मैनपुरी

गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग पर गरजे शंकराचार्य, बोले- गो संरक्षण में विफल सरकार को जनता देगी जवाब

करहल पहुंचे ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य, भाजपा और योगी सरकार पर साधा निशाना

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के करहल क्षेत्र में पहुंचे ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ संरक्षण और गौ सम्मान के मुद्दे को लेकर केंद्र तथा राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। गाय को राष्ट्रमाता घोषित कराने के उद्देश्य से निकाली जा रही अपनी गो-रक्षा यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि जिस सरकार ने गाय के नाम पर जनता से समर्थन और वोट हासिल किए, वही सरकार आज गौवंश की सुरक्षा और संरक्षण के अपने दायित्वों को निभाने में असफल साबित हुई है।

करहल के मीठेपुर क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। ऐसे में यदि सरकारें गौवंश की रक्षा नहीं कर पा रही हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि गौमाता की उपेक्षा किसी भी सभ्य समाज के लिए शुभ संकेत नहीं मानी जा सकती।

गो-रक्षा यात्रा के जरिए राष्ट्रव्यापी अभियान

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन दिनों देशभर में गो-रक्षा यात्रा के माध्यम से जनजागरण अभियान चला रहे हैं। उनका उद्देश्य गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए व्यापक जनसमर्थन जुटाना है। उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक भावना का विषय नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा है।

शंकराचार्य ने कहा कि देश में करोड़ों लोग गाय को माता के रूप में पूजते हैं, लेकिन इसके बावजूद उसे वह सम्मान नहीं मिला है जिसकी वह अधिकारी है। उनका मानना है कि यदि गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा मिल जाता है तो उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए मजबूत संवैधानिक तथा प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जा सकेगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक सरकार इस मांग को स्वीकार नहीं करती, तब तक उनका आंदोलन और जनजागरण अभियान जारी रहेगा। उन्होंने इसे अपने जीवन का महत्वपूर्ण संकल्प बताते हुए कहा कि गौ संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जाना चाहिए।

भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य ने भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा ने लंबे समय तक गौ संरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठाया और जनता के बीच इसे प्रमुख विषय बनाया। लेकिन सत्ता में आने के बाद गौवंश की स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें चुनाव के समय गाय की बात करती हैं, लेकिन बाद में इस विषय पर गंभीरता से कार्य नहीं करतीं। उनके अनुसार देश के विभिन्न हिस्सों में आज भी बड़ी संख्या में गौवंश सड़कों पर भटकने को मजबूर है, जबकि किसानों को भी आवारा पशुओं की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। शंकराचार्य ने कहा कि यदि कोई राजनीतिक दल वास्तव में गाय के प्रति समर्पित है तो उसे गौशालाओं की स्थिति सुधारने, पशु चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने और गौवंश संरक्षण के लिए प्रभावी नीति लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

“आदित्यनाथ अब योगी नहीं, मुख्यमंत्री हैं”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पर टिप्पणी करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि किसी भी संत या योगी को राजनीति से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक आध्यात्मिक व्यक्ति का मुख्य कार्य समाज को नैतिक और आध्यात्मिक दिशा देना होता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में आदित्यनाथ एक संवैधानिक पद पर कार्य कर रहे हैं और इसलिए उनकी पहचान मुख्यमंत्री के रूप में अधिक है। शंकराचार्य ने यह भी याद दिलाया कि वर्षों पहले स्वयं योगी आदित्यनाथ ने गाय को राष्ट्रमाता घोषित किए जाने की मांग का समर्थन किया था। ऐसे में अब सरकार को उस दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि किसी विषय को लेकर पहले समर्थन व्यक्त किया गया है तो सत्ता में आने के बाद उस पर कार्रवाई भी दिखाई देनी चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने सरकार से गौ संरक्षण संबंधी अपने पुराने संकल्पों को याद करने की अपील की।

गौ संरक्षण को बताया राष्ट्रीय जिम्मेदारी

शंकराचार्य ने कहा कि गाय भारतीय कृषि व्यवस्था, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरणीय संतुलन से गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि जैविक खेती, प्राकृतिक कृषि और ग्रामीण रोजगार के अनेक मॉडल गौ आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं।

उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास की दौड़ में गाय के महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता। यदि देश को टिकाऊ कृषि और स्वस्थ पर्यावरण की दिशा में आगे बढ़ना है तो गौ संरक्षण को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर ऐसी नीतियां तैयार करें जिनसे गौशालाओं को आर्थिक मजबूती मिले, किसानों को सहायता उपलब्ध हो और गौवंश की देखभाल सुनिश्चित की जा सके।

कन्नौज प्रकरण पर जताई नाराजगी

हाल ही में कन्नौज में प्रवास की अनुमति नहीं मिलने की घटना पर भी शंकराचार्य ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में अतिथि का सम्मान सर्वोच्च माना गया है और ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा हमारी पहचान रही है।

उनके अनुसार किसी संत या धार्मिक व्यक्ति को ठहरने की अनुमति न मिलना केवल व्यक्तिगत असुविधा का विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं समाज को गलत संदेश देती हैं और भारतीय परंपराओं की भावना के अनुरूप नहीं हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे घटनाक्रम उनके अभियान को रोक नहीं सकते और वह अपने उद्देश्य को लेकर लगातार आगे बढ़ते रहेंगे।

हरिद्वार अर्द्धकुंभ में होंगे शामिल

हरिद्वार में प्रस्तावित अर्द्धकुंभ आयोजन को लेकर भी शंकराचार्य ने अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि उन्हें उत्तराखंड सरकार की ओर से औपचारिक निमंत्रण प्राप्त हो चुका है और वह इस धार्मिक आयोजन में भाग लेंगे।

उन्होंने कहा कि कुंभ और अर्द्धकुंभ जैसे आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक एकता के प्रतीक हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से देश-दुनिया के लोगों को भारतीय संस्कृति की व्यापकता और गहराई को समझने का अवसर मिलता है।

आंदोलन को मिलेगा और विस्तार

करहल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि आने वाले दिनों में यह अभियान और व्यापक रूप लेगा तथा देश के विभिन्न राज्यों में जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का विरोध करना नहीं, बल्कि गाय के सम्मान और संरक्षण को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाना है। इसी लक्ष्य को लेकर वह लगातार जनजागरण अभियान चला रहे हैं।

गौरतलब है कि गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर चल रहा यह अभियान उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना है।

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