अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट
समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश से आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए उद्योग जगत से जुड़े धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाकर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिस पर राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा तेज हो गई है। पार्टी ने उनके साथ वरिष्ठ नेता प्रोफेसर रामगोपाल यादव को भी उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने बुधवार को लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया।
धनराज नाथवानी की उम्मीदवारी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनके पिता परिमल नाथवानी इसी वर्ष जून में झारखंड से एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में एक ही परिवार के पिता और पुत्र का अलग-अलग राजनीतिक खेमों के समर्थन से संसद के उच्च सदन तक पहुंचने का घटनाक्रम अपने आप में असामान्य राजनीतिक तस्वीर पेश करता है। परिमल नाथवानी का यह राज्यसभा में चौथा कार्यकाल है।
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का गणित
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होना है। यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है, जब प्रदेश अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियों में प्रवेश कर चुका है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन के आठ सीटें जीतने और सपा को दो सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है। सपा को इन दो सीटों में से एक पर रामगोपाल यादव और दूसरी पर धनराज नाथवानी को उतारने की घोषणा की गई है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सदस्य हैं। मौजूदा संख्या के अनुसार सत्तारूढ़ गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल है, जबकि सपा अपने सहयोगियों के समर्थन के साथ दो सीटों पर दावा कर सकती है। इसलिए राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी राजनीतिक गणित महत्वपूर्ण हो गया है। सपा के एमएलसी राजेंद्र चौधरी ने तीसरे उम्मीदवार का नाम जल्द घोषित किए जाने का संकेत दिया है।
राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके सदस्य सामान्यतः छह वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार प्रत्येक दो वर्ष में लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की कुल 31 सीटें हैं।
पिता एनडीए समर्थित, बेटा सपा के साथ
धनराज नाथवानी की उम्मीदवारी का सबसे चर्चित पहलू उनके पिता की मौजूदा राजनीतिक स्थिति है। परिमल नाथवानी को जून 2026 में झारखंड से एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा में सफलता मिली थी। चुनाव में उन्हें 28 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 20 वोट मिले। झारखंड की इस लड़ाई में क्रॉस वोटिंग की भी चर्चा हुई थी।
परिमल नाथवानी इससे पहले झारखंड से दो कार्यकाल निर्दलीय सांसद रह चुके हैं और 2020 में आंध्र प्रदेश से वाईएसआर कांग्रेस के सांसद के रूप में राज्यसभा पहुंचे थे। जून 2026 में उनकी जीत ने उन्हें चौथी बार उच्च सदन का सदस्य बनाया।
अब उनके बेटे धनराज को सपा ने उत्तर प्रदेश से उम्मीदवार बनाया है। यही वह बिंदु है, जहां से सोशल मीडिया पर राजनीतिक समीकरणों और परिवार की राजनीतिक पहुंच को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हुई हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर चल रही हर टिप्पणी को तथ्य नहीं माना जा सकता और किसी राजनीतिक फैसले के पीछे किसी खास सौदे या समझौते का निष्कर्ष निकालने के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध प्रमाण अलग से जरूरी होंगे।
धनराज नाथवानी का कॉरपोरेट प्रोफाइल
धनराज परिमल नाथवानी लंबे समय से रिलायंस समूह से जुड़े हुए हैं। उनके आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार वे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड के निदेशक भी हैं। उनका काम केवल एक कारोबारी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, नई ऊर्जा, रक्षा और रियल एस्टेट से जुड़े विभिन्न दायित्वों तक फैला हुआ है।
उनकी जिम्मेदारियों में जामनगर स्थित रिलायंस के विनिर्माण से जुड़े कामों की निगरानी तथा गुजरात में रिलायंस जियो के कारोबार से संबंधित रणनीतिक जिम्मेदारियां शामिल हैं। वे रिलायंस कॉरपोरेट आईटी पार्क लिमिटेड के बोर्ड से भी जुड़े हैं। उनके प्रोफाइल में इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन यानी ईपीसी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से संबंधित जिम्मेदारियों का भी उल्लेख है।
यानी राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में धनराज नाथवानी की पहचान पारंपरिक राजनीतिक कार्यकर्ता की नहीं, बल्कि कॉरपोरेट और संस्थागत क्षेत्र से आने वाले व्यक्ति की है। सपा द्वारा उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा का एक प्रमुख कारण यही पृष्ठभूमि भी है।
गुजरात क्रिकेट से लेकर मंदिर प्रशासन तक
धनराज नाथवानी की सार्वजनिक गतिविधियां कारोबार तक सीमित नहीं हैं। वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। उन्हें नवंबर 2022 में सर्वसम्मति से इस पद के लिए चुना गया था। इससे पहले वे एसोसिएशन में उपाध्यक्ष की भूमिका निभा चुके थे। उन्होंने अमित शाह के बाद अध्यक्ष पद संभाला था।
गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन नरेंद्र मोदी स्टेडियम सहित राज्य में क्रिकेट प्रशासन से जुड़ी गतिविधियों का संचालन करती है। नाथवानी परिवार का गुजरात क्रिकेट प्रशासन से पुराना संबंध रहा है। उनके पिता परिमल नाथवानी भी गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रह चुके हैं।
धनराज नाथवानी की संस्थागत भूमिका में धार्मिक, पर्यावरण और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े दायित्व भी शामिल हैं। उनके आधिकारिक प्रोफाइल में द्वारकाधीश मंदिर प्रशासन से जुड़ी भूमिका, गुजरात स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से संबंधों का उल्लेख मिलता है।
परिमल नाथवानी और अंबानी परिवार से पुराना रिश्ता
धनराज नाथवानी के राजनीतिक प्रवेश को समझने के लिए उनके पिता परिमल नाथवानी की कारोबारी यात्रा भी महत्वपूर्ण है। परिमल नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज में कॉरपोरेट अफेयर्स के निदेशक हैं और लंबे समय से रिलायंस समूह से जुड़े हुए हैं। उनके आधिकारिक प्रोफाइल में 1995 से रिलायंस से जुड़े होने तथा कॉरपोरेट अफेयर्स और परियोजनाओं से संबंधित जिम्मेदारियों का उल्लेख किया गया है।
राजनीतिक जीवन में भी उनका लंबा अनुभव रहा है। 2008 से झारखंड से राज्यसभा की राजनीति में उनकी मौजूदगी रही और बाद में उन्होंने आंध्र प्रदेश का प्रतिनिधित्व भी किया। जून 2026 में एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उनकी वापसी ने उन्हें फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
धनराज नाथवानी की उम्मीदवारी के बाद सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा उनके रिलायंस समूह और अंबानी परिवार से संबंधों तथा उनके गुजरात-केंद्रित सार्वजनिक जीवन को लेकर हुई। कुछ पोस्ट में यह सवाल उठाया गया कि उत्तर प्रदेश से उनका प्रत्यक्ष राजनीतिक जुड़ाव कितना है और सपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार क्यों चुना।
कुछ राजनीतिक टिप्पणियों में इसे व्यापक विपक्षी राजनीति और उद्योग जगत के संबंधों के संदर्भ में देखा गया। दूसरी ओर, सपा नेता एसटी हसन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी ने उन्हें एनडीए से अलग कर अपने साथ लाया है। उन्होंने यह भी कहा कि सपा और भाजपा के बीच कोई गठबंधन या पर्दे के पीछे तालमेल नहीं है।
इन बयानों को राजनीतिक दल के प्रतिनिधि की प्रतिक्रिया के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी उम्मीदवार को किसी दल द्वारा राज्यसभा टिकट दिए जाने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं, इसका अंतिम उत्तर पार्टी नेतृत्व ही दे सकता है, जब तक कि कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या दस्तावेज सामने न आए।
पिता-पुत्र की संसद में एक साथ मौजूदगी
धनराज नाथवानी के नामांकन का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि यदि दोनों निर्वाचित होते हैं तो पिता परिमल नाथवानी और पुत्र धनराज नाथवानी एक ही समय में राज्यसभा के सदस्य होंगे। यह स्थिति संसद में एक ही परिवार की दो पीढ़ियों की एक साथ मौजूदगी का उदाहरण बनेगी।
यही कारण है कि नाथवानी परिवार का राजनीतिक सफर अब केवल गुजरात और झारखंड तक सीमित चर्चा का विषय नहीं रह गया है। एक ओर पिता का एनडीए समर्थित निर्दलीय सांसद के रूप में संसद में होना है और दूसरी ओर पुत्र का सपा के टिकट पर उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की दौड़ में उतरना—यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में कारोबारी परिवारों और अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच संबंधों पर बहस को नया संदर्भ देता है।
हालांकि यह भी ध्यान रखना होगा कि पिता और पुत्र का अलग-अलग राजनीतिक समर्थन प्राप्त करना अपने आप में किसी राजनीतिक गठबंधन या पारिवारिक राजनीतिक समझौते का प्रमाण नहीं है। उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाएं इतना जरूर बताती हैं कि दोनों की संसदीय यात्राएं अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में आगे बढ़ी हैं।
सपा के लिए दांव कितना महत्वपूर्ण?
सपा के लिए धनराज नाथवानी का चयन पारंपरिक उम्मीदवार चयन से अलग दिखाई देता है। पार्टी ने एक अनुभवी राजनीतिक नेता रामगोपाल यादव के साथ कॉरपोरेट, खेल प्रशासन और संस्थागत क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति को मैदान में उतारा है। इससे पार्टी के राज्यसभा प्रतिनिधित्व में एक अलग तरह की प्रोफाइल जुड़ सकती है।
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का समय भी महत्वपूर्ण है। अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में हर बड़ा राजनीतिक फैसला व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है। लेकिन नाथवानी की उम्मीदवारी को लेकर उठ रही चर्चाओं और पार्टी की वास्तविक रणनीति के बीच अंतर करना जरूरी है।
फिलहाल तथ्य यह है कि धनराज नाथवानी ने सपा उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया है। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। उनके नामांकन ने पिता परिमल नाथवानी के एनडीए समर्थित राजनीतिक सफर और बेटे के सपा उम्मीदवार बनने के बीच एक असामान्य समानांतर जरूर खड़ा कर दिया है।













