रिपोर्ट: चुन्नीलाल प्रधान
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक मामूली बात ने ऐसा तूल पकड़ा कि शराब पार्टी के दौरान शुरू हुई कहासुनी हिंसक संघर्ष में बदल गई। दिल्ली-देहरादून हाईवे के पास सुशांत सिटी कॉलोनी में बीड़ी जलाने को लेकर स्थानीय युवकों और पूर्वोत्तर भारत के छात्रों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच मारपीट शुरू हो गई। आरोप है कि इस दौरान बीयर और शराब की बोतलें एक-दूसरे पर फेंकी गईं और ईंट-पत्थरों से भी हमला किया गया। इस घटना में छह छात्र घायल हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों का मेडिकल परीक्षण कराया गया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर चार युवकों को हिरासत में लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
घटना ने कॉलोनी में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में अरुणाचल प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक रोबिन हिबू की ओर से उच्च पुलिस अधिकारियों से शिकायत किए जाने के बाद पुलिस की सक्रियता बढ़ने की बात सामने आई है। घटना के बाद पुलिस ने संबंधित क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देना शुरू कर दिया है।
आधी रात को पार्टी के दौरान बिगड़ा माहौल
मामला मेरठ के परतापुर थाना क्षेत्र की सुशांत सिटी कॉलोनी के सेक्टर-तीन स्थित एफ-ब्लॉक का बताया जा रहा है। यहां अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और अन्य राज्यों के लगभग 80 छात्र रहते हैं। ये छात्र राष्ट्रीय राजमार्ग-58 बाईपास के पास स्थित एक विश्वविद्यालय में पढ़ाई करते हैं।
जानकारी के मुताबिक, शनिवार देर रात करीब साढ़े बारह बजे कॉलोनी में अलग-अलग समूहों में पार्टी चल रही थी। इसी दौरान कुछ स्थानीय युवकों और पूर्वोत्तर राज्यों से आए छात्रों के बीच किसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। शुरुआत में मामला मामूली कहासुनी तक सीमित था, लेकिन कुछ ही देर में दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया।
बताया गया है कि पार्टी के दौरान दिल्ली निवासी शादांश, मुजफ्फरनगर निवासी अवीश और गौरव सहित कुछ स्थानीय युवक मौजूद थे। इसी बीच गौरव ने सिक्किम के छात्र संजू तबंग से सिगरेट मांगी। संजू ने सिगरेट उपलब्ध नहीं होने की बात कहते हुए उसे बीड़ी दे दी। इसके बाद बीड़ी को लाइटर से जलाने को कहा गया।
आरोप है कि बीड़ी जलाने से इनकार किए जाने के बाद दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद में दूसरे युवक भी शामिल हो गए। जो बात सामान्य बातचीत से सुलझ सकती थी, उसने कुछ ही समय में गंभीर रूप ले लिया।
बोतलें फेंकी गईं, ईंट-पत्थरों से भी हमला
विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए। आरोप है कि कहासुनी के बाद मारपीट शुरू हुई और एक-दूसरे पर बीयर तथा शराब की बोतलें फेंकी जाने लगीं। इसके बाद ईंट-पत्थर चलने की भी बात सामने आई। अचानक हुए इस संघर्ष से कॉलोनी में अफरा-तफरी मच गई।
रात के समय हुई इस घटना ने वहां रहने वाले लोगों को परेशान कर दिया। पार्टी के दौरान शुरू हुआ विवाद किस तरह हिंसक रूप ले सकता है, यह घटना उसका उदाहरण बन गई। मामूली बात पर शुरू हुई तकरार में छह छात्रों के घायल होने की सूचना है।
हालांकि, घटना में शामिल सभी लोगों की भूमिका और संघर्ष की पूरी परिस्थितियों का निर्धारण पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर उठे सवाल
इस मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, घटना शनिवार देर रात की बताई जा रही है। आरोप है कि पुलिस को घटना की जानकारी मिलने के बावजूद शुरुआत में मामले को गंभीरता से सामने नहीं लाया गया।
मामला उस समय अधिक चर्चा में आया, जब अरुणाचल प्रदेश के पूर्व डीजीपी रोबिन हिबू ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर घटना की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए।
