ब्यूरो रिपोर्ट
विश्व हृदय दिवस के अवसर पर नन्हें हृदयरोगी बच्चों के साथ आत्मीयता, स्नेह और संवेदनाओं से भरा एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। रायपुर स्थित प्रत्युषा फाउंडेशन की ओर से नया रायपुर स्थित सत्य साईं हॉस्पिटल में आयोजित ‘नव्य हृदयस्पर्शी’ कार्यक्रम में हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे बच्चों से मुलाकात की गई और उनके स्वस्थ जीवन की कामना के साथ उन्हें उपयोगी उपहार एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल बच्चों को उपहार देना नहीं, बल्कि बीमारी और उपचार के कठिन दौर से गुजर रहे नन्हे मरीजों के भीतर सकारात्मकता, आत्मविश्वास और अपनत्व की भावना पैदा करना भी रहा। अस्पताल में उपचार करा रहे बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच पहुंचकर संस्था की टीम ने उनके साथ समय बिताया, बच्चों से बातचीत की और उनके अनुभवों को साझा किया।
निःशुल्क उपचार से मिल रही बच्चों को नई जिंदगी
प्रत्युषा फाउंडेशन की संस्थापिका प्रीति दास मिश्रा ने बताया कि सत्य साईं हॉस्पिटल, नया रायपुर में एक वर्ष से लेकर दस वर्ष तक की आयु के बच्चों के हृदय संबंधी विभिन्न रोगों का उपचार पूरी तरह निःशुल्क किया जाता है। ऐसे परिवारों के लिए यह पहल बेहद महत्वपूर्ण है, जिनके लिए बच्चों के हृदय रोग का महंगा उपचार कराना कठिन होता है।
उन्होंने कहा कि किसी बच्चे का सफल उपचार केवल चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी होने तक सीमित नहीं है। ऑपरेशन के बाद बच्चे के घर लौटने पर उसके स्वस्थ और सामान्य जीवन की शुरुआत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसी सोच के साथ अस्पताल में स्वस्थ होकर घर लौटने वाले बच्चों के लिए ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ जैसी पहल की जाती है।
इस पहल के तहत बच्चों को प्रमाणपत्र के साथ ऐसी उपयोगी वस्तुएं दी जाती हैं, जिनका वे अपने दैनिक जीवन में इस्तेमाल कर सकें। इससे बच्चों के चेहरे पर खुशी आती है और उनके परिवारों को भी यह एहसास होता है कि समाज उनके साथ खड़ा है।
बच्चों को प्रमाणपत्र के साथ उपयोगी सामग्री भेंट
‘नव्य हृदयस्पर्शी’ कार्यक्रम के दौरान प्रत्युषा फाउंडेशन की ओर से बच्चों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इसके साथ ही उन्हें टिफिन डिब्बे, टिफिन बैग, खाद्य सामग्री, कपड़े और जूते सहित विभिन्न उपयोगी वस्तुएं उपहार स्वरूप दी गईं।
कार्यक्रम में मौजूद बच्चों ने जब अपने लिए लाए गए उपहार देखे तो उनके चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। कई बच्चों ने संस्था के सदस्यों से बातचीत की और उनके साथ सहजता से समय बिताया। अस्पताल के वातावरण में बच्चों की यह मुस्कान कार्यक्रम की सबसे भावुक और यादगार तस्वीर बन गई।
संस्था की ओर से कहा गया कि बच्चों को केवल बीमारी के नजरिए से देखने के बजाय उन्हें सामान्य बच्चों की तरह स्नेह, विश्वास और प्रोत्साहन देना जरूरी है। इससे उनके मन में बीमारी को लेकर डर कम होता है और वे उपचार के बाद सामान्य जीवन की ओर सकारात्मक तरीके से बढ़ पाते हैं।
घर लौटने के बाद अभिभावकों की भूमिका अहम
कार्यक्रम के दौरान प्रीति दास मिश्रा ने बच्चों के अभिभावकों से भी विशेष आग्रह किया कि ऑपरेशन के बाद घर लौटने वाले बच्चों का विशेष ध्यान रखें, लेकिन उनके साथ जरूरत से अधिक लाड़-प्यार करते हुए उनकी हर जिद पूरी न करें।
उन्होंने कहा कि बीमारी और ऑपरेशन के बाद बच्चे के प्रति परिवार का व्यवहार संवेदनशील जरूर होना चाहिए, लेकिन उसे ऐसा महसूस नहीं कराया जाना चाहिए कि वह परिवार के दूसरे सदस्यों से अलग है। बच्चे के साथ सामान्य और सहज व्यवहार किया जाए, जैसा घर के अन्य सदस्यों के साथ किया जाता है।
उन्होंने अभिभावकों से कहा कि यदि बच्चा किसी बात के लिए जिद करता है तो उसकी हर जिद पूरी करने के बजाय उसे प्यार से समझाया जाए। बच्चों को माता-पिता की बात मानने, नियमित रूप से स्कूल जाने, मन लगाकर पढ़ाई करने और अनुशासन के साथ जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
