20 गांवों में दो दिन से बिजली नदारद, भयंकर गर्मी में बेहाल लोग, विभाग लाजवाब
आंधी-बारिश के बाद ठप हुई आपूर्ति, जर्जर लाइनें बनीं परेशानी की जड़; ग्रामीणों ने उठाई स्थायी समाधान की मांग
रीतेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
सीतापुर। जिले के सकरन विकासखंड क्षेत्र में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। तम्बौर पावर हाउस के बेहटा फीडर से जुड़े करीब 20 गांव पिछले दो दिनों से गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। शनिवार रात आई तेज आंधी और बारिश के बाद बाधित हुई विद्युत आपूर्ति अभी तक पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है। उमस भरी गर्मी और लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती से ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हालात ऐसे हैं कि लोग दिन-रात बिजली का इंतजार कर रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
खानपुर न्याय पंचायत के अंतर्गत आने वाले अदवारी ग्राम सभा सहित करीब 20 गांवों में लोग पिछले दो दिनों से बिजली संकट झेल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली कभी कुछ मिनटों के लिए आती है और फिर घंटों गायब हो जाती है। इससे न केवल लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई है, बल्कि भीषण गर्मी में छोटे बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों का जीवन भी कठिन हो गया है।
आंधी और बारिश के बाद बिगड़ी व्यवस्था
शनिवार रात तेज आंधी और बारिश के दौरान बेहटा फीडर की कई विद्युत लाइनों में स्पार्किंग हुई। लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर फ्यूज उड़ गए और बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। विभाग की ओर से मरम्मत कार्य शुरू किए जाने का दावा किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक अधिकांश गांवों में सामान्य आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी थी।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही यह समस्या हर साल सामने आती है। जर्जर बिजली लाइनें और पेड़ों से टकराते तार विभाग की लापरवाही की कहानी बयां करते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जाता।
रात में सिर्फ पांच-छह घंटे मिल रही बिजली
अदवारी ग्राम सभा समेत प्रभावित गांवों के लोगों का कहना है कि पिछले दो दिनों से बिजली की कोई समय-सारिणी नहीं है। दिन और रात में कई बार कटौती हो रही है। कई घरों में पूरी रात में केवल पांच से छह घंटे ही बिजली मिल रही है, जबकि बाकी समय लोग उमस और गर्मी में रहने को मजबूर हैं।
बिजली के बार-बार आने-जाने से घरेलू उपकरणों के खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की इस अनिश्चित व्यवस्था ने लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है।
भीषण गर्मी ने बढ़ाई मुश्किलें
बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर पड़ रहा है। कूलर और पंखे बंद रहने से लोग रातभर गर्मी और उमस से परेशान रहते हैं। कई परिवार खुले आंगन और छतों पर रात गुजारने को मजबूर हैं।
इसके अलावा मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि बिजली संकट ने सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।
पानी की आपूर्ति भी हुई प्रभावित
लगातार बिजली न मिलने से गांवों में पेयजल संकट भी गहराने लगा है। बिजली आधारित मोटर और सबमर्सिबल पंप बंद रहने के कारण घरों में पानी की टंकियां खाली हो रही हैं। लोगों को हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ रहा है। घरेलू कामकाज के साथ-साथ खेती से जुड़े कई छोटे कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
जर्जर लाइनें बनीं बड़ी वजह
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की बिजली लाइनें वर्षों पुरानी हो चुकी हैं। कई स्थानों पर तार पेड़ों की शाखाओं से होकर गुजरते हैं। हल्की बारिश या तेज हवा चलते ही शाखाएं तारों से टकराती हैं और स्पार्किंग होने लगती है। परिणामस्वरूप फ्यूज उड़ जाते हैं और पूरे इलाके की बिजली घंटों या कई बार दो-दो दिनों तक बाधित रहती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो जर्जर तार बदले गए और न ही पेड़ों की नियमित छंटाई कराई गई।
ग्रामीणों ने उठाई स्थायी समाधान की मांग
मालती, उमेश कुमार, राहुल कुमार सहित कई ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से मांग की है कि केवल अस्थायी मरम्मत करने के बजाय पूरे क्षेत्र की पुरानी बिजली लाइनों को बदला जाए। साथ ही पेड़ों की नियमित छंटाई कराई जाए ताकि बारिश के मौसम में बार-बार बिजली बाधित न हो।
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल यही समस्या दोहराई जाती है। यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में लोगों की परेशानियां और बढ़ेंगी।
जेई का फोन नहीं उठा, विभाग नहीं दे सका जवाब
बिजली संकट को लेकर संबंधित जूनियर इंजीनियर (जेई) आकाश कुमार से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ। समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। इससे ग्रामीणों में विभाग के प्रति नाराजगी और बढ़ गई है।
एसडीओ ने जल्द बहाली का दिया भरोसा
उपखंड अधिकारी (एसडीओ) आँचल मिश्रा ने बताया कि तेज आंधी और भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए, जिससे 33 केवी लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। इसी वजह से विद्युत आपूर्ति प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा कि विभाग की टीमें लगातार मरम्मत कार्य में जुटी हैं और क्षतिग्रस्त लाइनों को दुरुस्त किया जा रहा है। मौसम सामान्य रहने पर जल्द ही सभी प्रभावित गांवों में नियमित बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
स्थायी समाधान की मांग तेज
लगातार दो दिनों से बिजली संकट झेल रहे ग्रामीण अब केवल अस्थायी मरम्मत नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहते हैं। उनका कहना है कि जब तक जर्जर विद्युत लाइनों को बदलने, पेड़ों की नियमित छंटाई कराने और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने की ठोस योजना नहीं बनेगी, तब तक हर बारिश में यही हालात बने रहेंगे।