हालांकि, पुलिस ने जानबूझकर मामला दबाने की कोशिश की थी या शुरुआती स्तर पर कार्रवाई में कोई चूक हुई, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। ऐसे में इस पहलू की जांच भी महत्वपूर्ण है। यदि सूचना मिलने के बाद कार्रवाई में देरी हुई है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि इसके लिए कौन जिम्मेदार था और समय रहते आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए गए।
पूर्व डीजीपी की शिकायत के बाद बढ़ी सक्रियता
अरुणाचल प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक रोबिन हिबू ने इस घटना को लेकर पुलिस महानिदेशक और मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की। बताया गया है कि वह दिल्ली पुलिस में विशेष आयुक्त के पद पर भी तैनात रह चुके हैं।
उनकी शिकायत के बाद मामले की जांच और कार्रवाई तेज होने की जानकारी सामने आई है। इस घटनाक्रम ने पूर्वोत्तर राज्यों से पढ़ाई करने के लिए दूसरे शहरों में आने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा का प्रश्न भी सामने ला दिया है।
देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं। ऐसे में उनके लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना संबंधित प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है। किसी भी विवाद में कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन छात्रों की सुरक्षा और उनके साथ निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
इस मामले में भी आवश्यक है कि पुलिस घटना में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की निष्पक्ष जांच करे। यदि किसी ने हमला किया है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, किसी भी पक्ष के निर्दोष लोगों को केवल उनके क्षेत्र या राज्य की पहचान के आधार पर परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
चार युवक हिरासत में, अन्य आरोपियों की तलाश
मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीबीजीटीएस मूर्ति के अनुसार, मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। परतापुर थाना पुलिस ने शादांश, वंश, अवीश और अटल नाम के चार युवकों को हिरासत में लिया है। घटना में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस की ओर से की जा रही जांच में घटना की परिस्थितियों, मारपीट में शामिल लोगों और उनकी भूमिका का पता लगाया जाना है।
घायल छात्रों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है। घटना के बाद कॉलोनी में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस तैनात किए जाने की भी जानकारी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर पुलिस आगे क्या कार्रवाई करती है।
मामूली विवाद से हिंसा तक पहुंचने की घटना ने उठाए सवाल
बीड़ी जलाने जैसी छोटी-सी बात पर शुरू हुआ विवाद छह छात्रों के घायल होने तक पहुंच गया। यह घटना बताती है कि गुस्से और आपसी तकरार पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया जाए, तो स्थिति कितनी तेजी से बिगड़ सकती है। शराब पार्टी के दौरान विवाद की सूचना सामने आने से यह सवाल भी उठता है कि वहां मौजूद लोगों ने मामले को शांत कराने के बजाय उसे बढ़ने से रोकने की कोशिश क्यों नहीं की।
फिलहाल घटना के सभी पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस के सामने एक ओर आरोपियों की पहचान और उनकी भूमिका स्पष्ट करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर कॉलोनी में रहने वाले छात्रों के बीच सुरक्षा का भरोसा कायम करने की जिम्मेदारी भी है।
अब निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं। यह जरूरी है कि कार्रवाई केवल हिरासत तक सीमित न रहे, बल्कि घटना की पूरी सच्चाई सामने आए। यदि किसी ने कानून हाथ में लिया है, तो उसके खिलाफ निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई हो। साथ ही, पुलिस की शुरुआती भूमिका पर उठे सवालों का भी तथ्यों के आधार पर जवाब मिलना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी मामूली विवाद को हिंसक संघर्ष में बदलने से रोका जा सके।













