राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद में घिरे चंपत राय, भाई सुनील बंसल का बड़ा दावा- ‘सच जानकर चौंक जाएंगे आप’
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस बीच राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के भाई सुनील बंसल ने बड़ा बयान देते हुए पूरे मामले को साजिश करार दिया है। उन्होंने दावा किया कि चंपत राय के पास कोई संपत्ति नहीं है और उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही उन्होंने विपक्ष को खुली चुनौती भी दी है।
ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और विपक्ष लगातार राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर सवाल उठा रहा है। इसी बीच चंपत राय के भाई सुनील बंसल सामने आए हैं और उन्होंने अपने भाई का बचाव करते हुए कई ऐसे दावे किए हैं, जिन्होंने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।
सुनील बंसल ने न केवल चंपत राय की सादगी और त्याग की चर्चा की, बल्कि यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ एक सुनियोजित साजिश रची जा रही है। उनका कहना है कि चंपत राय को बदनाम कर उन्हें उनकी जिम्मेदारी से हटाने की कोशिश की जा रही है।
‘चंपत राय को हटाने के लिए रची जा रही है साजिश’
चढ़ावा चोरी मामले में उठ रहे सवालों के बीच सुनील बंसल ने साफ शब्दों में कहा कि उनके भाई का पूरा जीवन पारदर्शिता और ईमानदारी का उदाहरण रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल और कुछ अन्य लोग मिलकर चंपत राय की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष का मकसद केवल एक व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि इसके जरिए हिंदुत्व और राम मंदिर आंदोलन को भी विवादों में घसीटना है। उनके मुताबिक, कुछ लोग चाहते हैं कि चंपत राय को पद से हटाकर उनकी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को स्थापित किया जाए।
सुनील बंसल ने यह भी कहा कि जिन लोगों पर जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की है, उन्होंने ही चंपत राय के विश्वास को तोड़ा है और उनके साथ धोखा किया है।
परिवार से लगभग टूट चुका है रिश्ता
अपने भाई के निजी जीवन के बारे में बात करते हुए सुनील बंसल भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि चंपत राय ने वर्षों पहले परिवार से दूरी बना ली थी और अपना पूरा जीवन सामाजिक और धार्मिक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा कि परिवार के लोग कई बार उनसे संपर्क करने की कोशिश करते हैं, लेकिन अक्सर वह फोन तक नहीं उठाते। यदि कभी किसी अवसर पर बात हो जाती है, तो केवल कुशलक्षेम पूछने तक ही बातचीत सीमित रहती है।
सुनील बंसल के अनुसार, चंपत राय ने व्यक्तिगत जीवन की अपेक्षा अपने मिशन और दायित्वों को अधिक महत्व दिया है।
दस वर्षों से घर नहीं लौटे चंपत राय
सुनील बंसल ने दावा किया कि चंपत राय पिछले करीब दस वर्षों से अपने घर नहीं आए हैं। उनके मुताबिक, वर्ष 2014 में वह एक पारिवारिक समारोह में केवल कुछ घंटों के लिए पहुंचे थे और उसके बाद से उन्होंने घर की ओर रुख नहीं किया।
उन्होंने कहा कि यह उनके त्याग और समर्पण को दर्शाता है। चंपत राय का अधिकांश समय संगठन और राम मंदिर से जुड़े कार्यों में ही बीतता है।
विपक्ष को दी खुली चुनौती
चंपत राय पर संपत्ति बनाने के आरोपों को लेकर सुनील बंसल ने विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई यह साबित कर दे कि चंपत राय ने अपने लिए संपत्ति जुटाई है, तो वह उस पूरी संपत्ति पर बुलडोजर चलाने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने दावा किया कि चंपत राय के पास निजी संपत्ति के नाम पर कुछ भी नहीं है और उनका जीवन बेहद सादा है। उनके अनुसार, उनके भाई ने कभी धन-दौलत या व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं को महत्व नहीं दिया।
प्रोफेसर से राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे तक
चंपत राय की यात्रा भी काफी दिलचस्प रही है। उन्होंने भौतिक विज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त की और उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में एक कॉलेज में फिजिक्स के प्रवक्ता के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी।
हालांकि, छात्र जीवन से ही उनका झुकाव सामाजिक और राष्ट्रवादी संगठनों की ओर रहा। वर्ष 1980 में उन्होंने अपना अध्यापन कार्य छोड़ दिया और पूर्णकालिक रूप से संगठन के कार्यों में जुट गए।
राम मंदिर आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई और बाद में वह राम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों में शामिल हुए। अयोध्या आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण की प्रक्रिया तक उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
इस्तीफे की खबरों पर बना सस्पेंस
पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा भी चल रही है कि चंपत राय और ट्रस्ट के कुछ अन्य पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा देने की पेशकश की है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
सुनील बंसल ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी औपचारिक जानकारी की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह जरूर कहा कि यदि किसी प्रकार की पेशकश की गई होगी तो वह केवल नैतिक आधार पर हो सकती है।
ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों ने भी इस्तीफे की खबरों का खंडन किया है और कहा है कि मीडिया में चल रही कई बातें केवल अटकलें हैं।
पूरे देश की नजरें अयोध्या पर
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला अब केवल एक जांच तक सीमित नहीं रह गया है। यह राजनीतिक और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। एक तरफ विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर चंपत राय के समर्थक इसे उनके खिलाफ साजिश बता रहे हैं।
अब सभी की नजरें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और राम मंदिर ट्रस्ट के फैसलों पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसके राजनीतिक तथा सामाजिक प्रभाव कितने व्यापक होंगे।








