करोड़ों की योजना, बूंद-बूंद को तरसे लोग! रामनगर में ‘नमामि गंगे’ की जलापूर्ति व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

चित्रकूट के रामनगर में पेयजल संकट पर आधारित फीचर इमेज, जिसमें टूटी पाइपलाइन, जल संकट के दृश्य और रिपोर्टर संजय सिंह राणा का चित्र दर्शाया गया है।

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✍️ संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

चित्रकूट जनपद के रामनगर विकासखंड मुख्यालय स्थित रामनगर गांव में नमामि गंगे योजना के तहत संचालित पेयजल व्यवस्था ग्रामीणों के लिए राहत की बजाय नई परेशानी का कारण बनती जा रही है। करोड़ों रुपये की लागत से संचालित योजनाओं और सरकारी दावों के बावजूद यहां के लोगों को आज भी पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि आधुनिक जलापूर्ति प्रणाली के होते हुए भी ग्रामीणों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पुराने कुओं, हैंडपंपों और तालाबों का सहारा लेना पड़ रहा है।

गांव में बढ़ते जल संकट को लेकर लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी केवल औपचारिक कार्रवाई कर रहे हैं। जब भी शिकायत की जाती है तो एक-दो दिन के लिए पानी की आपूर्ति सामान्य कर दी जाती है, लेकिन उसके बाद फिर वही समस्या शुरू हो जाती है। इससे लोगों का भरोसा सरकारी व्यवस्था पर कमजोर पड़ता जा रहा है।

■ ब्लॉक मुख्यालय में ही जल संकट, तो गांवों की क्या होगी स्थिति?

रामनगर ब्लॉक मुख्यालय होने के कारण यहां प्रशासनिक गतिविधियां भी अधिक रहती हैं। इसके बावजूद यदि लोगों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़े तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ब्लॉक मुख्यालय स्थित गांव की यह स्थिति है तो दूरदराज के गांवों में हालात कितने खराब होंगे, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

गांव के कई मोहल्लों में लगी पानी की टोटियां केवल नाममात्र की सुविधा बनकर रह गई हैं। अधिकांश स्थानों पर या तो पानी नहीं पहुंचता या फिर इतना कम आता है कि उससे लोगों की जरूरतें पूरी नहीं हो पातीं। कई परिवारों को सुबह-सुबह पानी की व्यवस्था करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

■ पुरानी टंकी पर बढ़ा अतिरिक्त बोझ

ग्रामीणों के अनुसार समस्या की जड़ जलापूर्ति व्यवस्था की क्षमता और योजना निर्माण में हुई चूक है। जानकारी के मुताबिक रामनगर में पहले से मौजूद पुरानी पानी टंकी की मरम्मत कर उसे नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत फिर से चालू किया गया था। यह टंकी मूल रूप से केवल रामनगर गांव की आबादी को ध्यान में रखकर बनाई गई थी।

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बाद में इसी टंकी से ग्राम पंचायत बेसिंग को भी जोड़ दिया गया। आबादी और पानी की मांग बढ़ने के बावजूद जल भंडारण क्षमता में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं की गई। परिणामस्वरूप एक ही स्रोत पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगा और दोनों ग्राम पंचायतों में पानी की उपलब्धता प्रभावित होने लगी। ग्रामीणों का कहना है कि जब किसी व्यवस्था की क्षमता सीमित हो और उस पर अतिरिक्त भार डाल दिया जाए तो उसका असर सीधे जनता पर पड़ता है। वर्तमान में यही स्थिति रामनगर और बेसिंग क्षेत्र में देखने को मिल रही है।

■ गर्मी बढ़ने के साथ और गहरा गया संकट

भीषण गर्मी के इस मौसम में पानी की आवश्यकता सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में जलापूर्ति व्यवस्था का प्रभावित होना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। दिन चढ़ने के साथ तापमान बढ़ता है और लोगों की पानी की जरूरत भी बढ़ जाती है, लेकिन पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

महिलाओं को घर के कामकाज और परिवार के लिए पानी जुटाने में अतिरिक्त समय देना पड़ रहा है। बुजुर्गों और बच्चों को भी इस संकट का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवार ऐसे हैं जिन्हें पीने और घरेलू उपयोग के लिए अलग-अलग स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

