सूरज सिंह राणा की रिपोर्ट
कर्वी, चित्रकूट। ग्राम पंचायत कालूपुर पाही में स्थित खेरापति देवी मंदिर की भूमि को लेकर चल रहा विवाद अब लगातार गंभीर होता जा रहा है। मंदिर की जमीन पर कथित कब्जे की कोशिश के आरोपों के बीच ग्रामीणों ने एक बार फिर प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर की बेशकीमती भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद विवाद समाप्त नहीं हो पा रहा है। कई बार शिकायत और प्रशासनिक स्तर पर पैमाइश की कार्रवाई के बाद भी ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि खेरापति देवी मंदिर की भूमि पर कुछ दबंग लोगों द्वारा कथित रूप से कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि मंदिर से जुड़ी जमीन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सार्वजनिक महत्व भी रखती है, इसलिए इसके संबंध में किसी भी प्रकार की अनियमितता या अतिक्रमण की स्थिति को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। ग्रामीण लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि की निष्पक्ष पैमाइश कराकर उसकी सीमा स्पष्ट की जाए।
गाटा संख्या 495 की जमीन को लेकर उठे सवाल
ग्रामीणों के अनुसार, खेरापति देवी मंदिर की भूमि गाटा संख्या 495 और खाता संख्या 00433 में दर्ज है। विवाद का मुख्य केंद्र इसी भूमि की वास्तविक स्थिति, सीमा और मौके पर मौजूद स्थिति को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज विवरण के अनुरूप यदि जमीन की वैज्ञानिक एवं पारदर्शी तरीके से पैमाइश करा दी जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि मंदिर की भूमि की वास्तविक सीमा कहां तक है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि विवाद की स्थिति में केवल मौखिक दावों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय राजस्व रिकॉर्ड, नक्शा, गाटा संख्या और मौके की स्थिति का मिलान कराया जाना आवश्यक है। इससे न केवल मौजूदा विवाद का समाधान हो सकेगा, बल्कि भविष्य में भी मंदिर की भूमि को लेकर किसी तरह का विवाद खड़ा होने की आशंका कम होगी।
शिकायत के बाद मौके पर पहुंची राजस्व टीम
मंदिर की भूमि को लेकर ग्रामीणों की शिकायत के बाद राजस्व विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची थी। बताया गया कि नायब तहसीलदार और क्षेत्रीय लेखपालों की संयुक्त टीम ने भूमि की पैमाइश करने का प्रयास किया। प्रशासनिक टीम की मौजूदगी से ग्रामीणों को उम्मीद थी कि लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब स्पष्ट हो जाएगा।
हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर हुई पैमाइश की प्रक्रिया से वे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो सके। उनका आरोप है कि भूमि की सीमा को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक, जब तक राजस्व अभिलेखों और निर्धारित मानकों के आधार पर विधिवत सीमांकन नहीं किया जाता, तब तक विवाद के पूरी तरह समाप्त होने की संभावना कम है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पैमाइश की प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ दोबारा कराया जाए और संबंधित पक्षों की मौजूदगी में भूमि की वास्तविक सीमा को चिह्नित किया जाए।
प्रशासनिक पैमाइश के बाद भी क्यों नहीं खत्म हुआ विवाद?
खेरापति देवी मंदिर की भूमि को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ग्रामीणों की शिकायत के बाद राजस्व टीम मौके पर पहुंच चुकी है, तो विवाद अभी तक पूरी तरह समाप्त क्यों नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पैमाइश की प्रक्रिया के दौरान जमीन की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है तो प्रशासन को दोबारा राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान कराना चाहिए।
उनका कहना है कि मंदिर की जमीन से जुड़ा मामला संवेदनशील है। ऐसे में किसी भी पक्ष की शिकायत को नजरअंदाज करने के बजाय सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच और मौके पर स्पष्ट सीमांकन जरूरी है। ग्रामीण चाहते हैं कि कार्रवाई ऐसी हो जिससे भविष्य में कोई व्यक्ति मंदिर की भूमि पर दावा या कब्जे की कोशिश न कर सके।
5 अक्टूबर को जिलाधिकारी को फिर सौंपा ज्ञापन
मामले में ग्रामीणों ने 5 अक्टूबर 2026 को पुनः जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखा। ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने गाटा संख्या 495 की भूमि की निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक तरीके से दोबारा पैमाइश कराने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि जमीन की पैमाइश ऐसी प्रक्रिया के तहत कराई जाए जिसमें राजस्व अभिलेखों, नक्शे और मौके की वास्तविक स्थिति का समुचित मिलान हो। इसके साथ ही मंदिर की भूमि का स्पष्ट सीमांकन कराया जाए, ताकि यह पता चल सके कि मंदिर के नाम दर्ज भूमि की वास्तविक सीमा क्या है।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने कथित अतिक्रमण की कोशिश के मामले में भी प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार का अवैध कब्जा या अतिक्रमण सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
मंदिर की जमीन से जुड़ा मामला होने के कारण बढ़ी संवेदनशीलता
ग्रामीणों के लिए यह मामला केवल जमीन के सीमांकन तक सीमित नहीं है। खेरापति देवी मंदिर स्थानीय स्तर पर आस्था का केंद्र है और मंदिर से जुड़ी भूमि को लेकर विवाद होने के कारण लोगों में स्वाभाविक रूप से चिंता बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि धार्मिक स्थलों से जुड़ी भूमि की सुरक्षा और उसके अभिलेखों की स्थिति स्पष्ट रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि समय रहते भूमि का सीमांकन और अभिलेखों का सत्यापन हो जाए तो भविष्य में किसी तरह के विवाद को जन्म लेने से रोका जा सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी अपेक्षा जताई है कि मामले की जांच किसी पूर्वाग्रह के बिना की जाए और सभी पक्षों को सुनने के बाद राजस्व नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाए।
सैकड़ों ग्रामीणों ने उठाई आवाज
जिलाधिकारी को ज्ञापन देने पहुंचे ग्रामीणों में रमाशंकर गौतम (किसान भारद्वाज), मनोज रूपौलिहा, बृजेंद्र तिवारी, सीताराम, नीरज भारद्वाज, प्रेम राजपूत और राजा राजपूत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि मंदिर की भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कराने और सार्वजनिक रूप से विवाद का स्थायी समाधान चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष तरीके से पैमाइश और सीमांकन करा देता है तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी।
निष्पक्ष जांच और स्पष्ट सीमांकन पर टिकी निगाहें
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि गाटा संख्या 495 की जमीन की दोबारा निष्पक्ष पैमाइश कराकर खेरापति देवी मंदिर की भूमि का स्पष्ट सीमांकन किया जाए। साथ ही कथित अतिक्रमण की कोशिश की भी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, मंदिर की जमीन का विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। राजस्व टीम की पूर्व कार्रवाई के बावजूद ग्रामीणों की असंतुष्टि और जिलाधिकारी को दोबारा दिए गए ज्ञापन ने मामले को एक बार फिर प्रशासन के सामने ला खड़ा किया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में किस स्तर पर कार्रवाई करता है और क्या दोबारा होने वाली पैमाइश से मंदिर की भूमि की वास्तविक सीमा को लेकर लंबे समय से चल रही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाती है।
सूरज सिंह राणा की रिपोर्ट
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खेरापति देवी मंदिर की जमीन विवाद में ग्रामीणों ने गाटा संख्या 495 की निष्पक्ष पैमाइश, स्पष्ट सीमांकन और कथित अतिक्रमण पर कार्रवाई की मांग की।













