नयना कुशवाहा की रिपोर्ट
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 30 सितंबर 2026 को कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर देखने को मिला, जब आईसीएआर-सीआईएई परिसर में दिल्ली प्रैस की कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ की ओर से राज्य स्तरीय फार्म एन फूड कृषि सम्मान अवार्ड समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 300 से अधिक किसान, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रतिनिधि, एफपीओ से जुड़े पदाधिकारी तथा सरकारी और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए।
समारोह में खेती के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर नवाचार, आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, फसल विविधीकरण, बागवानी, डेयरी, पशुपालन, मशीनीकरण, कृषि विपणन और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले किसानों और संस्थानों को सम्मानित किया गया। अलग-अलग श्रेणियों में करीब 40 किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन यानी एफपीओ और कृषि विज्ञान केंद्रों को राज्य स्तरीय फार्म एन फूड कृषि सम्मान अवार्ड प्रदान किया गया।
इस आयोजन की खास बात यह रही कि सम्मान केवल उत्पादन बढ़ाने वाले किसानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेती में नई सोच और नई तकनीक अपनाने वाले किसानों के साथ उन कृषि वैज्ञानिकों और संस्थानों को भी मंच दिया गया, जो किसानों तक नई तकनीक और वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
किसान केवल उत्पादक नहीं, कृषि उद्यमी भी बने
कार्यक्रम की शुरुआत में दिल्ली प्रैस के संपादक और प्रकाशक परेश नाथ ने किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि खेती को केवल परंपरागत पेशा मानकर नहीं, बल्कि उद्योग की तरह समझकर आगे बढ़ने की जरूरत है। उनका कहना था कि कृषि के बिना कोई भी समाज या देश आगे नहीं बढ़ सकता, लेकिन इसके बावजूद किसान को उसकी मेहनत का पूरा मूल्य नहीं मिल पाता।
उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे केवल कच्चा माल बेचने तक सीमित न रहें, बल्कि फूड प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन पर भी ध्यान दें। किसान यदि अपनी उपज को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार कर सके और उसका प्रसंस्करण करे, तो उसे अपनी मेहनत का बेहतर मूल्य मिल सकता है।
परेश नाथ के इस विचार में कृषि क्षेत्र के सामने मौजूद एक बड़ी चुनौती भी दिखाई देती है। खेत में पैदा होने वाली उपज का अंतिम बाजार मूल्य और किसान को मिलने वाली कीमत के बीच बड़ा अंतर अक्सर चर्चा का विषय रहता है। ऐसे में खेती के साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से सीधा जुड़ाव किसान की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
समय पर खेती और तकनीक से बढ़ता उत्पादन
समारोह के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश के उद्यान विज्ञान एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि फसल की समय पर बुवाई और उत्पादन की वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाने से उत्पादन बढ़ता है। इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और किसानों को बाजार में अच्छी कीमत मिलने की संभावना भी बढ़ती है।
उन्होंने मध्य प्रदेश के किसानों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में कृषि का रकबा बढ़ा है और मसाला उत्पादन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि फल उत्पादन में प्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है और 12 फसलों को जीआई टैग प्राप्त हुआ है।