■ शिकायतें बहुत, समाधान कम

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों को समस्या से अवगत कराया है। कुछ मामलों में अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण भी किया, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

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लोगों का कहना है कि शिकायतों के बाद कुछ दिनों के लिए सप्लाई में सुधार दिखाई देता है, लेकिन जल्द ही समस्या फिर से शुरू हो जाती है। इससे यह धारणा बन रही है कि समस्या का मूल कारण दूर करने के बजाय केवल अस्थायी उपाय किए जा रहे हैं।

ग्रामीणों का मानना है कि जब तक जलापूर्ति प्रणाली की क्षमता, पाइपलाइन नेटवर्क और वितरण व्यवस्था की तकनीकी जांच नहीं होगी, तब तक समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

■ कागजों और धरातल की हकीकत में अंतर

गांव के लोगों का आरोप है कि विभागीय स्तर पर योजना को सफल बताकर उपलब्धियों का प्रचार किया जा रहा है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी रिपोर्टों में योजना को पूर्ण और सफल दिखाया जा सकता है, लेकिन जमीनी स्तर पर लोग आज भी पानी की कमी से जूझ रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास योजनाओं का वास्तविक मूल्यांकन तभी संभव है जब उनके लाभार्थियों से फीडबैक लिया जाए। यदि लोगों को मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है तो किसी भी योजना को पूर्ण रूप से सफल नहीं माना जा सकता।

■ सरकार की छवि पर भी पड़ रहा असर

ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा की अनदेखी का असर केवल लोगों की दिनचर्या पर ही नहीं पड़ता, बल्कि इससे सरकार और प्रशासन की छवि भी प्रभावित होती है। लोगों का मानना है कि यदि योजनाओं का सही संचालन और निगरानी नहीं होगी तो जनता में असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।

कुछ ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जनता अपने अनुभवों के आधार पर ही सरकार और प्रशासन का मूल्यांकन करती है। इसलिए विभागीय अधिकारियों को केवल कागजी उपलब्धियों पर ध्यान देने के बजाय वास्तविक समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देनी चाहिए।

■ नई टंकी और व्यापक जांच की मांग

गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए। ग्रामीणों का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था की क्षमता क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप नहीं है, इसलिए नई और अधिक क्षमता वाली पानी टंकी का निर्माण कराया जाना चाहिए।

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इसके साथ ही जल वितरण प्रणाली का भी पुनर्मूल्यांकन किया जाए ताकि सभी मोहल्लों और घरों तक समान रूप से पानी पहुंच सके। लोगों ने नियमित निगरानी व्यवस्था लागू करने तथा जलापूर्ति में आने वाली तकनीकी बाधाओं को तत्काल दूर करने की भी मांग की है।

■ समाधान की प्रतीक्षा में ग्रामीण

रामनगर के ग्रामीण फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग से ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि उन्हें किसी अस्थायी राहत की नहीं बल्कि स्थायी समाधान की आवश्यकता है। यदि समय रहते जल संकट का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में समस्या और विकराल रूप ले सकती है।

पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा किसी भी नागरिक का अधिकार है। ऐसे में रामनगर के लोगों की मांग है कि नमामि गंगे जैसी महत्वाकांक्षी योजना का लाभ वास्तव में धरातल पर दिखाई दे और गांव के प्रत्येक घर तक नियमित एवं पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जाए।

📌 सवाल-जवाब

रामनगर में जल संकट का मुख्य कारण क्या बताया जा रहा है?

ग्रामीणों के अनुसार पुरानी पानी टंकी पर अतिरिक्त भार पड़ने और जल वितरण व्यवस्था की कमी के कारण समस्या बढ़ी है।

नमामि गंगे योजना के बावजूद लोग परेशान क्यों हैं?

ग्रामीणों का आरोप है कि नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही और शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।

ग्रामीण वर्तमान में पानी की व्यवस्था कैसे कर रहे हैं?

कई परिवार कुओं, हैंडपंपों और तालाबों से पानी लाकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं।

ग्रामीण प्रशासन से क्या मांग कर रहे हैं?

नई पानी टंकी का निर्माण, तकनीकी जांच और नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।

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Author: यायावर

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