आत्मसम्मान
-
समीक्षा
‘किराए का बाप’ : रक्त से नहीं, उत्तरदायित्व से बनते रिश्तों का असाधारण आख्यान
समीक्षक : पूर्णेंदु झा पुस्तक : किराए का बाप लेखक : अनिल अनूप प्रकाशक : समाचार दर्पण प्रकाशन संस्करण :…
Read More » -
संपादकीय
जब घर में आदमी अदृश्य हो जाता है : भावनात्मक उपेक्षा का सबसे बड़ा सच
✍️ संपादकीय भारत को परिवारों का देश कहा जाता है। यह वह समाज है जहाँ माता-पिता, दादा-दादी, पति-पत्नी, बेटे-बेटियाँ और…
Read More » -
तुम अभी हार नहीं सकती
ज़िंदगी, तुम अभी हार नहीं सकती –3 ; मैं भागी नहीं थी… मैं अपने बच्चों को बचाने निकली थी
✍️ अनिल अनूप अब तक आपने पढ़ा… पहले अंक “रोटी की तलाश में निकला था, रास्ते में शब्द मिले थे”…
Read More » -
हिंदी कहानी
भगवान की तलाश और एक परिवार की खामोश कहानी
श्रवण कुमार श्रीवास्तव सुबह के पाँच बजते ही घर में घंटी की आवाज़ गूँज उठती। अगरबत्ती की सुगंध पूरे आँगन…
Read More » -
भगवान किसके साथ रहता है?
कहानीकार: श्रवण कुमार श्रीवास्तव सुबह के पाँच बजते ही घर में घंटी की आवाज़ गूँज उठती। अगरबत्ती की सुगंध पूरे…
Read More » -
तुम अभी हार नहीं सकती
ज़िंदगी, तुम अभी हार नहीं सकती, अंक–2 : वह महिला, जिसने मुझे मेरे अंदर से ही मिलवाया
लेखक अनिल अनूप जिस सुबह मैं केवल एक आदमी नहीं, अपने भाग्य से मिलने निकला था। रात भर नींद आँखों…
Read More » -
विचार
औकात….? इंसान की हैसियत का सच, समाज का छल और आत्मसम्मान की अंतिम लड़ाई
✍️अनिल अनूप एक शब्द बहुत आसानी से लोगों के जंहा पर चढ़ जाता है – “औकात”। किसी को सपने में…
Read More »