हरियाणा में गौतस्करी का नेटवर्क : इस महीने अब तक कहाँ-कहाँ हुई गिरफ्तारियाँ और आखिर गायों की सप्लाई चेन क्या है?
जोगिंदर सिंह उर्फ कालू छारा की विशेष शोधपरक रिपोर्ट
हरियाणा पिछले कई वर्षों से गौतस्करी, गोवंश परिवहन और उससे जुड़े विवादों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। राज्य की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और पंजाब के बीच एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट कॉरिडोर का काम करता है। यही कारण है कि जब भी गौतस्करी के मामलों की चर्चा होती है, हरियाणा का नाम प्रमुखता से सामने आता है।
जून 2026 के पहले पखवाड़े में ही हरियाणा पुलिस और विशेष गौ संरक्षण इकाइयों ने कई जिलों में कार्रवाई कर कथित गौतस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सबसे अधिक कार्रवाई नूंह (मेवात) क्षेत्र में देखने को मिली है, जबकि कुछ मामलों के तार गुरुग्राम, पलवल और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से भी जुड़े पाए गए हैं।
इस महीने अब तक कहाँ-कहाँ हुई कार्रवाई?
1. नूंह जिला सबसे अधिक चर्चा में
हाल के दिनों में नूंह पुलिस ने एक कथित गौतस्कर को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार वाहन को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन आरोपियों ने बैरिकेड तोड़कर भागने की कोशिश की। बाद में पीछा कर वाहन को रोका गया और गोवंश को मुक्त कराया गया।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर भी एक अन्य कार्रवाई में कथित गौतस्कर घायल हुआ और कई पशुओं को बरामद किया गया। यह घटना इस बात का संकेत देती है कि एक्सप्रेसवे अब तस्करी मार्गों में शामिल हो चुका है।
2. गुरुग्राम-नूंह बेल्ट
पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि गुरुग्राम और नूंह के बीच का क्षेत्र लंबे समय से निगरानी में है। पूर्व की कई कार्रवाइयों में दर्जनों पशुओं को छुड़ाया गया और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
3. पलवल क्षेत्र
पलवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सटा होने के कारण एक महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। पूर्व में यहां गौतस्करी के संदेह को लेकर कई चर्चित मामले सामने आ चुके हैं और पुलिस लगातार निगरानी बनाए हुए है।
4. पानीपत-कुरुक्षेत्र लिंक
अप्रैल 2026 में पश्चिमी यमुना नहर से जुड़े मामले में पुलिस ने पानीपत, कुरुक्षेत्र और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार यह नेटवर्क अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय था। (
सबसे बड़ा सवाल: गायें आती कहाँ से हैं?
गौतस्करी के मामलों की जांच रिपोर्टों से सामान्यतः तीन स्रोत सामने आते हैं:
पहला स्रोत : ग्रामीण पशु बाजार
कई मामलों में पशुओं को ग्रामीण इलाकों से खरीदने या चोरी करने के आरोप सामने आते हैं। पशुओं को पहले छोटे वाहनों में एकत्र किया जाता है और बाद में बड़े वाहनों में स्थानांतरित किया जाता है।
दूसरा स्रोत : पड़ोसी राज्य
हरियाणा की सीमाएं उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली से लगती हैं। इसलिए कई बार पशुओं की आवाजाही अंतर-राज्यीय नेटवर्क के माध्यम से होती है। पुलिस जांच में उत्तर प्रदेश और राजस्थान से जुड़े नाम सामने आते रहे हैं।
तीसरा स्रोत : आवारा और परित्यक्त गोवंश
ग्रामीण क्षेत्रों में छोड़े गए गोवंश को भी अपराधी गिरोहों द्वारा निशाना बनाए जाने के आरोप लगते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसी शिकायतें अक्सर पुलिस रिकॉर्ड तक पहुंचती हैं।
आखिर हरियाणा होकर कहाँ जाते हैं पशु?
