फर्जी साधु का काला चेहरा : इंजीनियर से बना ‘नारायण दास’, प्रवचन की आड़ में युवतियों को फंसाकर करता था ब्लैकमेल
20 लाख सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर बना कथित संत, नशीला पदार्थ देकर शोषण और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप
ठाकुर के. के. सिंह की रिपोर्ट
मथुरा। धर्मनगरी मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र से सामने आया एक सनसनीखेज मथुरा फर्जी साधु मामला . लोगों की आस्था को झकझोर देने वाला है। खुद को संत और आध्यात्मिक गुरु बताने वाला एक व्यक्ति दरअसल इंजीनियर निकला, जिसने कथित तौर पर साधु का चोला ओढ़कर युवतियों को अपने जाल में फंसाया, नशीला पदार्थ देकर उनका शोषण किया और फिर वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने लगा। पुलिस की कार्रवाई के बाद आरोपी की असलियत सामने आई तो इलाके में हड़कंप मच गया।
उत्तर प्रदेश के धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने संत समाज, श्रद्धालुओं और आम जनता को झकझोर कर रख दिया है। खुद को साधु और आध्यात्मिक गुरु बताने वाला एक व्यक्ति दरअसल इंजीनियर निकला, जिसने अपनी पहचान बदलकर वर्षों तक लोगों की आस्था का फायदा उठाया। आरोप है कि उसने धार्मिक प्रवचनों और आध्यात्मिक प्रभाव का इस्तेमाल कर युवतियों को अपने जाल में फंसाया, उन्हें नशीला पदार्थ देकर शोषण किया और बाद में वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर लाखों रुपये की मांग करता था।
पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों ने यह स्पष्ट कर दिया कि धार्मिक चोला ओढ़कर लोगों को प्रभावित करने वाला यह व्यक्ति कथित रूप से एक सुनियोजित अपराधी की तरह काम कर रहा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर बना कथित संत
जानकारी के अनुसार आरोपी का वास्तविक नाम अभिषेक मिश्रा बताया जा रहा है। वह रुड़की स्थित एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने लगभग 20 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी भी की। लेकिन कुछ वर्षों बाद उसने नौकरी छोड़ दी और मथुरा पहुंच गया। यहां उसने अपनी नई पहचान ‘नारायण दास’ के रूप में स्थापित की। उसने गोवर्धन क्षेत्र में एक मकान खरीदा और उसे आश्रम का स्वरूप दे दिया। धीरे-धीरे उसने धार्मिक गतिविधियां शुरू कीं और प्रवचन देने लगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार वह धार्मिक भाषा, शास्त्रों की जानकारी और प्रभावशाली बोलचाल के कारण लोगों का विश्वास आसानी से जीत लेता था। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी वह प्रवचन प्रसारित करता था, जिससे उसके अनुयायियों की संख्या बढ़ती चली गई।
गोवर्धन परिक्रमा और प्रवचनों से बनाई पहचान
बताया जा रहा है कि आरोपी नियमित रूप से गोवर्धन परिक्रमा करता था और खुद को एक समर्पित साधु के रूप में प्रस्तुत करता था। माथे पर विशेष तिलक लगाकर वह गौड़ संप्रदाय से जुड़े संत जैसा स्वरूप धारण करता था।
धार्मिक आयोजनों, कथा-प्रवचनों और आध्यात्मिक बैठकों में उसकी सक्रिय मौजूदगी के कारण बड़ी संख्या में लोग उससे प्रभावित होने लगे। कई श्रद्धालु उसे आध्यात्मिक मार्गदर्शक मानने लगे थे। इसी धार्मिक छवि का फायदा उठाकर वह कथित तौर पर युवतियों और महिलाओं तक पहुंच बनाता था। पुलिस का मानना है कि उसने अपनी बनाई हुई प्रतिष्ठा का इस्तेमाल अपराधों को अंजाम देने के लिए किया।
युवतियों को फंसाने का आरोप
जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया, धार्मिक संपर्कों और व्यक्तिगत मुलाकातों के जरिए युवतियों से संपर्क स्थापित करता था। धीरे-धीरे वह विश्वास का माहौल बनाता और फिर उन्हें अपने आश्रम या निवास स्थान पर बुलाता था। आरोप है कि कई युवतियों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन, ध्यान और विशेष पूजा-पाठ के नाम पर बुलाया जाता था। इसके बाद उन्हें नशीले पदार्थ दिए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी नशे की हालत में पीड़िताओं का शोषण करता था और बाद में वीडियो या अन्य डिजिटल सामग्री के आधार पर उन्हें ब्लैकमेल करता था। इसी डर के कारण कई पीड़िताएं लंबे समय तक सामने नहीं आ सकीं।
