प्रेरक लेख
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तुम अभी हार नहीं सकती
ज़िंदगी, तुम अभी हार नहीं सकती, अंक–2 : वह महिला, जिसने मुझे मेरे अंदर से ही मिलवाया
लेखक अनिल अनूप जिस सुबह मैं केवल एक आदमी नहीं, अपने भाग्य से मिलने निकला था। रात भर नींद आँखों…
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साहित्यिक विश्लेषण
नरेन्द्र चंचल का अमर गीत ‘बेशक मंदिर–मस्जिद तोड़ो…’: आधुनिक जीवन में प्रेम, मानवता और सूफी दर्शन की कालजयी पुकार
अनिल जनगणदूत के साप्ताहिक स्तम्भ “गीतों की वैज्ञानिक यात्रा” के तीसरे अंक में आपका स्वागत है। इस श्रृंखला का उद्देश्य…
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साहित्यिक पत्रकारिता
ज़िंदगी, तुम अभी हार नहीं सकती : रोटी की तलाश में निकला था, रास्ते में शब्द मिल गए
ज़िंदगी, तुम अभी हार नहीं सकती’ केवल एक साप्ताहिक स्तंभ नहीं, बल्कि एक अनाम भारतीय के जीवन-संघर्ष, आत्मसम्मान, संवेदनाओं और…
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विचार
मेरी पहली चिट्ठी : जेब नहीं, आत्मा तय करती है सौभाग्य और दुर्भाग्य
सौभाग्य और दुर्भाग्य का असली अर्थ केवल आर्थिक लाभ या हानि तक सीमित नहीं है। यह विचारोत्तेजक लेख आत्मिक संतुष्टि,…
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संपादकीय
अकेलापन, दर्द और जीवन का दर्शन : एक संवाद जिसने सोचने पर मजबूर कर दिया
अकेलापन और जीवन का दर्शन हर व्यक्ति के जीवन में किसी न किसी रूप में उपस्थित रहता है। कुछ लोग…
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गुस्ताख दिल
दर्द में राहत, स्मृतियों का सहारा और समय का ध्रुव सत्य
(यह कोई कहानी नहीं है। यह कोई उपदेश भी नहीं है। यह किसी दर्शनशास्त्री का व्याख्यान या किसी मनोवैज्ञानिक का…
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