सबके सामने कूद गया टावर से और दे दी जान ; जमीन विवाद और सीमांकन की लड़ाई ने ली एक और जान
7 घंटे तक 100 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ा रहा युवक, दोबारा नपाई में भी नहीं मिला संतोष तो लगा दी छलांग
रामकीर्ति यादव की रिपोर्ट
जौनपुर जिले में जमीन विवाद और सीमांकन को लेकर एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बक्शा थाना क्षेत्र में एक युवक ने खेत से रास्ता निकाले जाने और सीमांकन विवाद से परेशान होकर मोबाइल टावर पर चढ़कर आत्मघाती कदम उठा लिया। करीब सात घंटे तक प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस और ग्रामीण उसे समझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन आखिरकार युवक सबके सामने टावर से कूद गया और उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने घायल युवक को तत्काल सरकारी वाहन से जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
खेत के सीमांकन को लेकर वर्षों से चल रहा था विवाद
यह घटना जौनपुर जिला मुख्यालय से करीब 11 किलोमीटर दूर बक्शा थाना क्षेत्र के उतरीजपुर गांव के विशेषरपुर मजरे की है। यहां रहने वाले राजाराम यादव का परिवार कई वर्षों से खेत के सीमांकन और चकरोड विवाद को लेकर परेशान था।
मृतक श्रीप्रकाश यादव (30) अपने पिता राजाराम यादव का बड़ा बेटा था और शंभूगंज बाजार में चाय की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी शादी हो चुकी थी और उसकी तीन बेटियां हैं। परिवार का आरोप है कि उनकी 15 बिसवा जमीन से जबरन रास्ता निकाला जा रहा था।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2016 में खेत का सीमांकन किया गया था। उसी दौरान खेत के एक हिस्से से चकरोड निकाल दिया गया। प्रशासनिक रिकॉर्ड में इसे वैध बताया गया, लेकिन श्रीप्रकाश और उसका परिवार लगातार यह दावा करता रहा कि संबंधित रास्ता किसी भी राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है।
चार साल पहले दायर किया था मुकदमा
परिजनों के अनुसार, करीब चार साल पहले श्रीप्रकाश यादव ने तहसील में खेत की दोबारा पैमाइश और सीमांकन को लेकर मुकदमा दायर किया था। एसडीएम के आदेश पर सीमांकन कराया गया, लेकिन श्रीप्रकाश इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं था।
उसका कहना था कि उसके खेत का वास्तविक रकबा कम दिखाया गया है और पड़ोसियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। उसने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कथित रूप से उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। गांव वालों के मुताबिक, विवाद लगातार बढ़ता जा रहा था और पिछले कुछ दिनों से मामला और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया था।
विवादित जमीन पर सड़क निर्माण से बढ़ा तनाव
परिवार का आरोप है कि विवादित जमीन पर पड़ोसी बसंतु यादव सड़क बनवा रहा था, जिसका श्रीप्रकाश लगातार विरोध कर रहा था। इसी बात से परेशान होकर गुरुवार सुबह करीब सात बजे वह घर से करीब 500 मीटर दूर स्थित मोबाइल टावर पर चढ़ गया।
टावर पर चढ़ने के बाद उसने गांव के प्रधान बृजेश यादव को फोन किया और कहा कि यदि दूसरे क्षेत्र के कानूनगो और लेखपाल से निष्पक्ष तरीके से दोबारा सीमांकन नहीं कराया गया तो वह टावर से कूदकर जान दे देगा। यह सूचना मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया। प्रधान ने तुरंत पुलिस और राजस्व विभाग को मामले की जानकारी दी।
पुलिस और प्रशासन घंटों करता रहा समझाने की कोशिश
घटना की जानकारी मिलते ही बक्शा थाना प्रभारी वीरेंद्र कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद फायर ब्रिगेड और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को भी बुलाया गया।
कुछ ही देर में एसडीएम संतवीर सिंह, सीओ दिवेश कुमार सिंह, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व विभाग के कई कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। सभी अधिकारी युवक को नीचे उतरने के लिए समझाते रहे।