मंत्री के संबोधन में खेती को केवल खेत तक सीमित रखने के बजाय उसे उत्पादन, गुणवत्ता और बाजार से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिखाई दिया। आज के दौर में किसान के लिए केवल अधिक उत्पादन करना ही पर्याप्त नहीं है। उसे यह भी समझना होगा कि कौन-सी फसल की बाजार में मांग है, उसकी गुणवत्ता किस तरह बेहतर की जा सकती है और उपज को किस तरह बेहतर मूल्य पर बेचा जा सकता है।
किसान की पहचान उसकी सीखने की क्षमता से भी
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मध्य प्रदेश सरकार में कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और किसान लगातार सीखने वाला व्यक्ति है। किसान नई तकनीक अपनाता है, प्रयोग करता है और खेती में नवाचार करता है।
उन्होंने कहा कि किसानों को आवश्यक खाद और दूसरी सुविधाएं समय पर उपलब्ध हों तो कृषि क्षेत्र में और बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
कृषि क्षेत्र में बदलते समय के साथ किसान की भूमिका भी तेजी से बदल रही है। पहले जहां खेती मुख्य रूप से अनुभव और पारंपरिक ज्ञान पर निर्भर थी, वहीं अब मौसम की जानकारी, आधुनिक कृषि मशीनरी, उन्नत बीज, सिंचाई तकनीक, ड्रोन, डिजिटल बाजार, फसल प्रसंस्करण और वैज्ञानिक सलाह खेती का हिस्सा बन रहे हैं। ऐसे में किसान का लगातार सीखते रहना उसकी सफलता का महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है।
कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने बढ़ाया किसानों का उत्साह
समारोह में उद्यान विज्ञान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर दीनानाथ धाते, आईएएस उमाशंकर भार्गव, कृषि विभाग के डायरेक्टर, डा. सीआर मेहता, डायरेक्टर आईसीएआर-सीआईएई, डा. सत्यप्रकाश, सीनियर साइंटिस्ट एवं भोपाल केवीके हेड, तथा कृषि विभाग भोपाल की ज्वाइंट डायरेक्टर सुमन प्रसाद सहित अनेक अधिकारी और कृषि विशेषज्ञ मौजूद रहे।
इन अधिकारियों और वैज्ञानिकों की मौजूदगी ने यह संदेश भी दिया कि किसान की सफलता केवल खेत में उसके व्यक्तिगत प्रयास का परिणाम नहीं है। इसके पीछे कृषि अनुसंधान, वैज्ञानिक मार्गदर्शन, सरकारी योजनाएं, कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका और बाजार तक पहुंच जैसे कई पहलू जुड़े होते हैं।
100 से अधिक नामांकन में से चुने गए विजेता
फार्म एन फूड कृषि सम्मान अवार्ड के लिए मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से 100 से अधिक नामांकन प्राप्त हुए थे। इन नामांकनों के साथ कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि संस्थानों की संस्तुति भी शामिल थी।
प्राप्त नामांकनों का मूल्यांकन चार सदस्यीय जूरी ने किया। अलग-अलग श्रेणियों में प्राप्त नामांकनों का परीक्षण करने के बाद सर्वश्रेष्ठ नामांकनों का चयन पुरस्कार के लिए किया गया।
इस प्रक्रिया से यह स्पष्ट हुआ कि पुरस्कार का उद्देश्य केवल किसानों को मंच पर सम्मानित करना नहीं था, बल्कि खेती में किए जा रहे ऐसे प्रयोगों और प्रयासों को पहचान देना भी था, जो दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।
मध्य प्रदेश के किसानों ने अलग-अलग क्षेत्रों में बनाई पहचान
मध्य प्रदेश के बैतूल के जयराम गायकवाड़ को ऑर्गेनिक/नेचुरल फार्मिंग में बेस्ट फार्मर अवार्ड से सम्मानित किया गया। इंदौर के लाखन सिंह गेहलोत को फील्ड क्रॉप्स श्रेणी में बेस्ट फार्मर अवार्ड मिला।
खरगोन की गोगावां एफपीसीएल और निमाड़ फ्रैश कृषि विकास एफपीसीएल को बेस्ट एफपीओ अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान इस बात का संकेत है कि किसानों का सामूहिक संगठन और बाजार से जुड़ाव कृषि क्षेत्र में तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
