भावनात्मक लेख
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खास बात
कभी-कभी घर ही आपको छोड़ देता है ; एक सच्ची कहानी, जहाँ गालियों से अधिक गहरा घाव रिश्तों के मौन ने दिया
सुनयना नेगी मैं लेखिका नहीं हूँ। बस एक नियमित पाठिका हूँ। वर्षों से उनके लेख पढ़ती रही हूँ। कभी किसी…
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संपादकीय
अकेलापन, दर्द और जीवन का दर्शन : एक संवाद जिसने सोचने पर मजबूर कर दिया
अकेलापन और जीवन का दर्शन हर व्यक्ति के जीवन में किसी न किसी रूप में उपस्थित रहता है। कुछ लोग…
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गुस्ताख दिल
दर्द में राहत, स्मृतियों का सहारा और समय का ध्रुव सत्य
(यह कोई कहानी नहीं है। यह कोई उपदेश भी नहीं है। यह किसी दर्शनशास्त्री का व्याख्यान या किसी मनोवैज्ञानिक का…
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