तहसीलदार ने प्रधान के मोबाइल फोन से श्रीप्रकाश से बातचीत की और उसे भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। लेकिन श्रीप्रकाश ने साफ कहा कि जब तक दूसरे अधिकारियों से दोबारा नपाई नहीं कराई जाएगी, वह नीचे नहीं उतरेगा।
तहसीलदार ने तुरंत गठित की दूसरी टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार ने दूसरे क्षेत्र के कानूनगो और लेखपाल को बुलाकर दोबारा सीमांकन कराने का फैसला किया। मौके पर ही दूसरी टीम ने खेत की पैमाइश शुरू की।
करीब सात घंटे तक चले इस हाईवोल्टेज ड्रामे के दौरान गांव के सैकड़ों लोग मौके पर जमा रहे। सभी की निगाहें टावर पर चढ़े युवक पर टिकी थीं।
दोपहर बाद जब दोबारा नपाई की रिपोर्ट आई तो उसमें भी पुरानी पैमाइश को सही बताया गया। प्रधान के फोन से जब यह जानकारी श्रीप्रकाश तक पहुंचाई गई तो वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गया। कुछ ही पलों बाद उसने अचानक टावर से छलांग लगा दी। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही टूट चुकी थीं सांसें
टावर से गिरने के बाद पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत युवक को उठाकर सरकारी गाड़ी में लिटाया और जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही एसपी ग्रामीण आतिश कुमार, एसपी सिटी गोल्डी गुप्ता, सीओ सदर देवेश कुमार सिंह समेत कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंच गई। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।
मां बोली- 12 साल से न्याय के लिए भटक रहे थे
मृतक की मां सीता देवी ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि परिवार पिछले 12 वर्षों से जमीन विवाद को लेकर परेशान है।
सीता देवी का आरोप है कि पड़ोसियों ने उनकी जमीन के पास बाउंड्री और मकान बना लिया, लेकिन रास्ता उनकी जमीन से निकाला जा रहा था। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग ने सही तरीके से नपाई नहीं की और मामले को दबाने का प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार को यह तक नहीं बताया गया कि खेत का सीमांकन कब और कैसे कराया गया।
भाई ने पुलिस और प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
मृतक के छोटे भाई जयशंकर यादव ने भी प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उसने कहा कि परिवार कई वर्षों से अधिकारियों के चक्कर काट रहा था, लेकिन किसी ने उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया।
जयशंकर के अनुसार, विपक्षी पक्ष जिला पंचायत निधि से सड़क निर्माण के लिए पैसा पास कराकर जबरन रास्ता बनवा रहा था। जब भी परिवार पुलिस को बुलाता था, पुलिस उल्टा उन्हें ही धमकाती थी।
उसने बताया कि जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराने का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में अधिकारियों ने दोबारा नपाई से इनकार कर दिया। इसी मानसिक तनाव के कारण उसके भाई ने आत्मघाती कदम उठा लिया।
डीएम ने दिए जांच के आदेश
घटना के बाद जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन ने कहा कि युवक को बचाने के लिए प्रशासन की ओर से हर संभव प्रयास किया गया था। उन्होंने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
डीएम ने तीन अधिकारियों की टीम गठित कर तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। प्रशासन यह पता लगाएगा कि कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई।
जमीन विवादों ने बढ़ाई ग्रामीण क्षेत्रों में तनाव की स्थिति
जौनपुर की यह घटना केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में बढ़ते जमीन विवादों और प्रशासनिक संवेदनहीनता की गंभीर तस्वीर भी पेश करती है। सीमांकन, चकरोड और राजस्व विवाद आज गांवों में तनाव और हिंसा का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मामले को संवेदनशील तरीके से सुलझाया जाता, तो शायद एक युवक की जान बचाई जा सकती थी। अब तीन मासूम बेटियां अपने पिता को खो चुकी हैं और पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
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