16 अक्टूबर 2026 6:01 अपराह्न

मूल गर्भगृह स्थल पर मंदिर निर्माण की मांग को मिला समर्थन, पंडित प्रदीप मिश्रा से महेंद्र प्रताप की विशेष मुलाकात

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण को लेकर पंडित प्रदीप मिश्रा से मुलाकात करते महेंद्र प्रताप सिंह, साथ में रिपोर्टर ठाकुर बख्श सिंह की तस्वीर

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ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट

मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह परिसर से जुड़ा विवाद एक बार फिर धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक दावों और न्यायिक प्रक्रिया के केंद्र में है। इसी क्रम में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एवं हिंदू पक्षकार अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने गुरुवार को कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा से मुलाकात की। दोनों के बीच हुई करीब 30 मिनट की बातचीत में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के इतिहास, कथित मूल गर्भगृह स्थल, न्यायालय में चल रहे मुकदमों तथा हिंदू पक्ष की ओर से प्रस्तुत किए जा रहे ऐतिहासिक दस्तावेजों और साक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुलाकात के दौरान महेंद्र प्रताप सिंह ने पंडित प्रदीप मिश्रा का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। उन्होंने भगवान राधा-कृष्ण की छवि और श्रीमद्भगवद्गीता भी भेंट की। बातचीत के दौरान जन्मभूमि से संबंधित कानूनी मामलों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ इस विषय को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ।

न्यायालय में विचाराधीन है श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद

श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह से संबंधित कई वाद न्यायालयों में विचाराधीन हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के उपलब्ध न्यायिक अभिलेखों में इस विवाद से जुड़े विभिन्न वादों और 1968 के समझौते सहित पुराने मुकदमों का उल्लेख मिलता है। एक मामले में न्यायालय के समक्ष 1967 में दाखिल वाद और उसके बाद हुए समझौते तथा 1973 में समझौते के आधार पर पारित डिक्री का विवरण भी दर्ज है।

मामले की वर्तमान कानूनी स्थिति भी लगातार न्यायिक कार्यवाही के अधीन है। सितंबर 2026 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस विवाद से जुड़े मामलों में आदेश और कार्यवाही दर्ज होती रही है, जबकि हाल में सर्वोच्च न्यायालय में भी इससे संबंधित कार्यवाही की खबर सामने आई है। 30 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय में ‘श्री कृष्ण विराजमान’ की ओर से पैरवी को लेकर अलग-अलग हिंदू पक्षों के बीच मतभेद का मुद्दा सामने आया और सुनवाई आगे की तारीख के लिए टाली गई।

ऐसे में इस पूरे विवाद से जुड़े दावों का अंतिम निर्धारण न्यायालयीन प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना है।

महेंद्र प्रताप ने रखे हिंदू पक्ष के दावे

मुलाकात के दौरान महेंद्र प्रताप सिंह ने पंडित प्रदीप मिश्रा को हिंदू पक्ष की ओर से प्रस्तुत किए जा रहे दावों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मंदिर अलग-अलग ऐतिहासिक कालखंडों में क्षतिग्रस्त किए जाने का दावा हिंदू पक्ष की ओर से किया जाता रहा है।

उन्होंने विशेष रूप से वर्ष 1670 का उल्लेख करते हुए कहा कि मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में मंदिर को ध्वस्त किया गया और हिंदू पक्ष के अनुसार मूल गर्भगृह स्थल पर ईदगाह का निर्माण कराया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस समय भगवान के विग्रहों को आगरा ले जाया गया और उन्हें जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगाए जाने की बात ऐतिहासिक स्रोतों में मिलती है।

इन ऐतिहासिक दावों को लेकर अलग-अलग स्रोतों और इतिहासकारों की व्याख्याएं मौजूद रही हैं। इसलिए इन्हें वर्तमान न्यायिक विवाद में हिंदू पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे दावे और साक्ष्य के रूप में देखना अधिक उपयुक्त है, न कि न्यायालय द्वारा अंतिम रूप से स्थापित तथ्य के रूप में।

देश-विदेश से जुटाए गए दस्तावेजों का हवाला

महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मूल गर्भगृह स्थल पर मंदिर निर्माण और आगरा से भगवान के विग्रह वापस लाने की मांग को लेकर न्यायालय में वाद दायर किए गए हैं। उनके अनुसार, इन मुकदमों की तैयारी के दौरान देश और विदेश की विभिन्न लाइब्रेरियों तथा अभिलेखीय स्रोतों से ऐतिहासिक पुस्तकें, दस्तावेज और अन्य सामग्री जुटाई गई है।

उन्होंने बताया कि हिंदू पक्ष इन दस्तावेजों को न्यायालयीन प्रक्रिया में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहा है। उनका कहना था कि जन्मभूमि से जुड़े विवाद को केवल धार्मिक भावना के स्तर पर नहीं, बल्कि उपलब्ध ऐतिहासिक सामग्री और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित विभिन्न वादों में पुराने दस्तावेजों, संपत्ति संबंधी अभिलेखों और पूर्ववर्ती मुकदमों का उल्लेख मिलता है। इससे स्पष्ट है कि विवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ऐतिहासिक दस्तावेजों और संपत्ति अधिकारों से जुड़े कानूनी प्रश्नों पर भी केंद्रित है।

‘मूल गर्भगृह पर मंदिर निर्माण कब होगा?’