बुरहानपुर के तौसीफ अली को बेस्ट डेयरी/एनिमल कीपर अवार्ड और देवेन शर्मा को वाटरमेलन फार्मिंग में बेस्ट फार्मर अवार्ड दिया गया। भिंड के सुगम कुशवाह और भोपाल के श्याम सिंह कुशवाह को इंटीग्रेटेड फार्मिंग के लिए सम्मानित किया गया।
भोपाल के अशोक मीना को नेचुरल फार्मिंग, रतलाम के अरविंद धाकड़ को हाईटेक फार्मिंग और ग्वालियर के ब्रजेंद्र सिंह रावत को मार्केटिंग के क्षेत्र में सम्मान मिला।
बड़वानी के शिवम मुकाती को बेस्ट यंग फार्मर और खरगोन के मोहन सिंह सिसोदिया को इनोवेटिव फार्मिंग के लिए पुरस्कार दिया गया।
रतलाम के कालूखेड़ा से ईश्वर लाल पाटीदार को बेस्ट विलेज टूरिज्म अवार्ड मिला। मुरैना के हृदेश त्यागी को शुगरकेन फार्मिंग, धार की दुर्गा बाई को फीमेल फार्मर और भोपाल के उमेश सिंह को पोल्ट्री/हैचरी श्रेणी में सम्मानित किया गया।
बागवानी से लेकर कृषि मशीनीकरण तक मिला सम्मान
नर्मदापुरम के अमित चौधरी, ग्वालियर के सरमन सिंह कुशवाहा, सागर के रामेश्वर पटेल, गुना के काशीराम और अशोक नगर के उत्तम सिंह कुशवाह को हॉर्टिकल्चर के क्षेत्र में सम्मानित किया गया।
भोपाल के हेमराज यादव को मशीनीकरण के लिए बेस्ट फार्मर अवार्ड दिया गया। सतना के सचिन तुलसा त्रिपाठी को एग्रीकल्चर जर्नलिस्ट अवार्ड मिला।
कृषि विज्ञान केंद्र धार और कृषि विज्ञान केंद्र बैतूल को बेस्ट केवीके अवार्ड से सम्मानित किया गया। खरगोन के डा. राजीव कुमार सिंह को एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन में बेस्ट रिसर्च अवार्ड, भोपाल के डा. रंजय कुमार सिंह को फार्मिंग सिस्टम में बेस्ट रिसर्च अवार्ड तथा भोपाल के डा. देवेश कुमार पांडेय को बेस्ट यंग साइंटिस्ट अवार्ड प्रदान किया गया।
रतलाम के डोडियार के नरसिंह को गेहूं उत्पादन और मध्य प्रदेश के अमोल खरोड़े को दलहन उत्पादन में बेस्ट फार्मर अवार्ड से सम्मानित किया गया।
इन पुरस्कारों की श्रेणियों पर नजर डालें तो साफ दिखाई देता है कि आज कृषि की दुनिया केवल गेहूं, धान या सोयाबीन के उत्पादन तक सीमित नहीं है। बागवानी, प्राकृतिक खेती, पशुपालन, पोल्ट्री, मशीनीकरण, कृषि विपणन, प्रसंस्करण और कृषि पर्यटन भी किसान की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से बन रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के किसानों और वैज्ञानिकों को भी सम्मान
समारोह में छत्तीसगढ़ के किसानों और कृषि संस्थानों को भी सम्मानित किया गया। सरगुजा की सुरबिल दास को बेस्ट फीमेल फार्मर अवार्ड और बलौदा बाजार-भाटापारा की रजनी बाई निषाद को फील्ड क्रॉप्स में बेस्ट फीमेल फार्मर अवार्ड दिया गया।
सरगुजा के कृषि विज्ञान केंद्र को बेस्ट केवीके अवार्ड मिला। बलौदा बाजार के नोहर लाल चंद्राकर को इंटीग्रेटेड फार्मिंग के लिए सम्मानित किया गया।
दुर्ग के चंद्रशेखर वर्मा को बेस्ट यंग फार्मर अवार्ड, भाटापारा के डा. अंगद सिंह राजपूत को फार्मिंग सिस्टम में बेस्ट रिसर्च अवार्ड और सरगुजा के अंबिकेश्वर राजवाड़े को बेस्ट बी कीपर अवार्ड प्रदान किया गया।
छत्तीसगढ़ के इन पुरस्कारों में महिला किसानों, युवा किसानों, मधुमक्खी पालन, एकीकृत खेती और कृषि अनुसंधान जैसे क्षेत्र शामिल रहे। इससे कृषि की बदलती तस्वीर का एक व्यापक स्वरूप सामने आया।
महिला और युवा किसान भी बदल रहे कृषि की दिशा
इस सम्मान समारोह की एक महत्वपूर्ण विशेषता महिला और युवा किसानों को मिली पहचान रही। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में महिला किसानों को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया गया। वहीं युवा किसानों को भी अलग से पुरस्कार दिए गए।
