दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट
देहरादून। अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर मायादेवी यूनिवर्सिटी के विधि विभाग में छात्रों ने शिक्षा को केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम न मानकर सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का संकल्प लिया। लॉ विभाग के छात्र-छात्राओं ने समाज में विधिक जागरूकता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए लोगों को कानून के प्रति जागरूक करने का संकल्प लेते हुए ‘रूल ऑफ लॉ’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
आयोजन के दौरान छात्रों ने कहा कि कानून की जानकारी केवल न्यायालयों और कानूनी पेशे से जुड़े लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आम नागरिक को अपने अधिकारों, कर्तव्यों और संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी होना लोकतांत्रिक समाज की मजबूती के लिए आवश्यक है। इसी सोच के साथ विधि विभाग के विद्यार्थियों ने समाज के विभिन्न वर्गों तक विधिक साक्षरता पहुंचाने की दिशा में कार्य करने का संकल्प लिया।
शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं, समाज निर्माण का मार्गदर्शक
कार्यक्रम में शिक्षक दिवस के महत्व पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक की भूमिका कक्षा की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों को ज्ञान देने के साथ-साथ उनमें जिम्मेदारी, नैतिकता, संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकार की भावना भी विकसित करता है।
वक्ताओं ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है। डिजिटल प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन, प्रवासन, विस्थापन और सामाजिक असमानता जैसी चुनौतियां समाज के सामने नए प्रश्न खड़े कर रही हैं। ऐसे समय में शिक्षक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। शिक्षक विद्यार्थियों को बदलती परिस्थितियों को समझने, उनका विश्लेषण करने और समाधान की दिशा में सोचने के लिए तैयार करता है।
शिक्षा के माध्यम से तैयार होने वाली नई पीढ़ी ही भविष्य की नीतियों, संस्थाओं और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित करती है। इसलिए शिक्षक की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक बनाने तक विस्तृत है।
1966 की यूनेस्को अनुशंसा से जुड़ा है शिक्षक दिवस
कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के ऐतिहासिक संदर्भ पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि शिक्षकों की स्थिति से संबंधित वर्ष 1966 की अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन और यूनेस्को की अनुशंसा को शिक्षक समुदाय के अधिकारों, गरिमा और पेशेवर स्थिति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक दिवस हमें यह याद दिलाता है कि किसी भी राष्ट्र के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका बुनियादी होती है। शिक्षक आने वाली पीढ़ियों को केवल विषयगत ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि उन्हें समाज, संविधान, लोकतंत्र और मानवीय मूल्यों के प्रति संवेदनशील बनाने में भी योगदान देते हैं।
कार्यक्रम में 2026 के शिक्षक दिवस की थीम “शिक्षकों के साथ खड़े रहना : भविष्य को आकार देने के 60 वर्ष” का उल्लेख करते हुए कहा गया कि बदलते समय में शिक्षकों के योगदान और उनकी भूमिका को समझना पहले से कहीं अधिक जरूरी है।
विधिक साक्षरता से मजबूत होगा लोकतांत्रिक समाज
मायादेवी यूनिवर्सिटी के विधि विभाग के छात्रों ने इस अवसर पर विधिक साक्षरता को सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। विद्यार्थियों ने कहा कि देश में कानूनों की कमी से अधिक बड़ी चुनौती कई बार कानूनों और अधिकारों की जानकारी का आम नागरिक तक नहीं पहुंच पाना होती है।
किसी व्यक्ति को अपने अधिकारों की जानकारी होगी तो वह अन्याय के खिलाफ उचित कानूनी रास्ता अपना सकेगा। इसी तरह नागरिकों को उनके संवैधानिक कर्तव्यों की जानकारी होने से लोकतांत्रिक व्यवस्था अधिक मजबूत होगी।
छात्रों ने कहा कि विधि की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों की जिम्मेदारी केवल परीक्षा पास करने या भविष्य में वकालत करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें समाज में कानूनी जागरूकता फैलाने, लोगों को उनके अधिकारों की जानकारी देने और कानून के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने में भी भूमिका निभानी चाहिए।
प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित ने छात्रों से किया नव निर्माण का आह्वान