जंक फूड और मोबाइल से दूरी की दी सलाह
कार्यक्रम में बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया। संस्था की ओर से बच्चों को जंक फूड से बचने, घर का पौष्टिक भोजन लेने और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी गई।
इसके साथ ही बच्चों को ज्यादा समय तक टीवी देखने और मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से बचने के लिए कहा गया। संस्था का कहना था कि स्वस्थ होने के बाद बच्चों को धीरे-धीरे सामान्य दिनचर्या में लौटना चाहिए और पढ़ाई, खेल तथा परिवार के साथ समय बिताने जैसी सकारात्मक गतिविधियों को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
अभिभावकों को भी समझाया गया कि बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर डॉक्टरों की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है। उपचार के बाद नियमित देखभाल और चिकित्सकीय निर्देशों का पालन बच्चे के स्वस्थ भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
ऑपरेशन से पहले और बाद के बच्चों से हुई मुलाकात
‘नव्य हृदयस्पर्शी’ कार्यक्रम की खास बात यह रही कि संस्था की टीम ने केवल ऑपरेशन के बाद स्वस्थ होकर घर जाने वाले बच्चों से ही मुलाकात नहीं की, बल्कि ऐसे बच्चों से भी बातचीत की जिनका ऑपरेशन होना अभी बाकी है।
ऑपरेशन से पहले उपचार की प्रक्रिया से गुजर रहे बच्चों से मुलाकात कर उनका मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया गया। वहीं ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे बच्चों के साथ बातचीत कर उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
इस दौरान सभी बच्चों को उपहार स्वरूप सामग्री प्रदान की गई। बच्चों ने भी बड़ी आत्मीयता के साथ संस्था के सदस्यों से मुलाकात की और उनसे बातचीत की। कुछ बच्चों ने अपने मन की बातें भी साझा कीं।
विदाई के समय भावुक हुआ माहौल
कार्यक्रम के अंत में विदाई का समय बेहद भावुक कर देने वाला रहा। बच्चों और संस्था की टीम के बीच थोड़े समय में ही ऐसा आत्मीय संबंध बन गया कि एक बच्चा संस्था की सांस्कृतिक उपाध्यक्ष अर्चना वोरा के साथ जाने की जिद करने लगा।
बच्चे का यह मासूम आग्रह वहां मौजूद सभी लोगों के लिए भावुक कर देने वाला था। कुछ समय पहले तक अस्पताल में उपचार और बीमारी के बीच रहने वाला यह बच्चा जब अपनत्व के कारण किसी के साथ जाने की जिद करने लगा तो वहां मौजूद लोगों की आंखों में भी भावनाएं उमड़ आईं।
कार्यक्रम से जुड़े लोगों का कहना था कि बच्चों के साथ बिताया गया यह समय उनके लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा, जितना बच्चों के लिए। किसी बीमार बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाना और उसके मन में अपनापन पैदा करना ही ऐसे आयोजनों की वास्तविक सफलता है।
पुष्करणा महिला मंडल का भी मिला सहयोग
कार्यक्रम को सफल बनाने में पुष्करणा महिला मंडल का भी सहयोग रहा। संस्था से जुड़े सदस्यों ने बच्चों के लिए आवश्यक सामग्री जुटाने और कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग किया।
कार्यक्रम में प्रत्युषा फाउंडेशन की संस्थापिका प्रीति दास मिश्रा, सांस्कृतिक उपाध्यक्ष अर्चना वोरा, मीनू व्यास, सुमन हर्ष, अनुराधा व्यास, शीतल व्यास, मंजूषा संत सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
विश्व हृदय दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि हृदय रोग से जूझ रहे बच्चों को केवल चिकित्सा की ही नहीं, बल्कि समाज के स्नेह, सहयोग और विश्वास की भी जरूरत होती है। जब उपचार के साथ संवेदनाएं जुड़ती हैं तो बच्चे बीमारी की कठिन परिस्थिति से निकलकर आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। प्रत्युषा फाउंडेशन का यह प्रयास इसी मानवीय सोच को आगे बढ़ाने की एक पहल के रूप में सामने आया।













