कटा होंठ और तालु की जन्मजात समस्या से जूझ रहे दोनों बच्चों की हुई निःशुल्क सर्जरी, स्वास्थ्य विभाग और स्माइल ट्रेन फाउंडेशन के सहयोग से मिला नया जीवन
रिपोर्ट : इरफान अली लारी
देवरिया। जन्म के साथ ही चेहरे पर आई ऐसी शारीरिक कमी, जो बच्चे के सामान्य जीवन के साथ-साथ उसके आत्मविश्वास को भी प्रभावित कर सकती थी, अब दो मासूम बच्चों के लिए बीते दिनों की बात बन चुकी है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने समय रहते इन बच्चों को चिन्हित किया और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था तथा स्माइल ट्रेन फाउंडेशन के सहयोग से उनकी निःशुल्क सर्जरी कराई गई। सफल ऑपरेशन के बाद दोनों बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है।
पथरदेवा ब्लॉक क्षेत्र के पचुरुखिया गांव की दो वर्षीय रिद्धि और कोयरपट्टी गांव के नौ माह के सौमिक जन्म से ही कटा होंठ और तालु (Cleft Lip and Palate) की समस्या से पीड़ित थे। आरबीएसके की स्क्रीनिंग टीम ने दोनों बच्चों की पहचान की। इसके बाद परिजनों को उपचार की जानकारी दी गई और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराकर दोनों बच्चों को गोरखपुर स्थित सावित्री हॉस्पिटल में इलाज के लिए भेजा गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में दोनों की सफल सर्जरी हुई।
आंगनबाड़ी केंद्र की स्क्रीनिंग में सामने आई रिद्धि की समस्या
पचुरुखिया गांव निवासी धनंजय कुमार की दो वर्षीय बेटी रिद्धि जन्म से ही कटा होंठ और तालु की समस्या से जूझ रही थी। परिवार के लिए यह चिंता का विषय था, लेकिन आरबीएसके की स्वास्थ्य टीम की स्क्रीनिंग के बाद बच्ची के उपचार की राह खुली।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आरबीएसके टीम गांवों में जाकर आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करती है। इसी क्रम में एक जून 2026 को पचुरुखिया आंगनबाड़ी केंद्र पर स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया गया। टीम-बी के स्वास्थ्य कर्मियों ने स्क्रीनिंग के दौरान रिद्धि की जन्मजात समस्या को पहचाना।
जांच के बाद टीम ने बच्ची के पिता धनंजय कुमार को उसकी बीमारी और उपलब्ध उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि स्माइल ट्रेन फाउंडेशन के सहयोग से गोरखपुर में इस तरह की समस्या का निःशुल्क उपचार कराया जा सकता है।
परिजनों को जब उपचार की जानकारी मिली तो उन्होंने आरबीएसके टीम के सहयोग से बच्ची को गोरखपुर के सावित्री हॉस्पिटल पहुंचाया। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने रिद्धि की आवश्यक जांच की और सर्जरी के लिए उसे भर्ती किया।
एक जुलाई को हुई रिद्धि की सफल सर्जरी
सभी चिकित्सकीय जांच पूरी होने के बाद विशेषज्ञ सर्जन ने एक जुलाई 2026 को रिद्धि के कटे होंठ और तालु की सफल सर्जरी की। ऑपरेशन के बाद बच्ची की स्थिति में सुधार हुआ। परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक करने वाला था, क्योंकि लंबे समय से बेटी की समस्या को लेकर चिंता में रहने वाले परिजनों को अब उसके बेहतर भविष्य की उम्मीद दिखाई देने लगी।
आरबीएसके टीम की सक्रियता और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था के कारण रिद्धि को समय पर विशेषज्ञ उपचार मिल सका। परिजनों ने इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और उपचार से जुड़े सभी लोगों के प्रति आभार जताया।
ओपीडी जांच के दौरान चिन्हित हुआ सौमिक
इसी तरह पथरदेवा ब्लॉक के कोयरपट्टी गांव निवासी दीपक कुमार का नौ माह का बेटा सौमिक भी जन्म से कटा होंठ और तालु की समस्या से पीड़ित था। परिवार के लिए बच्चे की यह स्थिति चिंता का कारण बनी हुई थी।
आरबीएसके की टीम-ए ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पथरदेवा की ओपीडी के दौरान सौमिक को चिन्हित किया। स्वास्थ्य टीम ने बच्चे की स्थिति को देखते हुए परिजनों को उपलब्ध उपचार और आगे की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
