दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन, पुराने राजनीतिक रिश्तों और नेताओं के बीच जुबानी हमले तेज होते दिखाई दे रहे हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बीच एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी चर्चा में आ गई है। अखिलेश यादव की ओर से राजभर को लेकर की गई टिप्पणी पर ओपी राजभर ने तीखे अंदाज में जवाब दिया है।
अखिलेश यादव ने गुरुवार को लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा पर निशाना साधते हुए ‘कचौड़ी-समोसा’ वाला नारा दिया था। इसी दौरान जब ओमप्रकाश राजभर की संभावित वापसी को लेकर सवाल पूछा गया, तो अखिलेश यादव ने कहा कि अगर कोई उन्हें ले आए तो वह राजभर को अपनी पार्टी में शामिल कर लेंगे। अखिलेश के इस बयान के बाद ओपी राजभर ने प्रतिक्रिया देते हुए पुराने राजनीतिक रिश्ते को ‘तलाक’ के रूपक से जोड़ दिया।
राजभर ने कहा कि जब अखिलेश यादव पहले ही उन्हें तलाक दे चुके हैं और उन्होंने भी उस तलाक को स्वीकार कर लिया है, तो अब वापस जाने का सवाल ही नहीं उठता। उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश की मौजूदा गठबंधन राजनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।
‘तलाक दे दिया, हमने कबूल कर लिया’
अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि जब पहले ही तलाक दिया जा चुका है और वह उसे स्वीकार भी कर चुके हैं, तो फिर दोबारा साथ जाने की बात क्यों हो रही है। राजभर के मुताबिक, अब यह सवाल ही नहीं बनता कि वह वापस कैसे जाएंगे।
राजभर ने पत्रकारों पर भी राजनीतिक अंदाज में चुटकी ली। उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों को अखिलेश यादव से यह सवाल पूछना चाहिए था कि जब उन्होंने खुद ओमप्रकाश राजभर को अलग कर दिया था और राजभर ने उस फैसले को स्वीकार कर लिया, तो फिर अब उनके पास लौटने की स्थिति कैसे बनेगी।
राजभर का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उत्तर प्रदेश में अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन को लेकर चर्चाएं चुनावी माहौल के साथ लगातार बढ़ती रहती हैं। ऐसे में पुराने सहयोगियों को लेकर दिए जाने वाले बयान राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखे जाते हैं।
अखिलेश यादव के ‘कचौड़ी-समोसा’ नारे पर भी पलटवार
ओपी राजभर ने केवल सपा प्रमुख के बयान पर प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि अखिलेश यादव की ओर से भाजपा पर किए गए ‘कचौड़ी-समोसा’ वाले राजनीतिक तंज को भी अपने जवाब का हिस्सा बनाया। उन्होंने इसी शब्दावली को पलटते हुए अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और छात्र आंदोलन से जुड़े नेता दीपक का नाम लेते हुए उन पर तंज कसा।
राजभर ने कहा कि जनता ने इन लोगों से अपना भरोसा पहले ही हटा लिया है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में अखिलेश यादव और राहुल गांधी को ‘कचौड़ी’ तथा ‘समोसा’ की संज्ञा दी। इसके साथ ही उन्होंने जेन-ज़ी आंदोलन से जुड़े दीपक का भी उल्लेख किया।
हालांकि, राजभर का यह बयान राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है और इसे उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर राजनीतिक कटाक्ष उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल के गर्म होने के साथ चर्चा का विषय बनते रहे हैं।
सपा कार्यालय में अखिलेश यादव ने क्या कहा था?
