20 अक्टूबर 2026 5:39 अपराह्न

“जान हमारी गई और अपराधी भी हम ही साबित हो रहे” ;  संभल विवाद पर न्यायिक जांच रिपोर्ट के बाद सपा नेताओं ने उठाए सवाल

संभल बवाल की पृष्ठभूमि में पुलिस बल की तस्वीर के साथ रिपोर्टर दुर्गा प्रसाद शुक्ला का पोर्ट्रेट, न्यायिक जांच रिपोर्ट पर समाजवादी पार्टी नेताओं द्वारा उठाए गए सवालों को दर्शाती फीचर इमेज।

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दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के संभल में हुए चर्चित बवाल की न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद जियाउर्रहमान बर्क, रामपुर से सांसद मोहिबुल्ला नदवी और संभल के विधायक इकबाल महमूद ने रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे पक्षपातपूर्ण बताया है। तीनों नेताओं का कहना है कि घटना के दौरान जान गंवाने वाले और जेल भेजे गए लोगों के साथ न्याय नहीं हुआ, बल्कि उन्हें ही दोषी ठहराने की कोशिश की गई है।

सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही और पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर भी कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केवल किसी वर्तमान (सिटिंग) न्यायाधीश की निगरानी में ही संभव है।

न्याय की उम्मीद टूटी, रिपोर्ट पर जताई नाराजगी

संभल के दीपा सराय स्थित आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि जब सरकार ने न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था, तब लोगों को उम्मीद थी कि घटना की निष्पक्ष जांच होगी और सच्चाई सामने आएगी। लेकिन आयोग की रिपोर्ट आने के बाद लोगों की उम्मीदें टूट गई हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में गठित होने वाले अधिकांश जांच आयोग सरकार के पक्ष में रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं। उनके अनुसार संभल की घटना में भी वास्तविक परिस्थितियों और तथ्यों को नजरअंदाज किया गया है।

“पांच लोगों की जान गई, लेकिन दोषी कौन?”

सांसद बर्क ने कहा कि संभल हिंसा के दौरान पुलिस की गोलीबारी में पांच लोगों की मौत हुई थी। उनका दावा है कि मारे गए सभी लोग निहत्थे थे और उनके परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के बाद बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जिससे कई परिवार आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना कर रहे हैं।

बर्क ने सवाल उठाया कि जिस दिन घटना हुई, उस समय पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात था और ड्रोन कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही थी। इसके बावजूद अब तक ऐसा कोई वीडियो या तस्वीर सार्वजनिक नहीं की गई, जिसमें आम लोगों के हाथों में हथियार दिखाई दे रहे हों। उनका कहना है कि यदि ऐसे प्रमाण मौजूद हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल

सपा सांसद ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पूरे मामले में केवल स्थानीय लोगों को निशाना बनाया। उनके अनुसार जांच और कार्रवाई एकतरफा रही तथा निर्दोष लोगों को आरोपी बना दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो तो घटना की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि मृतकों और गिरफ्तार लोगों के परिवार आज भी मानसिक, सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहे हैं तथा उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद लगातार कमजोर होती जा रही है।

मोहिबुल्ला नदवी बोले- राजनीतिक रंजिश का शिकार बनाए गए जनप्रतिनिधि

रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्ला नदवी ने भी न्यायिक जांच रिपोर्ट और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संभल बवाल के मामले में सांसद जियाउर्रहमान बर्क और विधायक इकबाल महमूद के पुत्र सुहेल इकबाल का नाम राजनीतिक कारणों से जोड़ा गया है।

उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व समाज में शांति बनाए रखना और लोगों को सही दिशा देना होता है। ऐसे में बिना ठोस आधार के उन्हें किसी हिंसक घटना से जोड़ना उचित नहीं कहा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में राजनीतिक विरोध के कारण कार्रवाई की गई है।

“निर्दोष लोगों को बनाया गया आरोपी”

मोहिबुल्ला नदवी ने कहा कि घटना के बाद की गई पुलिस कार्रवाई में कई ऐसे लोगों को भी आरोपी बनाया गया, जिनका हिंसा से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के बिना किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।

उनका कहना था कि पूरे मामले की दोबारा निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए ताकि वास्तविक जिम्मेदार लोगों की पहचान हो सके और निर्दोष लोगों को राहत मिल सके।

इकबाल महमूद ने आयोग की रिपोर्ट को किया खारिज

संभल से समाजवादी पार्टी के विधायक इकबाल महमूद ने भी न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह आयोग वास्तविक अर्थों में स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग नहीं था, क्योंकि इसमें सेवानिवृत्त अधिकारियों को शामिल किया गया था।

उनका कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों की जांच किसी वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में कराई जानी चाहिए, जिससे जांच की निष्पक्षता पर किसी प्रकार का संदेह न रहे।

“सरकार के अनुरूप तैयार की गई रिपोर्ट”

इकबाल महमूद ने आरोप लगाया कि आयोग ने सरकार की सोच के अनुरूप रिपोर्ट तैयार की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच पूरी तरह स्वतंत्र होती तो रिपोर्ट के निष्कर्ष भी अलग हो सकते थे। उनके अनुसार निष्पक्ष जांच ही समाज में विश्वास कायम कर सकती है।

उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा तभी मजबूत होगा, जब जांच एजेंसियां और आयोग किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होकर कार्य करें।

पलायन और मंदिरों पर कब्जे के दावों को बताया गलत

विधायक इकबाल महमूद ने मुख्यमंत्री को दी गई कुछ सूचनाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि संभल से हिंदुओं के पलायन या मंदिरों पर कब्जे जैसी बातें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।

उन्होंने वर्ष 1978 के दंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय नौ लोगों की मौत हुई थी। यदि सरकार इससे अधिक मौतों का दावा करती है तो उसे उसके प्रमाण सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी ऐतिहासिक घटना के आंकड़े तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही प्रस्तुत किए जाने चाहिए।

रिपोर्ट के बाद तेज हुई राजनीतिक बहस

न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद संभल का मामला एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। जहां समाजवादी पार्टी के नेताओं ने रिपोर्ट की निष्पक्षता और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, वहीं यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना रह सकता है।

फिलहाल सपा नेताओं की ओर से निष्पक्ष जांच, तथ्यों को सार्वजनिक करने और निर्दोष लोगों को राहत देने की मांग लगातार दोहराई जा रही है। दूसरी ओर, न्यायिक जांच रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होती दिखाई दे रही है।

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