्षित रूप से विद्यालय तक पहुंचें, नियमित रूप से कक्षा में उपस्थित हों और बिना अनावश्यक परेशानी के घर लौट सकें—यह पूरी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में विद्यालय मार्ग की खराब स्थिति को महज सड़क की समस्या मानकर छोड़ देना ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था के व्यापक संदर्भ को नजरअंदाज करना होगा।

ग्रामीणों की मांग—स्थायी समाधान हो, खानापूर्ति नहीं

कालूपुर पाही के ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर विद्यालय मार्ग का निरीक्षण करें और उसकी वास्तविक स्थिति का आकलन करें। इसके बाद सड़क की मरम्मत या निर्माण के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। ग्रामीण चाहते हैं कि ऐसा समाधान किया जाए जिससे बरसात के मौसम में भी बच्चों और आम लोगों को आवागमन में परेशानी न हो।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क की समस्या का समाधान स्थायी रूप से कर दिया जाए तो इसका सीधा लाभ विद्यालय जाने वाले बच्चों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीणों को भी मिलेगा। किसानों, बुजुर्गों, महिलाओं और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों के लिए भी आवागमन आसान हो सकेगा।

अब निगाह जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधियों पर

कालूपुर पाही में विद्यालय मार्ग की बदहाली फिलहाल स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा की समस्या बनी हुई है। गड्ढों और कीचड़ से होकर विद्यालय जाने वाले बच्चों की स्थिति ग्रामीण विकास की उस बुनियादी चुनौती की ओर ध्यान खींचती है, जहां सड़क जैसी मूलभूत सुविधा सीधे शिक्षा से जुड़ जाती है। ग्रामीणों की शिकायतों और मांगों के बीच अब देखना यह है कि संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासनिक स्तर पर मौके का निरीक्षण कर समस्या की वास्तविकता समझी जाएगी और विद्यालय तक पहुंचने वाले मार्ग को जल्द सुरक्षित एवं सुगम बनाने की दिशा में ठोस कार्रवाई होगी। फिलहाल बच्चों को कीचड़ और गड्ढों के बीच विद्यालय पहुंचने की मजबूरी यह सवाल जरूर छोड़ रही है कि गांव में शिक्षा की राह केवल विद्यालय के दरवाजे तक पहुंचने से पूरी होती है या उस रास्ते को सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी भी व्यवस्था की ही है?

ग्राउंड रिपोर्ट का सार

सदर ब्लॉक कर्वी की ग्राम पंचायत कालूपुर पाही में दो विद्यालयों को जोड़ने वाला बदहाल मार्ग स्थानीय समस्या से आगे बढ़कर बच्चों की सुरक्षित आवाजाही और शिक्षा तक उनकी सहज पहुंच का सवाल बन गया है। ग्रामीणों के अनुसार कई शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ है। अब जरूरत मौके के निरीक्षण, जिम्मेदारी तय करने और बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए टिकाऊ सड़क व्यवस्था विकसित करने की है।

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