गुरुवार को समाजवादी पार्टी के लखनऊ स्थित कार्यालय में अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा पर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने ‘एक कचौड़ी, एक समोसा, BJP पर नहीं भरोसा’ जैसा नारा दिया। सपा अध्यक्ष का यह नारा राजनीतिक रूप से भाजपा पर कटाक्ष के तौर पर सामने आया।
इसी प्रेस वार्ता के दौरान ओमप्रकाश राजभर को लेकर भी सवाल पूछा गया। राजभर के अतीत में सपा के साथ रहे राजनीतिक संबंधों को देखते हुए उनकी संभावित वापसी से जुड़े सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि यदि कोई उन्हें लेकर आए तो वह उन्हें पार्टी में शामिल कर लेंगे।
अखिलेश यादव की इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हुई। इसके बाद ओपी राजभर की प्रतिक्रिया सामने आई और उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब रिश्ता खत्म करने का फैसला पहले ही हो चुका है और वह उस फैसले को स्वीकार कर चुके हैं, तो वापस लौटने का सवाल क्यों उठाया जा रहा है।
सपा और सुभासपा के बीच पुराने राजनीतिक रिश्ते का संदर्भ
ओमप्रकाश राजभर की राजनीति में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन का दौर पहले भी रहा है। उत्तर प्रदेश की पिछली विधानसभा चुनावी राजनीति में सुभासपा और सपा ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। उस समय ओमप्रकाश राजभर विपक्षी गठबंधन का हिस्सा थे। बाद में दोनों दलों के राजनीतिक रास्ते अलग हो गए।
राजभर इसके बाद एनडीए के साथ चले गए और उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार में मंत्री बने। इसी राजनीतिक बदलाव के कारण सपा और राजभर के बीच रिश्ते को लेकर समय-समय पर बयान सामने आते रहे हैं।
यही वजह है कि अखिलेश यादव की ओर से राजभर की संभावित वापसी को लेकर की गई टिप्पणी और उसके जवाब में राजभर का ‘तलाक’ वाला बयान राजनीतिक रूप से खासा चर्चित हो गया है।
राजभर ने वापसी की संभावनाओं पर क्या संकेत दिया?
ओपी राजभर की प्रतिक्रिया से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि उन्होंने सपा में लौटने की किसी संभावना को लेकर सकारात्मक संकेत नहीं दिया। उन्होंने अपने बयान में पुराने राजनीतिक घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि जब अखिलेश यादव ने उन्हें तलाक दे दिया और उन्होंने उसे स्वीकार कर लिया, तो अब वह वापस कैसे जाएंगे।
राजभर की मौजूदा राजनीतिक स्थिति एनडीए के साथ है। ऐसे में उनके बयान को वर्तमान गठबंधन व्यवस्था के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, चुनावी राजनीति में गठबंधन और राजनीतिक समीकरण समय के साथ बदलते रहे हैं, इसलिए किसी भी भविष्य की स्थिति पर अंतिम निष्कर्ष राजनीतिक दलों के आधिकारिक फैसलों के बाद ही निकाला जा सकता है।
बयानबाजी से गर्माया उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज होना स्वाभाविक है। राजनीतिक दल अपने-अपने संगठन और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे माहौल में गठबंधन के पुराने सहयोगियों, संभावित राजनीतिक वापसी और नेताओं के बीच व्यक्तिगत राजनीतिक रिश्तों से जुड़े बयान तेजी से चर्चा में आते हैं।
अखिलेश यादव और ओपी राजभर के ताजा बयान भी इसी क्रम में देखे जा रहे हैं। एक ओर अखिलेश यादव ने राजभर को लेकर टिप्पणी की, वहीं दूसरी ओर राजभर ने पुराने राजनीतिक संबंध को ‘तलाक’ के रूपक के जरिए खारिज करते हुए अपनी मौजूदा राजनीतिक स्थिति का संकेत दिया।
इसके साथ ही ‘कचौड़ी-समोसा’ नारे पर राजभर के पलटवार ने इस राजनीतिक बहस को और अधिक तीखा बना दिया है। दोनों नेताओं के बयानों से यह भी स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक गठबंधन और पुराने संबंध भी आने वाले समय में चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रह सकते हैं।
क्या है पूरे विवाद का सार?
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत अखिलेश यादव की उस टिप्पणी से हुई, जिसमें उन्होंने ओमप्रकाश राजभर की संभावित वापसी से जुड़े सवाल पर कहा कि कोई उन्हें लेकर आए तो वह उन्हें पार्टी में शामिल कर लेंगे। इसके साथ ही सपा अध्यक्ष ने भाजपा पर निशाना साधते हुए ‘कचौड़ी-समोसा’ वाला नारा भी दिया।
इसके जवाब में ओपी राजभर ने पुराने राजनीतिक रिश्ते को ‘तलाक’ के रूपक में रखते हुए कहा कि जब अखिलेश यादव उन्हें पहले ही तलाक दे चुके हैं और वह उसे स्वीकार कर चुके हैं, तो अब उनके वापस जाने का सवाल नहीं है। इसके अलावा उन्होंने अखिलेश यादव और राहुल गांधी समेत अन्य राजनीतिक चेहरों पर भी ‘कचौड़ी-समोसा’ वाले तंज के जरिए पलटवार किया।
इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा और सुभासपा के पुराने रिश्ते तथा मौजूदा गठबंधन समीकरणों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। फिलहाल दोनों नेताओं के बयानों के बीच राजनीतिक वार-पलटवार जारी है और आने वाले दिनों में चुनावी माहौल के साथ ऐसे बयानों के और तेज होने की संभावना बनी हुई है।













