पेंशन के लिए ठेले पर बैंक पहुंची बुजुर्ग महिला, व्यवस्था पर उठे सवाल; बैंक प्रबंधन ने दी सफाई
कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले से सामने आई एक घटना ने बुजुर्गों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं और बैंकिंग व्यवस्था की संवेदनशीलता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक वृद्ध महिला को अपनी पारिवारिक पेंशन प्राप्त करने के लिए घायल अवस्था में ठेले पर लिटाकर बैंक ले जाया गया। इस घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि आखिर डिजिटल और आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था के इस दौर में एक बुजुर्ग महिला को इतनी परेशानी क्यों झेलनी पड़ी।
मामला जिले के फतेहगढ़ क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां एक वृद्ध महिला अपने टूटे पैर के बावजूद बैंक की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के लिए मजबूर हुईं। घटना ने न केवल बैंकिंग प्रक्रियाओं बल्कि बुजुर्ग और दिव्यांग नागरिकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को भी उजागर कर दिया है।
सड़क दुर्घटना के बाद बिस्तर पर थीं महिला
जानकारी के अनुसार वृद्ध महिला किशन प्यारी कुछ दिन पहले सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थीं। हादसे में उनके पैर में गंभीर चोट आई और फ्रैक्चर होने के कारण वह चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गईं। चिकित्सकों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी और सामान्य गतिविधियों से दूर रहने को कहा था।
परिवार के मुताबिक महिला की स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह स्वयं खड़ी होकर चल सकें या किसी वाहन में सामान्य तरीके से बैठ सकें। बावजूद इसके उन्हें बैंक जाना पड़ा क्योंकि पेंशन की राशि निकालने के लिए बैंक में उनकी उपस्थिति आवश्यक बताई गई थी।
पेंशन के लिए बैंक पहुंचना बना मजबूरी
परिजनों का कहना है कि महिला की पारिवारिक पेंशन उनके खाते में आती है और उसी धनराशि से परिवार की कई जरूरी जरूरतें पूरी होती हैं। आर्थिक परिस्थितियां ऐसी नहीं थीं कि भुगतान में लंबे समय तक देरी की जा सके। परिवार का आरोप है कि बैंक की ओर से यह कहा गया कि खाताधारक को स्वयं उपस्थित होकर पहचान सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी तथा अंगूठे का निशान देना आवश्यक है। इसी वजह से परिवार ने काफी प्रयासों के बाद महिला को बैंक ले जाने का निर्णय लिया।
बताया जाता है कि महिला को कार में बैठाना संभव नहीं था क्योंकि पैर में गंभीर चोट थी। वहीं एंबुलेंस की व्यवस्था भी तत्काल नहीं हो सकी। ऐसे में परिवार ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ठेले का सहारा लिया और महिला को उसी पर लिटाकर बैंक तक पहुंचाया।
ठेले पर बैंक पहुंची महिला, लोग देखते रह गए
जब घायल महिला को ठेले पर लिटाकर बैंक परिसर तक लाया गया तो वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। कई लोगों ने इस दृश्य को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया। देखते ही देखते मामला चर्चा का विषय बन गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर बैंकिंग व्यवस्था में बुजुर्गों और असहाय लोगों के लिए विशेष प्रावधान प्रभावी तरीके से लागू हों तो ऐसी परिस्थितियां पैदा ही न हों। कई लोगों ने सवाल उठाया कि घर से बाहर निकलने में असमर्थ व्यक्ति के लिए वैकल्पिक प्रक्रिया उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई।
26 वर्षों से मिल रही है पारिवारिक पेंशन