कृषि में युवाओं की भागीदारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई पीढ़ी खेती को आधुनिक तकनीक, डिजिटल साधनों और बाजार की नई समझ के साथ देख रही है। इसी तरह महिला किसान लंबे समय से कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं, लेकिन उन्हें किसान के रूप में सार्वजनिक पहचान अक्सर कम मिलती है। ऐसे सम्मान उनके योगदान को सामने लाने का माध्यम बन सकते हैं।
खेती का भविष्य नवाचार और मूल्य संवर्धन में
फार्म एन फूड कृषि सम्मान अवार्ड समारोह का व्यापक संदेश यही रहा कि आने वाली कृषि केवल अधिक उत्पादन की कृषि नहीं होगी। इसमें उत्पादन के साथ गुणवत्ता, तकनीक, बाजार, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन की भूमिका बढ़ेगी।
यदि किसान अपनी उपज का बेहतर प्रसंस्करण कर सके, बाजार की मांग समझ सके और संगठित होकर बिक्री कर सके तो खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। एफपीओ इस दिशा में किसानों को सामूहिक शक्ति देने का माध्यम बन सकते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि वैज्ञानिक किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किसान, वैज्ञानिक, कृषि संस्थान और बाजार के बीच बेहतर तालमेल कृषि क्षेत्र को नई दिशा दे सकता है।
किसानों के साथ दिल्ली प्रैस के एजेंट भी हुए सम्मानित
समारोह में केवल किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को ही सम्मान नहीं दिया गया। दिल्ली प्रैस ने मध्य प्रदेश में अपने कई एजेंटों को भी मंच पर सम्मानित किया।
कार्यक्रम के अंत में आमंत्रित मेहमानों को गुडी बैग दिए गए और लंच की व्यवस्था की गई। इस तरह सम्मान समारोह में कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों के साथ आयोजन से जुड़े सहयोगियों और एजेंटों को भी मंच पर पहचान दी गई।
यह पूरा आयोजन स्टील इंडिया, भारत ऑर्गेनिक्स और ज्ञानधारा के सहयोग से आयोजित किया गया।
सम्मान से आगे बढ़कर प्रेरणा का मंच
भोपाल में आयोजित यह समारोह केवल पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम नहीं रहा। अलग-अलग जिलों से आए किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और संस्थानों ने एक-दूसरे के अनुभवों को जाना और खेती के बदलते स्वरूप को करीब से देखा।
एक तरफ प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसान सम्मानित हुए तो दूसरी ओर हाईटेक फार्मिंग और मशीनीकरण को अपनाने वाले किसानों को भी मंच मिला। कहीं बागवानी ने पहचान बनाई तो कहीं पशुपालन, पोल्ट्री, मधुमक्खी पालन और जल तरबूज जैसी विशिष्ट खेती ने पुरस्कार हासिल किया।
इस विविधता में भारतीय कृषि की वास्तविक तस्वीर दिखाई देती है। खेत अलग हैं, मिट्टी अलग है, फसलें अलग हैं और किसानों की चुनौतियां भी अलग हैं, लेकिन बेहतर उत्पादन, उचित मूल्य और सम्मानजनक आय की जरूरत लगभग हर किसान की समान है।
फार्म एन फूड कृषि सम्मान अवार्ड ने ऐसे किसानों और कृषि संस्थानों को सामने लाने का प्रयास किया, जिन्होंने अपनी मेहनत के साथ नवाचार और नई सोच को जोड़ा है। यही प्रयोग यदि दूसरे किसानों तक पहुंचते हैं तो कृषि क्षेत्र में बदलाव केवल पुरस्कार पाने वाले खेतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांवों और खेतों की बड़ी दुनिया तक पहुंच सकता है।
भोपाल के आईसीएआर-सीआईएई में आयोजित यह समारोह इस मायने में महत्वपूर्ण रहा कि यहां किसान को केवल अन्नदाता के रूप में नहीं, बल्कि नवाचार करने वाले उत्पादक, कृषि उद्यमी और बदलती ग्रामीण अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखने की जरूरत पर जोर दिया गया। आने वाले समय में खेती की सफलता इस बात से भी तय होगी कि किसान कितनी तेजी से बदलती तकनीक, बाजार और प्रसंस्करण की संभावनाओं को अपने खेत और कारोबार से जोड़ पाता है।













