ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
प्रतापगढ़। महुली क्षेत्र में बुधवार देर रात हुई दर्दनाक मकान दुर्घटना ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। आधी रात के सन्नाटे को चीरती तेज धमाके की आवाज ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कहीं बिजली गिर गई है या कोई बड़ा विस्फोट हो गया है। जब आसपास के लोग घरों से बाहर निकले तो सामने का दृश्य इतना भयावह था कि हर किसी के कदम ठिठक गए। जर्जर मकान की दो छतें भरभराकर गिर चुकी थीं और पूरा परिवार मलबे के नीचे दबा हुआ था।
इस हादसे की सबसे मार्मिक गवाही 70 वर्षीय बुजुर्ग रजोला ने दी। उन्होंने कांपती आवाज में उस भयावह पल को याद करते हुए कहा, “हम सोवत रहे… एकाएक जइसे वज्र फाट परा… हमार अंखिया खुलि गय। बहुत डेराय गए। बाहर निकरे त पता लाग कि परमोद के घर वाले मलबा मा दबान अहैं। अइसन दुखद मंजर हम जिंदगी मा पहिले कबहूं नाहीं देखे रहे।” इतना कहते-कहते उनकी आंखें भर आईं और गला रुंध गया।
धमाके की आवाज से दहल उठा पूरा मोहल्ला
स्थानीय लोगों के अनुसार रात के समय अचानक इतनी तेज आवाज आई कि कई लोगों को लगा जैसे आसमान से बिजली गिरी हो। कुछ लोगों ने इसे सड़क हादसा समझा, जबकि कई लोग किसी विस्फोट की आशंका में घरों से बाहर निकल आए। लेकिन कुछ ही मिनटों में साफ हो गया कि प्रमोद कुमार श्रीवास्तव के पुराने और जर्जर मकान की छतें भरभराकर गिर गई हैं।
घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग बिना समय गंवाए घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। हर किसी के चेहरे पर डर, चिंता और बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी।
मलबे के बीच अपनों को बचाने की जद्दोजहद
हादसे में जीवित बचे प्रमोद श्रीवास्तव के पुत्र अमन श्रीवास्तव ने साहस नहीं छोड़ा। गहरे सदमे के बावजूद वह अपने हाथों से मलबा हटाकर परिवार के सदस्यों को निकालने का प्रयास करता रहा। उसे उम्मीद थी कि शायद उसके माता-पिता, पत्नी, बच्चे और भाई सुरक्षित मिल जाएं।
हालांकि अकेले उसके लिए भारी मलबा हटाना संभव नहीं था। ऐसे में उसने सामने रहने वाले अपने रिश्तेदार रजत को आवाज लगाई। रजत तुरंत मौके पर पहुंचे और बिना अपनी जान की परवाह किए राहत कार्य में जुट गए। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने मलबे का विशाल ढेर देखा तो कुछ पल के लिए समझ ही नहीं आया कि क्या किया जाए। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार बचाव कार्य में लगे रहे। इस दौरान उनके पैर में भी चोट लग गई।
परिजन और स्थानीय लोग बने राहत कार्य का सहारा
घटना की जानकारी मिलते ही परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंच गए। आरएसएस के प्रचार प्रमुख अंकुर श्रीवास्तव, अंकित श्रीवास्तव और मुकेश श्रीवास्तव ने राहत कार्य में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा पवन कुमार, कान्हा और अन्य स्थानीय लोग भी मलबा हटाने में जुट गए।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण थे और हर व्यक्ति अपने स्तर पर किसी न किसी तरह मदद करने का प्रयास कर रहा था।
पुलिस-प्रशासन ने दिखाई तत्परता
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम भी तत्काल घटनास्थल पर पहुंच गई। स्थानीय लोगों ने राहत कार्य तेज करने के लिए बुलडोजर बुलवाया, लेकिन शहर कोतवाल सुभाष यादव ने उसे तुरंत चलाने की अनुमति नहीं दी।
अधिकारियों का मानना था कि यदि भारी मशीन का इस्तेमाल किया जाता तो जर्जर दीवारें भी गिर सकती थीं, जिससे मलबे के नीचे दबे लोगों की जान को और अधिक खतरा हो सकता था। इसलिए पहले सावधानीपूर्वक हाथों और छोटे उपकरणों की मदद से राहत अभियान चलाया गया।
सभासद और ग्रामीणों ने निभाई अहम भूमिका
महुली के सभासद दीपक उमरवैश्य भी घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे। उन्होंने राहत कार्य के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था कराने का प्रयास किया। वहीं स्थानीय निवासी बबलू सिंह खभोर ने बताया कि श्रीवास्तव परिवार बेहद मेहनतकश और सरल स्वभाव का था। इस हादसे ने पूरे गांव और आसपास के लोगों को झकझोर कर रख दिया है।
उन्होंने कहा कि जैसे ही घटना की जानकारी मिली, वह अपने घर पर नहीं रुक सके और तुरंत मौके पर पहुंच गए। वहां का दृश्य देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
मकान की हालत देखकर सहम गए लोग
रमेश, सौरभ, अनिल कुमार और लल्लू सहित कई स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसे के बाद मकान की स्थिति इतनी खतरनाक हो गई थी कि उसके पास जाने तक का साहस नहीं हो रहा था। दीवारें लगातार कमजोर दिखाई दे रही थीं और किसी भी समय गिरने का खतरा बना हुआ था।
इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने जोखिम उठाकर राहत अभियान में सहयोग किया। कई लोगों ने घायल होने की परवाह किए बिना मलबा हटाने में मदद की।
इलाके में पसरा मातम, हर आंख हुई नम
महुली में हुए इस दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया है। हादसे के बाद से इलाके में मातम पसरा हुआ है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में इतना भयावह दृश्य पहले कभी नहीं देखा था।
स्थानीय लोग अब प्रशासन से पुराने और जर्जर मकानों का सर्वे कर समय रहते आवश्यक कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। लोगों का मानना है कि यदि कमजोर भवनों की समय पर पहचान कर मरम्मत या ध्वस्तीकरण कराया जाए तो कई परिवारों को ऐसे दर्दनाक हादसों से बचाया जा सकता है।













