देवरिया

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को सलेमपुर में मिला जनसमर्थन, सांसद रमाशंकर राजभर ने किया वृक्षारोपण और बांटे 500 पौधे

सेंट पाल स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों से पौधों की देखभाल का लिया संकल्प, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

रिपोर्ट: इरफान अली लारी

देवरिया। पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से सलेमपुर स्थित सेंट पाल स्कूल परिसर में वन विभाग के सहयोग से “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सलेमपुर के समाजवादी पार्टी सांसद रमाशंकर राजभर रहे। उन्होंने विद्यालय परिसर में पौधारोपण कर अभियान की शुरुआत की और उपस्थित लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय नागरिकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली।

पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद रमाशंकर राजभर ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह प्रकृति के संरक्षण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए। उन्होंने कहा कि यदि हमें आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण और पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध करानी है तो वृक्षारोपण को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बनाना होगा।

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि हर परिवार वर्ष में कम से कम एक पौधा अपनी मां के सम्मान में अवश्य लगाए। “एक पेड़ मां के नाम” अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मातृत्व दोनों के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक प्रेरणादायक संदेश है।

विद्यार्थियों को वितरित किए गए 500 पौधे

कार्यक्रम के दौरान सांसद रमाशंकर राजभर ने सेंट पाल स्कूल के विद्यार्थियों के बीच लगभग 500 पौधों का वितरण किया। उन्होंने बच्चों से कहा कि पौधा लगाना पहला कदम है, लेकिन उसकी नियमित देखभाल करना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। यदि प्रत्येक छात्र अपने हिस्से का पौधा सुरक्षित रखेगा तो भविष्य में पूरा क्षेत्र हरियाली से आच्छादित होगा।

उन्होंने विद्यार्थियों से पौधों की सिंचाई, सुरक्षा और समय-समय पर उनकी देखरेख करने का संकल्प भी दिलाया। सांसद ने कहा कि बच्चों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश समाज के प्रत्येक घर तक पहुंचेगा और इससे हरित भारत का सपना साकार करने में मदद मिलेगी।

वृक्ष ही जीवन का आधार

प्रेस वार्ता के दौरान सांसद ने कहा कि वृक्ष पृथ्वी पर जीवन के सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं। यह न केवल ऑक्सीजन प्रदान करते हैं बल्कि जल संरक्षण, वर्षा संतुलन, तापमान नियंत्रण और जैव विविधता को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती आबादी और अंधाधुंध कटान के कारण पर्यावरण पर गंभीर संकट उत्पन्न हो रहा है, जिसे केवल व्यापक वृक्षारोपण अभियान से ही कम किया जा सकता है।

उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे किसी भी विशेष अवसर जैसे जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या पारिवारिक समारोह पर पौधे अवश्य लगाएं और उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित रखें।

वन विभाग ने भी दिया संरक्षण का संदेश

वन विभाग के अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को पौधारोपण के महत्व से अवगत कराया। अधिकारियों ने बताया कि केवल सरकारी योजनाओं से पर्यावरण संरक्षण संभव नहीं है, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। यदि प्रत्येक नागरिक वर्ष में एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी निभाए तो प्रदेश में हरित क्षेत्र का विस्तार तेजी से किया जा सकता है।

कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई तथा लोगों को पौधों के वैज्ञानिक महत्व और उनके संरक्षण के उपायों की जानकारी दी गई।

जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति

इस अवसर पर वन विभाग के क्षेत्राधिकारी गौतम मौर्या, सांसद मीडिया प्रभारी मंजूर आलम, सांसद प्रतिनिधि रामप्रकाश यादव, जैनूल अख्तर, अनूज चौधरी, हषित मिश्रा, विद्यालय के प्रबंधक बाबू खां, बिरेंद्र प्रजापति, अनूप कुमार, छोटे लाल, योगेश यादव, सभासद नागेंद्र पासवान, ब्लॉक अध्यक्ष कुलदीप यादव, गुफरान सहित अनेक जनप्रतिनिधि, शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरक पहल

“एक पेड़ मां के नाम” अभियान के माध्यम से आयोजित यह कार्यक्रम केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम भी बना। विद्यालय के बच्चों की सक्रिय भागीदारी और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इस अभियान को और अधिक सार्थक बना दिया। वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति पौधारोपण के साथ उसकी देखभाल का भी संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिलेगा।

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