100 करोड़ की नजूल जमीन पर चला बुलडोजर प्रशासन ; चर्चित रानी कोठी पर कब्जा खत्म
रीतेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच मंगलवार को सीतापुर शहर में जिला प्रशासन ने एक बड़ी और चर्चित कार्रवाई को अंजाम दिया। शहर के बीचोंबीच स्थित चर्चित “रानी कोठी” को नजूल भूमि घोषित करते हुए प्रशासनिक टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में परिसर को कब्जा मुक्त करा लिया। सुबह शुरू हुई इस कार्रवाई ने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया और दिनभर यह मामला चर्चा का केंद्र बना रहा।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार जिस भूमि पर रानी कोठी स्थित है, उसकी वर्तमान बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। लंबे समय से विवादों में घिरी इस संपत्ति पर प्रशासन की कार्रवाई को नजूल भूमि पर चल रहे अभियान की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
सुबह-सुबह पहुंची प्रशासनिक टीम, तोड़ा गया मुख्य ताला
मंगलवार सुबह जिला प्रशासन की टीम भारी पुलिस फोर्स के साथ रानी कोठी परिसर पहुंची। अधिकारियों की निगरानी में परिसर के मुख्य गेट का ताला तोड़ा गया और पूरे भवन सहित आसपास की भूमि को प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया। कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
जैसे ही प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हुई, इलाके में स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। आसपास के बाजारों और गलियों में पूरे दिन इस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं होती रहीं। लोगों का कहना था कि वर्षों से विवादों में घिरी इस संपत्ति पर आखिरकार प्रशासन ने निर्णायक कदम उठाया है।
1906 में उद्यान के लिए दी गई थी भूमि
राजस्व अभिलेखों के मुताबिक यह भूमि वर्ष 1906 में उद्यान विकसित करने के उद्देश्य से 30 वर्षों की लीज पर दी गई थी। प्रशासन का कहना है कि लीज की अवधि वर्ष 1936 में समाप्त हो गई थी, लेकिन उसके बाद भी जमीन पर कब्जा बना रहा। समय बीतने के साथ यह मामला राजस्व रिकॉर्ड और प्रशासनिक फाइलों में विवाद का विषय बन गया।
सूत्रों के अनुसार कई वर्षों से इस भूमि की स्थिति को लेकर जांच और कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। प्रशासन ने दस्तावेजों और अभिलेखों की समीक्षा के बाद इसे नजूल भूमि मानते हुए कब्जा हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी।
जिलाधिकारी न्यायालय के आदेश के बाद हुई कार्रवाई
मामले की सुनवाई के बाद जिलाधिकारी न्यायालय ने 2 मई 2026 को कब्जाधारकों को नोटिस जारी किया था। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि 15 दिनों के भीतर भूमि खाली कर प्रशासन को सौंप दी जाए। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी जब कब्जा नहीं हटाया गया तो जिला प्रशासन ने मंगलवार को मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी।
अधिकारियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश और राजस्व अभिलेखों के आधार पर की गई है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
किन लोगों के कब्जे में थी रानी कोठी?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार इस संपत्ति पर लेफ्टिनेंट कर्नल विक्रम शर्मा और मधुलिका त्रिपाठी का कब्जा बताया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक टीम ने भवन के भीतर मौजूद हिस्सों की जांच की और पूरे परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया।
हालांकि कार्रवाई के दौरान किसी बड़े विरोध या तनाव की स्थिति सामने नहीं आई, लेकिन एहतियात के तौर पर पूरे इलाके को पुलिस निगरानी में रखा गया। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों को समझाते हुए बताया कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
पूरे परिसर में लगाए गए 17 ताले
कार्रवाई के बाद प्रशासन ने दोबारा कब्जे की आशंका को देखते हुए पूरे परिसर को सील करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी। अधिकारियों की मौजूदगी में रानी कोठी परिसर में कुल 17 ताले लगाए गए, ताकि भविष्य में कोई व्यक्ति दोबारा अंदर प्रवेश न कर सके।
इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट मीनाक्षी पाण्डेय, नायब तहसीलदार महेंद्र तिवारी और नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी वैभव त्रिपाठी मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई।
नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी वैभव त्रिपाठी ने कहा कि नजूल भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन का अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों को कब्जा मुक्त कराना प्रशासन की प्राथमिकता है और भविष्य में भी इसी तरह सख्त कदम उठाए जाएंगे।
शहर में चर्चा का केंद्र बनी कार्रवाई
रानी कोठी पर हुई यह कार्रवाई पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से यह संपत्ति विवादों में थी और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा था। कई लोगों ने इसे सरकारी भूमि संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम बताया।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस कार्रवाई से उन लोगों को स्पष्ट संदेश गया है जो वर्षों से सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा जमाए हुए हैं। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन इसी तरह निष्पक्ष कार्रवाई करता रहा तो शहर में सरकारी संपत्तियों की स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
नजूल भूमि पर सख्ती का बड़ा संकेत
विशेषज्ञों की मानें तो प्रदेशभर में नजूल भूमि पर कब्जों को लेकर सरकार लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। सीतापुर में रानी कोठी पर हुई कार्रवाई को उसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जिले में अन्य विवादित सरकारी संपत्तियों की भी जांच की जा रही है और भविष्य में ऐसे मामलों में कार्रवाई तेज हो सकती है।
सरकारी अभिलेखों के अनुसार नजूल भूमि वह संपत्ति होती है जो सरकार के नियंत्रण में होती है और जिसका उपयोग सार्वजनिक कार्यों या संस्थागत जरूरतों के लिए किया जाता है। ऐसी भूमि पर अवैध कब्जे को प्रशासन गंभीर श्रेणी का मामला मानता है।
प्रशासनिक कार्रवाई से बना सख्त संदेश
रानी कोठी पर चली इस कार्रवाई ने यह साफ संकेत दिया है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के मामलों में अब प्रशासन कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है। भारी पुलिस बल, अधिकारियों की मौजूदगी और कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई कार्रवाई ने पूरे जिले में प्रशासन की सख्ती का संदेश पहुंचाया है।
शहर के लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन इसी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई करता रहा तो सरकारी जमीनों पर वर्षों से चले आ रहे विवादों का समाधान संभव हो सकेगा। फिलहाल रानी कोठी पूरी तरह प्रशासनिक नियंत्रण में है और आगे की कार्रवाई को लेकर राजस्व विभाग आवश्यक प्रक्रिया में जुट गया है।