परिवार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार किशन प्यारी के पति बिजली विभाग में कार्यरत थे। लगभग 26 वर्ष पहले उनके निधन के बाद से महिला को पारिवारिक पेंशन मिल रही है। यही पेंशन उनके जीवन-यापन का प्रमुख सहारा बनी हुई है। वर्तमान में वह अपने बेटे संजीव पाल के साथ रहती हैं। संजीव मजदूरी और ढुलाई से जुड़े कार्य करते हैं तथा ठेले के माध्यम से परिवार का खर्च चलाते हैं। वहीं उनका बेटा मनु डिजिटल माध्यमों पर सक्रिय है और ऑनलाइन वीडियो सामग्री तैयार करता है।
परिवार का कहना है कि सीमित आय और बढ़ते खर्चों के बीच पेंशन की राशि उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए भुगतान में देरी उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक संकट पैदा कर सकती थी।
बैंक कर्मचारियों पर सहयोग न करने का आरोप
परिजनों ने आरोप लगाया कि जब वे बैंक पहुंचे तो उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उनका कहना है कि उन्होंने महिला की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन भुगतान की प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट राहत नहीं दी गई।
परिवार के अनुसार यदि पहले से घर पर सत्यापन या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दे दी जाती तो घायल महिला को इतनी परेशानी उठाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। हालांकि बैंक कर्मचारियों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इस घटना ने आम लोगों के बीच कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
बैंक प्रबंधन ने दी अपनी सफाई
मामले के चर्चा में आने के बाद बैंक प्रबंधन की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। शाखा प्रबंधक प्रवेश कुमार वर्मा ने कहा कि बैंक की ओर से परिवार को पहले ही आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा दी गई थी।
उन्होंने बताया कि यदि कोई खाताधारक बीमारी, वृद्धावस्था या शारीरिक असमर्थता के कारण बैंक नहीं पहुंच सकता है तो बैंक को इसकी सूचना दी जानी चाहिए। ऐसी परिस्थितियों में बैंक कर्मचारियों को घर भेजकर पहचान सत्यापन कराया जा सकता है अथवा अन्य वैधानिक विकल्पों के माध्यम से भुगतान की व्यवस्था की जा सकती है। शाखा प्रबंधक के अनुसार महिला के घायल होने की सूचना मिलने पर परिवार को कुछ समय प्रतीक्षा करने की सलाह भी दी गई थी। साथ ही यह भी कहा गया था कि जरूरत पड़ने पर घर जाकर प्रक्रिया पूरी करने की व्यवस्था संभव है।
बुजुर्गों के लिए बेहतर व्यवस्था की जरूरत
यह घटना केवल एक परिवार की परेशानी नहीं बल्कि उस व्यापक चुनौती की ओर संकेत करती है जिसका सामना देशभर में लाखों बुजुर्ग और दिव्यांग नागरिक करते हैं। तकनीकी प्रगति और डिजिटल बैंकिंग के बावजूद कई बार प्रक्रियाओं की जानकारी के अभाव या समन्वय की कमी के कारण लोगों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकों को वरिष्ठ नागरिकों और शारीरिक रूप से अक्षम ग्राहकों के लिए घर-घर सेवा, मोबाइल सत्यापन और सरल भुगतान व्यवस्था को और प्रभावी बनाना चाहिए। साथ ही ग्राहकों को इन सुविधाओं के बारे में स्पष्ट जानकारी देना भी उतना ही जरूरी है।
फर्रुखाबाद की यह घटना संवेदनशील बैंकिंग व्यवस्था की आवश्यकता को रेखांकित करती है। एक ओर परिवार का दावा है कि मजबूरी में घायल महिला को ठेले पर बैंक ले जाना पड़ा, वहीं दूसरी ओर बैंक प्रबंधन का कहना है कि वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध थी। सच चाहे जो भी हो, लेकिन यह मामला यह जरूर बताता है कि बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों तक सुविधाओं की जानकारी और पहुंच सुनिश्चित करना समय की मांग है। ताकि भविष्य में किसी भी वृद्ध नागरिक को अपनी पेंशन पाने के लिए ऐसी कठिन और पीड़ादायक परिस्थितियों से न गुजरना पड़े।