इस अवसर पर विधि विभाग के डीन प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित ने कहा कि सामाजिक चुनौतियों की पहचान और उनसे निपटने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समाज के उत्थान के लिए नीति निर्माण, जागरूकता और उसके प्रभावी प्रचार-प्रसार को साथ लेकर चलना होगा।
प्रोफेसर दीक्षित ने कहा कि किसी भी समाज का वास्तविक उन्नयन तभी संभव है, जब उसके नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझें। कानून विद्यार्थियों के लिए यह जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे भविष्य में न्याय व्यवस्था और सामाजिक संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाले हैं।
उन्होंने छात्रों का आह्वान किया कि वे नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच के साथ देश के नव निर्माण में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि संविधान के मूल्यों, कानून के शासन और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता ही एक मजबूत राष्ट्र की आधारशिला बन सकती है।
संविधान के प्रति आस्था व्यक्त कर छात्रों ने साझा किए विचार
कार्यक्रम के दौरान विधि विभाग के छात्र-छात्राओं ने भारतीय संविधान के प्रति अपनी आस्था और प्रतिबद्धता व्यक्त की। विद्यार्थियों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अधिकार प्रदान करने के साथ-साथ देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को दिशा देता है।
छात्रों ने कानून के शासन, सामाजिक न्याय, समानता और नागरिक जिम्मेदारियों से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। इस दौरान सुधीर कुमार, कामना यादव, निशा कुमारी राय, मीनाक्षी कुमारी, माधव बंसल, ऋषव दुबे, महिमा, हुमेरा, वंशिका आर्या, कनिष्का चंद्रा, यश सोम, संजीव कुमार और अली हमजा सहित अन्य विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की।
विद्यार्थियों के विचारों में यह भावना प्रमुख रही कि कानून की पढ़ाई का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत करियर बनाना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी होना चाहिए।
शिक्षकों ने विद्यार्थियों को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा
आयोजन को सफल बनाने में मायादेवी यूनिवर्सिटी के विधि विभाग के शिक्षकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभाग के शिक्षक डॉ. प्रमोद कुमार, श्रीमती रवीशा कुरियाल, श्रीमती भावना अरोड़ा और कुमार मयंक ने छात्रों का मार्गदर्शन किया।
शिक्षकों ने विद्यार्थियों को कानून की व्यावहारिक समझ विकसित करने और समाज के कमजोर तथा वंचित वर्गों तक विधिक जानकारी पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विधि के विद्यार्थी यदि अपने ज्ञान का उपयोग समाज के हित में करें तो वे व्यापक स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
कार्यक्रम में यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि कानून और शिक्षा दोनों का अंतिम उद्देश्य समाज में न्याय, समानता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है। जब शिक्षक विद्यार्थियों में इन मूल्यों का विकास करता है और विद्यार्थी उन्हें समाज तक पहुंचाते हैं, तब शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है।
‘रूल ऑफ लॉ’ के प्रति प्रतिबद्धता के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में विधि विभाग के डीन प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित ने सभी शिक्षकगण, विद्यार्थियों और आयोजन से जुड़े लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपने सामाजिक दायित्वों को समझने का अवसर देते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर मायादेवी यूनिवर्सिटी के विधि विभाग के इस आयोजन ने शिक्षा, कानून और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संबंध को रेखांकित किया। छात्रों का विधिक साक्षरता के लिए आगे आने का संकल्प इस बात का संकेत है कि कानून की शिक्षा यदि सामाजिक सरोकारों से जुड़ती है तो वह केवल व्यक्तिगत भविष्य ही नहीं, बल्कि समाज के भविष्य को भी दिशा दे सकती है।
कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश यही रहा कि कानून का शासन, संविधान के प्रति आस्था और नागरिकों में विधिक जागरूकता लोकतांत्रिक समाज की मजबूत नींव हैं। शिक्षक विद्यार्थियों में इन मूल्यों को विकसित करने का कार्य करते हैं और वही विद्यार्थी आगे चलकर इन्हें समाज तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा सकते हैं।













