17 अक्टूबर 2026 9:28 अपराह्न

‘साहब, मैं जिंदा हूं’, : जिंदा महिला को मृत घोषित कर बंद कर दी वृद्धा पेंशन

समाधान दिवस में अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रखती बुजुर्ग महिला और रिपोर्टर ठाकुर बख्श सिंह की तस्वीर, सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित होने के बाद बंद हुई वृद्धा पेंशन का मामला।

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ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट

फतेहपुर जिले से सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग महिला को सरकारी अभिलेखों में मृत दर्ज कर दिया गया, जबकि वह पूरी तरह जीवित हैं। इस चूक का सबसे बड़ा असर उनकी वृद्धावस्था पेंशन पर पड़ा, जो रिकॉर्ड में मृत घोषित किए जाने के बाद बंद कर दी गई। कई महीनों तक अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद जब उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आखिरकार वह समाधान दिवस में पहुंचीं और अधिकारियों के सामने भावुक होकर बोलीं, “साहब, मैं जिंदा हूं, मुझे कागजों में मत मारिए।”

यह मामला अब प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद जांच के दायरे में है और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

अमौली ब्लॉक के पनेरूवा गांव का मामला

जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला फतेहपुर जिले के अमौली ब्लॉक स्थित पनेरूवा गांव का है। गांव निवासी दिवंगत राधेलाल की पत्नी छोटकी सरकारी वृद्धावस्था पेंशन की पात्र लाभार्थी हैं। आरोप है कि ग्राम पंचायत स्तर पर हुई बड़ी लापरवाही या कथित हेराफेरी के चलते उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्शा दिया गया। इसके बाद उनकी पेंशन स्वतः बंद हो गई।

बुजुर्ग महिला का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी तब हुई, जब लंबे समय तक उनके खाते में पेंशन की राशि आनी बंद हो गई। जानकारी जुटाने पर पता चला कि सरकारी अभिलेखों में उनका नाम मृतक के रूप में दर्ज कर दिया गया है।

समाधान दिवस में पहुंचकर सुनाई आपबीती

शनिवार को बिंदकी तहसील परिसर में आयोजित समाधान दिवस के दौरान बुजुर्ग महिला हाथ में शिकायती पत्र लेकर अधिकारियों के सामने पहुंचीं। उन्होंने अपनी शिकायत सौंपते हुए पूरी घटना बताई। अपनी व्यथा सुनाते-सुनाते वह भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

महिला ने अधिकारियों से कहा कि वह जीवित हैं, लेकिन सरकारी कागजों में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस गलती की वजह से उनकी वृद्धावस्था पेंशन बंद हो गई और अब उन्हें अपनी पहचान तथा जीवित होने का प्रमाण देने के लिए लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद अधिकारी, कर्मचारी और अन्य फरियादी भी हैरान रह गए।

ग्राम पंचायत सचिव पर लगाए गंभीर आरोप

पीड़ित महिला ने अपनी शिकायत में ग्राम पंचायत सचिव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सचिव की लापरवाही या गलत रिपोर्ट के कारण उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित किया गया।

महिला का आरोप है कि इसी वजह से उनकी पेंशन रोक दी गई, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया। वृद्धावस्था में पेंशन ही उनके जीवन-यापन का मुख्य सहारा है और उसके बंद होने से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पहले भी लगा चुकी थीं अधिकारियों के चक्कर

बुजुर्ग महिला का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रखी हो। इससे पहले भी वह कई बार संबंधित कार्यालयों में जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा चुकी थीं। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया कि रिकॉर्ड में सुधार कर उनकी पेंशन दोबारा शुरू कराई जाए, लेकिन उनकी बात पर समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई।

लगातार अनसुनी होने के बाद उन्होंने समाधान दिवस का सहारा लिया, जहां उनकी शिकायत को गंभीरता से लिया गया।

प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश

मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीर मानते हुए तत्काल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। बिंदकी की उपजिलाधिकारी (एसडीएम) निशात तिवारी ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए पूरे प्रकरण की जांच अमौली ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को सौंप दी है।

एसडीएम ने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि आखिर किस स्तर पर महिला को मृत घोषित किया गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा जानबूझकर की गई गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सत्यापन प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

इस घटना ने सरकारी रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी भी व्यक्ति को मृत घोषित करने से पहले संबंधित विभागों द्वारा सत्यापन किया जाता है। ऐसे में यदि एक जीवित महिला को मृत घोषित कर दिया गया तो यह स्पष्ट करता है कि कहीं न कहीं सत्यापन प्रक्रिया में गंभीर चूक हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गलतियों का सबसे अधिक नुकसान उन गरीब और बुजुर्ग लोगों को उठाना पड़ता है, जो सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहते हैं।

पेंशन लाभार्थियों के लिए चेतावनी जैसा मामला

यह घटना उन सभी पेंशन लाभार्थियों के लिए भी एक चेतावनी है कि यदि लंबे समय तक उनके खाते में पेंशन नहीं आती है तो वे तुरंत संबंधित विभाग से संपर्क कर अपने रिकॉर्ड की जांच कराएं। कई बार तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटियों के कारण लाभार्थियों का नाम सूची से हट जाता है या रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज हो जाती है।

समय रहते शिकायत दर्ज कराने से ऐसी समस्याओं का समाधान अपेक्षाकृत जल्दी हो सकता है।

जांच रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई

फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करा दी है। अब सभी की नजर बीडीओ की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। उम्मीद की जा रही है कि जांच पूरी होने के बाद न केवल महिला का रिकॉर्ड दुरुस्त किया जाएगा, बल्कि उनकी रुकी हुई वृद्धावस्था पेंशन भी बहाल की जाएगी। साथ ही यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।

यह पूरा मामला सरकारी तंत्र में रिकॉर्ड के सही रखरखाव और समय पर सत्यापन की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करता है। एक छोटी सी प्रशासनिक गलती किसी बुजुर्ग व्यक्ति के सम्मान, पहचान और आजीविका पर कितना बड़ा असर डाल सकती है, यह घटना उसका जीवंत उदाहरण बन गई है।

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