15 जून को होगा पुरुषोत्तम मास का समापन, पुनः शुरू होंगे विवाह और अन्य मांगलिक कार्य
पूरे मास किए गए जप, तप और व्रत का उद्यापन करने से प्राप्त होती है भगवान विष्णु की विशेष कृपा
15 जून को पुरुषोत्तम मास का समापन होने जा रहा है, जिसके साथ ही एक माह से स्थगित विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य पुनः प्रारंभ हो जाएंगे। सलेमपुर के धर्माचार्य आचार्य अजय शुक्ल के अनुसार पुरुषोत्तम मास के दौरान किए गए जप, तप, व्रत और पूजा-पाठ का विधिवत उद्यापन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि समापन के समय भगवान विष्णु की पूजा तथा दान-पुण्य करने से कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
रिपोर्ट : इरफान अली लारी
सलेमपुर, देवरिया। हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और दुर्लभ माने जाने वाले पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) का समापन 15 जून को होने जा रहा है। इसके साथ ही पिछले एक महीने से स्थगित सभी मांगलिक और शुभ कार्यों का मार्ग पुनः प्रशस्त हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इस अवधि में श्रद्धालु विशेष रूप से जप, तप, व्रत, दान, पूजा-पाठ तथा धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति का प्रयास करते हैं।
सलेमपुर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं धर्माचार्य आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के समाप्त होते ही विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत तथा अन्य शुभ एवं मांगलिक कार्य पुनः प्रारंभ हो जाएंगे। एक माह तक धार्मिक साधना में लगे श्रद्धालुओं के लिए यह समय अपने संकल्पों को पूर्ण करने और उनका विधिवत उद्यापन करने का भी अवसर है।
पुरुषोत्तम मास का धार्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार जब किसी वर्ष में सौर और चंद्र गणना के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है, तब उसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों में इसे भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है। यही कारण है कि इस मास में किए गए धार्मिक कार्यों का फल सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक बताया गया है।
आचार्य अजय शुक्ल के अनुसार पुरुषोत्तम मास आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना का विशेष काल माना जाता है। इस अवधि में भक्तगण श्रीहरि विष्णु की आराधना कर अपने जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति की कामना करते हैं। इस दौरान किए गए व्रत, जप और तप से व्यक्ति को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है तथा जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं।
समापन पर अवश्य करें उद्यापन
धर्माचार्य आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि जो श्रद्धालु पूरे पुरुषोत्तम मास में नियमित रूप से जप, तप, व्रत, भजन-कीर्तन, श्रीमद्भागवत पाठ या अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते रहे हैं, उन्हें मास के समापन पर उद्यापन अवश्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उद्यापन के रूप में भगवान विष्णु की विशेष पूजा, सत्यनारायण भगवान की कथा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, हवन या अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जा सकते हैं। उद्यापन का उद्देश्य पूरे मास की साधना को पूर्णता प्रदान करना और भगवान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना होता है।
धार्मिक मान्यता है कि उद्यापन करने से साधना का पूर्ण फल प्राप्त होता है तथा भगवान विष्णु की कृपा सदैव भक्त पर बनी रहती है। वहीं उद्यापन न करने पर साधना का अपेक्षित फल अधूरा रह सकता है।
दान-पुण्य का मिलता है कई गुना फल
पुरुषोत्तम मास के समापन अवसर पर दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। आचार्य अजय शुक्ल के अनुसार इस दिन ब्राह्मणों, साधु-संतों, निर्धन एवं जरूरतमंद लोगों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान अवश्य करना चाहिए।
दान के रूप में अन्न, वस्त्र, फल, दक्षिणा, धार्मिक ग्रंथ, गौसेवा अथवा जरूरतमंदों की सहायता की जा सकती है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि पुरुषोत्तम मास के अंतिम दिनों में किया गया दान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि दान केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने का माध्यम भी है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति को मानसिक संतोष प्राप्त होता है।
अब शुरू होंगे विवाह और अन्य शुभ संस्कार
पुरुषोत्तम मास के दौरान विवाह सहित कई मांगलिक कार्यों को स्थगित रखा जाता है। इसके पीछे धार्मिक परंपरा और ज्योतिषीय मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। 15 जून को पुरुषोत्तम मास समाप्त होने के बाद पुनः शुभ मुहूर्तों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार, नामकरण तथा अन्य धार्मिक एवं पारिवारिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो जाएगा।
इस कारण विवाह और अन्य समारोहों की तैयारियों में लगे परिवारों के बीच भी उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। कई परिवार लंबे समय से शुभ मुहूर्त की प्रतीक्षा कर रहे थे, जिन्हें अब अपने कार्यक्रम संपन्न कराने का अवसर मिलेगा।
आध्यात्मिक साधना का संदेश देता है पुरुषोत्तम मास
धर्माचार्यों का मानना है कि पुरुषोत्तम मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को संयम, सेवा, भक्ति और आत्मचिंतन का संदेश भी देता है। इस पूरे महीने में व्यक्ति अपने जीवन की कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करता है और ईश्वर के प्रति अपनी आस्था को मजबूत बनाता है।
आचार्य अजय शुक्ल ने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि पुरुषोत्तम मास के समापन पर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें, उद्यापन संपन्न करें तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता करके इस पुण्यकाल का लाभ प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा और सेवा भाव से किए गए धार्मिक कार्य निश्चित रूप से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
15 जून को पुरुषोत्तम मास के समापन के साथ ही धार्मिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण अध्याय पूर्ण होगा। जहां एक ओर श्रद्धालु अपने व्रत, जप और तप का उद्यापन करेंगे, वहीं दूसरी ओर विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की पुनः शुरुआत से सामाजिक और पारिवारिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी। धर्माचार्यों के अनुसार यह समय भगवान विष्णु की आराधना, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के फल को प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है।







