आज भी बूंद-बूंद पानी को मोहताज, जल संकट ने रोकी युवाओं की शादियां
वर्षों से पेयजल संकट झेल रहे ग्रामीण, करोड़ों की पानी टंकी बनी लेकिन नहीं पहुंचा एक बूंद पानी
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले का मुड़हरा गांव आज भी गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। नमामि गंगे योजना के तहत करोड़ों रुपये की लागत से पानी की टंकी और पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन ढाई साल बाद भी ग्रामीणों को नलों से पानी नहीं मिल रहा है। गांव की महिलाएं रोजाना घंटों पानी भरने में बिताती हैं, जबकि युवाओं की शादियां भी पानी की कमी के कारण प्रभावित हो रही हैं। प्रशासन ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन ग्रामीण अब स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
महोबा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई स्थानों पर योजनाओं की सफलता पर सवाल खड़े करती नजर आती है। महोबा जिला मुख्यालय से लगभग छह किलोमीटर दूर स्थित मुड़हरा गांव इसका एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। करीब दो हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव के लोग आज भी पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि गांव की महिलाओं का अधिकांश समय पानी लाने और ढोने में ही बीत जाता है, जबकि युवाओं के विवाह तक इस समस्या से प्रभावित हो रहे हैं।
नमामि गंगे योजना की टंकी बनी, लेकिन घरों तक नहीं पहुंचा पानी
ग्रामीणों के अनुसार गांव में करीब ढाई वर्ष पहले केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपये की लागत से विशाल पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था। इसके साथ ही पूरे गांव में पाइपलाइन नेटवर्क भी बिछाया गया ताकि प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।
ग्रामीण बताते हैं कि परियोजना की परीक्षण प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है और एक बार पानी की टेस्टिंग भी कराई गई थी। इसके बावजूद आज तक गांव के किसी भी घर के नल से पानी की एक बूंद तक नहीं निकली। नतीजतन लोगों को पुराने और सीमित जल स्रोतों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
केवल तीन हैंडपंप और एक कुएं के सहारे गुजर-बसर
मुड़हरा गांव में पेयजल की उपलब्धता बेहद सीमित है। गांव में मौजूद तीन हैंडपंपों में से दो का पानी खारा बताया जाता है, जो पीने योग्य नहीं है। ऐसे में पूरे गांव की आबादी एकमात्र उपयोगी हैंडपंप और मंदिर के पास स्थित एक कुएं पर निर्भर है।
हर दिन सुबह से लेकर शाम तक ग्रामीणों की लंबी कतारें पानी भरने के लिए लगी रहती हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे घंटों इंतजार करने के बाद अपने घरों के लिए पानी ले जा पाते हैं। गर्मी के मौसम में स्थिति और अधिक विकट हो जाती है, जब जल स्रोतों पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है।
पानी ढोते-ढोते बीत रही महिलाओं की जिंदगी
गांव की महिलाओं का कहना है कि उनकी पूरी जिंदगी पानी की व्यवस्था करने में ही निकल रही है। सुबह होते ही उन्हें घर के कामकाज छोड़कर पानी भरने जाना पड़ता है। कई बार एक दिन में कई चक्कर लगाने पड़ते हैं ताकि परिवार की जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी जुटाया जा सके।
महिलाओं का कहना है कि पानी की समस्या का असर केवल घरेलू जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। कई बार बच्चों को भी पानी भरने के लिए साथ जाना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित होती है। ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि वर्षों से समस्या बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
जल संकट बना विवाह में सबसे बड़ी बाधा
मुड़हरा गांव का जल संकट अब सामाजिक समस्या का रूप ले चुका है। ग्रामीणों का दावा है कि गांव में पानी की कमी के कारण कई युवकों और युवतियों के विवाह प्रभावित हो रहे हैं। बताया जाता है कि लगभग 40 से अधिक युवतियों और युवकों के रिश्ते केवल इस वजह से नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि लोग ऐसे गांव में अपनी बेटियों की शादी करने से बच रहे हैं जहां पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब विवाह के लिए रिश्ते आते हैं तो सबसे पहले गांव की बुनियादी सुविधाओं की जानकारी ली जाती है। जैसे ही पानी की समस्या की जानकारी मिलती है, अधिकांश परिवार रिश्ता आगे बढ़ाने से इंकार कर देते हैं। इससे कई युवक-युवतियां विवाह योग्य आयु पार करने की स्थिति में पहुंच रहे हैं।
मेहमानों के सामने भी शर्मिंदगी झेल रहे ग्रामीण
गांव के लोगों का कहना है कि पानी की कमी के कारण उन्हें सामाजिक आयोजनों में भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि किसी के घर रिश्तेदार या मेहमान आ जाते हैं तो उनके लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था करना चुनौती बन जाता है।
ग्रामीणों ने बताया कि कई बार मेहमानों को स्नान के लिए तालाब का सहारा लेना पड़ता है। वहीं शादी-विवाह जैसे बड़े आयोजनों में बाहर से पानी के टैंकर मंगाने पड़ते …
जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ग्रामीणों में नाराजगी
लगातार बनी हुई इस समस्या को लेकर गांव के लोगों में जनप्रतिनिधियों के प्रति गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय नेता और जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद गांव की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं देता।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि गांव तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है तो यह योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
प्रशासन ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
गांव में बढ़ते असंतोष और जल संकट को लेकर प्रशासन भी सक्रिय हुआ है। इस संबंध में महोबा के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) शिव ध्यान पांडेय ने मामले की जानकारी होने पर जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग से रिपोर्ट प्राप्त कर समस्या के समाधान के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब आश्वासनों से अधिक जमीन पर परिणाम देखने की जरूरत है। उनका मानना है कि जब तक पानी की टंकी से नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं होती, तब तक गांव की परेशानियां समाप्त नहीं होंगी।
महोबा का मुड़हरा गांव आज भी विकास और बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक तस्वीर को उजागर कर रहा है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई जलापूर्ति योजना के बावजूद ग्रामीणों का बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करना प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की खामियों को सामने लाता है। यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया तो यह जल संकट आने वाले समय में और गंभीर सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियां पैदा कर सकता है।







