ब्यूरो रिपोर्ट
बिलासपुर | छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता के प्रतीक भोजली पर्व को लेकर बिलासपुर के तोरवा क्षेत्र में उत्साह का माहौल बनना शुरू हो गया है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भोजली महोत्सव समिति, तोरवा द्वारा आयोजित किए जाने वाले 21वें भोजली महोत्सव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। महोत्सव को भव्य एवं सुव्यवस्थित रूप देने के उद्देश्य से समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आयोजन की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा करते हुए विभिन्न जिम्मेदारियां पदाधिकारियों एवं सदस्यों को सौंपी गईं।
बैठक की शुरुआत श्रद्धा और आस्था के साथ अरपा मैया की पूजा-अर्चना से हुई। समिति के सदस्यों ने प्रदेश की सुख-समृद्धि, समाज में भाईचारे तथा महोत्सव की सफलता की कामना करते हुए पूजा-अर्चना की। इसके बाद आयोजित बैठक में इस वर्ष के आयोजन को पहले से अधिक आकर्षक और जनसहभागिता से परिपूर्ण बनाने का संकल्प लिया गया।
29 अगस्त को होगा आयोजन
समिति के अध्यक्ष शंकर यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि 21वां भोजली महोत्सव 29 अगस्त 2026, शनिवार को दोपहर 12 बजे से आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन एवं भोजली विसर्जन तोरवा भोजली घाट, पटेल मोहल्ला, वार्ड क्रमांक-41, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में संपन्न होगा। उन्होंने कहा कि आयोजन की सभी तैयारियां समय पर पूरी करने के लिए समिति के सदस्य लगातार सक्रिय हैं।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का रहेगा प्रयास
अध्यक्ष शंकर यादव ने कहा कि भोजली पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति सम्मान का जीवंत प्रतीक है। बदलते दौर में युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष के महोत्सव में ऐसा वातावरण तैयार किया जाएगा, जिससे युवा वर्ग अपनी परंपराओं, लोकगीतों और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित हो सके।
उन्होंने कहा कि यदि समाज अपनी लोक परंपराओं को जीवित रखता है तो आने वाली पीढ़ियां भी अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व महसूस करेंगी। भोजली महोत्सव इसी सोच को आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम है।
प्रतिभागियों को मिलेगा नगद पुरस्कार
समिति ने बताया कि महोत्सव में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के लिए नगद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इससे महिलाओं, युवाओं और बच्चों सहित सभी आयु वर्ग के लोगों में सहभागिता बढ़ेगी। आयोजन में पारंपरिक भोजली गीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां तथा लोक परंपराओं से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
समिति का मानना है कि पुरस्कार वितरण से प्रतियोगी भावना के साथ-साथ लोक संस्कृति के संरक्षण को भी नई ऊर्जा मिलेगी। हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
बैठक में बनी आयोजन की रणनीति
बैठक के दौरान मंच व्यवस्था, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा, अतिथि स्वागत, साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, प्रचार-प्रसार और भोजली विसर्जन सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति के सभी सदस्यों ने अपने-अपने दायित्वों का जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन करने का संकल्प लिया, ताकि आयोजन पूरी गरिमा और अनुशासन के साथ संपन्न हो सके।
समिति ने यह भी निर्णय लिया कि आयोजन में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इसके माध्यम से शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को महोत्सव में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है भोजली
छत्तीसगढ़ में भोजली पर्व का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। यह पर्व प्रकृति, हरियाली, कृषि परंपरा और सामाजिक सौहार्द का संदेश देता है। विशेष रूप से महिलाएं और युवतियां भोजली की पूजा कर सुख-समृद्धि तथा अच्छी फसल की कामना करती हैं। पारंपरिक गीतों और सामूहिक आयोजनों के माध्यम से यह पर्व सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का कार्य करता है।
इसी सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से भोजली महोत्सव समिति वर्षों से लगातार इस आयोजन का सफल संचालन करती आ रही है। इस वर्ष आयोजित होने वाला 21वां भोजली महोत्सव भी इसी गौरवशाली परंपरा की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
ये रहे बैठक में उपस्थित
बैठक में समिति के संरक्षक श्री चंदन यादव, सलाहकार संजय सिंह ठाकुर, उपाध्यक्ष सुरेश दास मानिकपुरी, मीडिया प्रभारी बृजभूषण सरवन, सदस्य मनीष यादव, मनीष पटेल, सहसचिव गोपाल यादव, सदस्य कन्हैया पटेल, सह मीडिया प्रभारी पवन यादव, सदस्य जतिन विश्वकर्मा सहित भोजली महोत्सव समिति, तोरवा के सभी पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
जनसहभागिता से सफल होगा आयोजन
समिति ने बिलासपुर एवं आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में महोत्सव में शामिल होने की अपील की है। समिति का विश्वास है कि समाज के सहयोग और जनभागीदारी से इस वर्ष का 21वां भोजली महोत्सव न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से ऐतिहासिक होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करेगा। महोत्सव के माध्यम से लोक संस्कृति, सामाजिक समरसता और पारंपरिक मूल्यों का संदेश नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।