नर्सिंग छात्रा की शिकायत से खुला मामला
पूरा मामला तब उजागर हुआ जब एक नर्सिंग छात्रा ने आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। बताया गया कि छात्रा मूल रूप से छत्तीसगढ़ की रहने वाली है। आरोप है कि आरोपी ने उसे अपने घर बुलाया और दूध में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पीड़िता का यह भी आरोप है कि आरोपी ने घटना का वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया और पांच लाख रुपये की मांग की।
मानसिक तनाव और भय के बीच छात्रा अपने घर लौट गई। वहां उसने अपनी बहन को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिवार ने कानूनी कार्रवाई का फैसला किया।
बहन की सक्रियता से पुलिस तक पहुंचा मामला
पीड़िता की बहन मथुरा पहुंची और स्थानीय पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और आरोपी की गतिविधियों पर निगरानी शुरू कर दी। जब पुलिस आरोपी को पकड़ने पहुंची तो शुरुआती दौर में कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया। वजह यह थी कि बड़ी संख्या में लोग उसे एक धार्मिक व्यक्ति और संत के रूप में देखते थे।
हालांकि जैसे-जैसे पुलिस जांच में तथ्य सामने आने लगे और आरोपी के खिलाफ आरोपों की जानकारी लोगों तक पहुंची, स्थिति बदल गई। स्थानीय लोगों को एहसास हुआ कि जिस व्यक्ति को वे संत समझ रहे थे, उसके खिलाफ गंभीर आपराधिक आरोप हैं।
पुलिस जांच में जुटी, अन्य पीड़िताओं की तलाश
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या आरोपी ने इसी तरह अन्य महिलाओं या युवतियों को भी अपना शिकार बनाया था। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मोबाइल फोन, लैपटॉप और सोशल मीडिया खातों की जांच की जा रही है।
साइबर विशेषज्ञ यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि कहीं आरोपी ने किसी डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से अन्य लोगों को भी प्रभावित तो नहीं किया। यदि जांच में और पीड़िताएं सामने आती हैं तो मामला और गंभीर हो सकता है। जांच एजेंसियां आरोपी के बैंक खातों, आर्थिक लेन-देन और संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही हैं ताकि यह समझा जा सके कि कथित ब्लैकमेलिंग से कितनी धनराशि अर्जित की गई।
संत समाज की छवि को लगा झटका
इस घटना ने वास्तविक संत समाज और धार्मिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कई संतों और धार्मिक संगठनों ने ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, जो साधु-संतों का वेश धारण कर समाज में अपराध करते हैं। धार्मिक संगठनों का कहना है कि ऐसे मामलों से लाखों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं और वास्तविक संतों की छवि भी प्रभावित होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी धार्मिक या आध्यात्मिक व्यक्ति पर आंख बंद करके विश्वास करने के बजाय लोगों को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देनी चाहिए।
समाज के लिए बड़ा सबक
गोवर्धन का यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है। आधुनिक तकनीक, सोशल मीडिया और धार्मिक प्रभाव का मिश्रण यदि गलत हाथों में चला जाए तो वह लोगों की भावनाओं और विश्वास का दुरुपयोग कर सकता है।
आस्था भारतीय समाज की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है, लेकिन इसी आस्था का फायदा उठाने वाले तत्व समय-समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसे में लोगों को सजग रहने, सत्यापन करने और किसी भी व्यक्ति की वास्तविक पृष्ठभूमि जानने की आवश्यकता है।
मथुरा पुलिस की कार्रवाई ने फिलहाल एक कथित फर्जी साधु के चेहरे से नकाब हटा दिया है, लेकिन जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और अपराध की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।








