सपा पर निरहुआ का बड़ा हमला : ‘जिहादी मानसिकता को राजनीतिक संरक्षण मिलता है’, एटीएस कार्रवाई के बाद गरमाई सियासत
जगदंबा उपाध्याय की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक संरक्षण को लेकर बहस तेज हो गई है। भोजपुरी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता, भाजपा नेता और पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने एक वीडियो जारी कर समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि जब-जब समाजवादी पार्टी क्षेत्र में मजबूत हुई है, तब-तब कट्टरपंथी और जिहादी मानसिकता को बढ़ावा मिला है। हाल ही में उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) द्वारा एक संदिग्ध युवक की गिरफ्तारी के बाद यह राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।
निरहुआ का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश एटीएस ने एक युवक को कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित नेटवर्क और संदिग्ध आतंकी गतिविधियों से जुड़े आरोपों के आधार पर गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
एटीएस की कार्रवाई के बाद भाजपा नेताओं के तीखे बयान
भाजपा नेता दिनेश लाल यादव ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि जिस क्षेत्र का नाम कभी आतंकवाद और संदिग्ध गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा, वहां एक बार फिर ऐसी घटनाओं का सामने आना चिंता का विषय है। उन्होंने दावा किया कि हाल में गिरफ्तार किया गया युवक जिहादी सोच से प्रभावित था और उसके विदेशी संपर्कों की जांच की जा रही है।
निरहुआ ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी देशहित में नहीं हो सकती। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रख रही हैं।
समाजवादी पार्टी पर साधा निशाना
अपने बयान में भाजपा नेता ने सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी को निशाने पर लेते हुए कहा कि प्रदेश में जब भी सपा का राजनीतिक प्रभाव बढ़ता है, तब कट्टरपंथी तत्वों का मनोबल भी बढ़ता दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक परिस्थितियां ऐसी मानसिकता को अप्रत्यक्ष रूप से मजबूती देती हैं।
निरहुआ ने कहा कि जिस समय क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की राजनीतिक पकड़ कमजोर हुई थी, उस दौरान ऐसे तत्वों की गतिविधियां भी सीमित होती दिखाई दी थीं। वहीं हाल के चुनावी परिणामों के बाद फिर से कुछ संदिग्ध गतिविधियां सामने आना चिंता का विषय है। हालांकि उनके इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे आगामी चुनावी रणनीति और जनमत निर्माण से जोड़कर देख रहे हैं।
‘राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति नहीं होनी चाहिए’
भाजपा नेता ने अपने बयान में कहा कि आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी गतिविधियां किसी भी समाज के लिए खतरा हैं और इनके खिलाफ सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई यह दर्शाती है कि राज्य सरकार ऐसे मामलों को लेकर गंभीर है।
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं या ऐसे नेटवर्क का हिस्सा बनने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
योगी सरकार की कानून व्यवस्था का किया बचाव
निरहुआ ने अपने बयान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की कानून-व्यवस्था को लेकर भी समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार अपराध और आतंकवाद के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है।
उनके अनुसार प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को पूरी स्वतंत्रता दी गई है और यही कारण है कि कई बड़े मामलों का खुलासा समय रहते हो पा रहा है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि प्रदेश में राष्ट्रविरोधी सोच रखने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।
क्या है एटीएस का पूरा मामला?
हाल ही में उत्तर प्रदेश एटीएस ने एक युवक को गिरफ्तार किया, जिसके बारे में जांच एजेंसियों का दावा है कि उसके संपर्क पाकिस्तान स्थित कुछ संदिग्ध व्यक्तियों और नेटवर्क से जुड़े हुए थे। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि वह सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए कुछ लोगों के संपर्क में था। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या वह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था या फिर अन्य युवाओं को भी अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रहा था। फिलहाल मामले की जांच जारी है और सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने की कोशिशें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती बनकर उभरी हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
ओपी राजभर ने भी की थी कार्रवाई की सराहना
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने भी एटीएस की इस कार्रवाई की प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा था कि देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक है और सुरक्षा एजेंसियां अपना काम पूरी निष्पक्षता से कर रही हैं।
राजभर ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति राष्ट्र की सुरक्षा के खिलाफ कार्य करता है तो उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने एटीएस की टीम को इस कार्रवाई के लिए बधाई भी दी थी।
राजनीतिक और सामाजिक बहस का नया केंद्र
एटीएस की कार्रवाई और उसके बाद आए राजनीतिक बयानों ने प्रदेश में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर भाजपा नेता इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल अक्सर ऐसे मामलों में राजनीतिक आरोपों से बचने और निष्पक्ष जांच की बात करते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में तथ्यों और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होना आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
फिलहाल यह मामला सुरक्षा एजेंसियों की जांच के दायरे में है, जबकि राजनीतिक स्तर पर इसके असर को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला सकती हैं।