आरबीएसके टीम के सहयोग से सौमिक को 27 जुलाई 2026 को गोरखपुर स्थित सावित्री हॉस्पिटल भेजा गया। वहां चिकित्सकों ने बच्चे की आवश्यक जांच की और उसकी स्थिति का चिकित्सकीय आकलन किया। जांच के बाद विशेषज्ञों ने सर्जरी के लिए सितंबर माह की तारीख तय की।
17 सितंबर को सौमिक की भी सफल सर्जरी
निर्धारित प्रक्रिया के तहत सौमिक को दोबारा सावित्री हॉस्पिटल ले जाया गया। 17 सितंबर 2026 को विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उसके कटे होंठ और तालु की सफल सर्जरी की। ऑपरेशन के बाद बच्चे की स्थिति में सुधार हुआ और परिजनों ने राहत की सांस ली।
दोनों बच्चों के सफल उपचार के बाद उनके परिवारों में खुशी का माहौल है। जिन समस्याओं के कारण बच्चों के भविष्य को लेकर माता-पिता चिंतित थे, अब उनके समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा चुका है।
आरबीएसके की स्क्रीनिंग से समय पर मिल रहा उपचार
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में जन्मजात बीमारियों, कमियों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार गांवों और शिक्षण संस्थानों तक पहुंच रही हैं।
पथरदेवा ब्लॉक में आरबीएसके की दो टीमें तैनात हैं। टीम-ए और टीम-बी द्वारा क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों, प्राथमिक विद्यालयों तथा अन्य शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाती है। स्क्रीनिंग के दौरान किसी बच्चे में गंभीर बीमारी या जन्मजात समस्या पाए जाने पर उसे आगे के उपचार के लिए चिन्हित किया जाता है।
रिद्धि और सौमिक का मामला भी इसी व्यवस्था का उदाहरण है। यदि आरबीएसके की टीमें नियमित स्क्रीनिंग के लिए गांवों और स्वास्थ्य केंद्रों तक नहीं पहुंचतीं, तो संभव है कि दोनों बच्चों को विशेषज्ञ उपचार मिलने में और अधिक समय लगता।
16 ब्लॉकों में 32 आरबीएसके टीमें कर रहीं बच्चों की जांच
आरबीएसके के नोडल अधिकारी डॉ. कार्तिकेय पाण्डेय ने बताया कि जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत कुल 16 ब्लॉकों में 32 आरबीएसके टीमें कार्यरत हैं। प्रत्येक ब्लॉक में दो टीमों की तैनाती की गई है।
उन्होंने बताया कि आरबीएसके की टीमें नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों, प्राथमिक विद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों में जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच करती हैं। जांच के दौरान बीमारी या जन्मजात समस्या मिलने पर बच्चों को आवश्यक उपचार के लिए चिन्हित किया जाता है और संबंधित प्रक्रिया के तहत उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकों तक पहुंचाया जाता है।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल बीमारी की पहचान करना नहीं, बल्कि बच्चों को समय पर उपचार उपलब्ध कराकर उन्हें स्वस्थ और सामान्य जीवन की ओर लौटाना भी है।
स्वास्थ्य टीम के प्रयासों से मिली दोनों परिवारों को राहत
पथरदेवा के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रभात रंजन ने बताया कि रिद्धि और सौमिक की सर्जरी कराने में आरबीएसके टीम के डॉ. धनंजय कुमार, फार्मासिस्ट मनोज गुप्ता, एएनएम संजू देवी और फार्मासिस्ट इंजल आलम का विशेष सहयोग रहा।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा बच्चों की लगातार स्क्रीनिंग की जा रही है। किसी बच्चे में जन्मजात बीमारी या गंभीर स्वास्थ्य समस्या सामने आने पर उसके उपचार की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाता है।
रिद्धि और सौमिक की सफल सर्जरी ने यह साबित किया है कि सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों की पहुंच यदि गांवों तक प्रभावी ढंग से हो, तो जरूरतमंद बच्चों को समय रहते बेहतर उपचार मिल सकता है। दोनों बच्चों के परिवारों ने स्वास्थ्य विभाग, आरबीएसके टीम और स्माइल ट्रेन फाउंडेशन के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया है।
दोनों मासूमों के चेहरे पर लौटी मुस्कान केवल सफल सर्जरी की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात की मिसाल भी है कि समय पर पहचान, सही मार्गदर्शन और उपचार की सुविधा किसी बच्चे का भविष्य बदल सकती है।