बातचीत के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने मंदिर निर्माण की मांग के प्रति समर्थन व्यक्त किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने कहा कि यदि भगवान श्रीकृष्ण के मूल गर्भगृह स्थल पर भव्य और दिव्य मंदिर का निर्माण अब नहीं हुआ तो यह कार्य फिर कब होगा।

उन्होंने भगवान शिव के आशीर्वाद का उल्लेख करते हुए कहा कि मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा और सनातन धर्म और मजबूत होगा। उन्होंने महेंद्र प्रताप सिंह को आंदोलन में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।

पंडित मिश्रा ने यह भी कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के बैनर तले भविष्य में जनसमर्थन जुटाने के लिए कोई बड़ा आयोजन किया जाता है और यदि उनके पास समय उपलब्ध रहा तो वह उसमें शामिल होने का प्रयास करेंगे।

कथाओं के माध्यम से विषय को लोगों तक पहुंचाने की बात

मुलाकात के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे को धार्मिक कथाओं और जनसंवाद के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की बात भी सामने आई। पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि सनातन परंपरा और धार्मिक स्थलों से जुड़े विषयों के प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषय को भी भविष्य में अपने भक्तों के सामने रखा जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस विवाद और उससे जुड़े दावों से परिचित हो सकें।

यह पहल ऐसे समय हुई है जब श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मुद्दे पर विभिन्न संगठनों की ओर से जनजागरण और कार्यक्रम किए जा रहे हैं। सितंबर 2026 में विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं की ओर से भी मूल गर्भगृह स्थल पर मंदिर निर्माण के समर्थन में संकल्प कार्यक्रम आयोजित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।

न्यायिक लड़ाई के साथ जनसमर्थन पर जोर

महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मंदिर निर्माण का संघर्ष न्यायालयीन प्रक्रिया के साथ-साथ जनसमर्थन के माध्यम से भी जारी रहेगा। उनका कहना था कि इस विषय से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों और न्यायालय में लंबित मामलों की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना आवश्यक है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में अलग-अलग पक्षों के दावे और कानूनी तर्क न्यायालयों के समक्ष हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में एक ओर पुराने मुकदमों और 1968 के समझौते का विवरण मिलता है, वहीं कुछ मौजूदा वादों में मूल जन्मभूमि परिसर पर अधिकार और मंदिर निर्माण से संबंधित राहत की मांग भी दर्ज है।

इसलिए आने वाले समय में इस विवाद का महत्वपूर्ण पक्ष न्यायालयों में प्रस्तुत होने वाले दस्तावेज, साक्ष्य और दोनों पक्षों की कानूनी दलीलें होंगी। धार्मिक और सामाजिक स्तर पर चलने वाले जनसंवाद के साथ न्यायिक प्रक्रिया भी इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भविष्य में बड़े आयोजन की संभावना

मुलाकात के दौरान भविष्य में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के बैनर तले बड़े आयोजन की संभावना पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य जनसमर्थन जुटाना और जन्मभूमि से संबंधित विषय को व्यापक स्तर पर उठाना बताया गया।

महेंद्र प्रताप सिंह ने पंडित प्रदीप मिश्रा को आंदोलन से जुड़े आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। पंडित मिश्रा की ओर से कार्यक्रम में समय उपलब्ध होने पर शामिल होने की बात कही गई।

मुलाकात में मुंबई से आए फिल्म निर्देशक विजय पाल सिंह, मनोज राजावत, मनोज चौधरी और भगत सिंह भी मौजूद रहे।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद फिलहाल न्यायालयों में विचाराधीन है। ऐसे में मंदिर निर्माण से जुड़े दावों, ऐतिहासिक प्रमाणों और संपत्ति संबंधी अधिकारों का अंतिम निर्धारण न्यायिक फैसलों के माध्यम से होना बाकी है। इसी बीच धार्मिक संगठनों और समर्थकों की ओर से जनजागरण की गतिविधियां जारी हैं। पंडित प्रदीप मिश्रा और महेंद्र प्रताप सिंह की यह मुलाकात इसी व्यापक अभियान के एक नए चरण के रूप में सामने आई है।

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