यह प्रश्न सबसे अधिक पूछा जाता है। उपलब्ध पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तीन प्रमुख संभावनाएँ सामने आती हैं:
1. हरियाणा केवल ट्रांजिट रूट
कई मामलों में वाहन हरियाणा से गुजरते हुए पकड़े गए हैं। इसका अर्थ है कि पशु किसी अन्य राज्य से लाकर दूसरे राज्य में ले जाए जा रहे थे। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों की भूमिका इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
2. स्थानीय अवैध सप्लाई नेटवर्क
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि सभी मामले केवल ट्रांजिट के नहीं होते। कुछ मामलों में स्थानीय स्तर पर भी अवैध खरीद-बिक्री और परिवहन के आरोप सामने आते हैं। हालांकि प्रत्येक मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही तय होता है।
3. अंतर-राज्यीय तस्करी श्रृंखला
नूंह, पलवल, भरतपुर (राजस्थान), मथुरा (उत्तर प्रदेश) और दिल्ली से जुड़े मार्गों का उल्लेख कई मामलों में हुआ है। कुछ रिपोर्टों में गोवंश को हरियाणा से बाहर ले जाने की कोशिश का भी जिक्र मिलता है।
नूंह (मेवात) बार-बार क्यों आता है चर्चा में?
नूंह की भौगोलिक स्थिति इसे राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के बीच जोड़ती है। अरावली क्षेत्र, ग्रामीण सड़कें और बहु-राज्यीय संपर्क इसे पुलिस निगरानी का प्रमुख क्षेत्र बनाते हैं।
पुलिस रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि हालिया महीनों में नूंह में सबसे अधिक कार्रवाई हुई है। यही कारण है कि राज्य की विशेष टीमें इस जिले पर विशेष फोकस रखती हैं।
पुलिस के सामने प्रमुख चुनौतियाँ
सीमावर्ती क्षेत्र
जब अपराधी कुछ ही मिनटों में राज्य सीमा पार कर सकते हों तो कार्रवाई जटिल हो जाती है।
हाई-स्पीड रोड नेटवर्क
एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों ने परिवहन को आसान बनाया है। यही सुविधा अपराधी नेटवर्क भी इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं।
फर्जी दस्तावेज
जांच एजेंसियों के अनुसार कई मामलों में पशु परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की सत्यता जांचना चुनौतीपूर्ण होता है।
संगठित नेटवर्क
एक ही जिले तक सीमित न रहकर कई राज्यों में फैले नेटवर्क पुलिस के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा करते हैं।
क्या हरियाणा में मांग भी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि गौतस्करी के सभी मामलों को केवल “बाहर भेजने” या केवल “स्थानीय सप्लाई” के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। विभिन्न मामलों में अलग-अलग उद्देश्य सामने आते हैं। कुछ मामलों में राज्य ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में दिखाई देता है, जबकि कुछ मामलों में स्थानीय अवैध नेटवर्क की भूमिका भी जांच के दायरे में आती है।
इसलिए यह कहना कि पूरा नेटवर्क केवल हरियाणा से बाहर जाने के लिए है या केवल हरियाणा के भीतर सप्लाई के लिए है, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। वास्तविकता दोनों स्थितियों का मिश्रण प्रतीत होती है।
प्रशासन की रणनीति
हरियाणा पुलिस ने हाल के वर्षों में विशेष टीमें, नाकेबंदी, ड्रोन निगरानी और अंतर-जिला समन्वय बढ़ाया है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, नूंह-पलवल क्षेत्र और सीमावर्ती जिलों पर विशेष फोकस रखा जा रहा है।
जून 2026 के पहले पखवाड़े तक उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर नूंह, गुरुग्राम-पलवल बेल्ट और प्रमुख राजमार्ग क्षेत्र गौतस्करी विरोधी कार्रवाइयों के केंद्र बने हुए हैं। हालिया गिरफ्तारियाँ बताती हैं कि पुलिस दबाव लगातार बढ़ा रही है। दूसरी ओर, यह भी स्पष्ट है कि हरियाणा केवल एक राज्य नहीं बल्कि उत्तर भारत के कई राज्यों को जोड़ने वाला रणनीतिक मार्ग है। इसी कारण गौतस्करी से जुड़े नेटवर्क में इसकी भूमिका कभी ट्रांजिट कॉरिडोर, कभी स्रोत क्षेत्र और कभी संभावित सप्लाई क्षेत्र के रूप में सामने आती है।
आने वाले समय में तकनीकी निगरानी, अंतर-राज्यीय समन्वय और पशुधन पहचान प्रणाली मजबूत होने पर ऐसे नेटवर्क पर और प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। फिलहाल पुलिस की ताजा कार्रवाइयाँ यह संकेत देती हैं कि राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ इस चुनौती को प्राथमिकता के साथ देख रही हैं।







