देवरिया

पेपर लीक पर भड़का विद्यार्थी परिषद, विश्वविद्यालय प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम

योग परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप से मचा हड़कंप, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में आयोजित बी.ए. चतुर्थ सेमेस्टर की योग विषय परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।

चित्रकूट में सामने आए इस मामले ने विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था और गोपनीयता प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिषद पदाधिकारियों का आरोप है कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही एक छात्रा के पास प्रश्नपत्र मौजूद था, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि परीक्षा की गोपनीयता भंग हुई है। इस घटना को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच भी चिंता का माहौल बना हुआ है।

परीक्षा शुरू होने से पहले छात्रा के पास पहुंचा प्रश्नपत्र

अभाविप कार्यकर्ताओं द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि 12 मई को आयोजित बी.ए. चतुर्थ सेमेस्टर की योग विषय परीक्षा में गंभीर अनियमितता सामने आई। परिषद का दावा है कि परीक्षा प्रारंभ होने से पहले ही एक छात्रा के पास प्रश्नपत्र उपलब्ध था।

विद्यार्थी परिषद ने इसे केवल एक सामान्य त्रुटि न मानते हुए शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा हमला बताया है। परिषद नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो विश्वविद्यालयों में परीक्षाओं की निष्पक्षता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

अभाविप पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही और कमजोर निगरानी व्यवस्था के कारण इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि यदि परीक्षा प्रश्नपत्र छात्रों तक पहले पहुंच रहे हैं तो यह एक संगठित लापरवाही या आंतरिक मिलीभगत का संकेत हो सकता है।

सीटिंग प्लान न बनने से बढ़ रही अव्यवस्था

विद्यार्थी परिषद ने अपने ज्ञापन में विश्वविद्यालय प्रशासन पर परीक्षा संचालन में लापरवाही का भी आरोप लगाया। परिषद नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय में नियमित रूप से सीटिंग प्लान तैयार नहीं किया जाता, जिसके कारण परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्था फैलती है।

उन्होंने कहा कि बिना सुव्यवस्थित सीटिंग व्यवस्था के परीक्षाओं में पारदर्शिता प्रभावित होती है और नकल या अन्य अनियमितताओं की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। परिषद का कहना है कि परीक्षा संचालन के लिए स्पष्ट और तकनीकी रूप से मजबूत व्यवस्था आवश्यक है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इस दिशा में गंभीर नहीं दिख रहा।

कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि यदि समय रहते परीक्षा प्रणाली में सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं सामने आ सकती हैं।

“छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”

अभाविप के नगर मंत्री आनंद जायसवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय में पेपर लीक जैसी घटनाएं मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय हैं। उन्होंने कहा कि हजारों विद्यार्थी पूरे वर्ष मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं उनकी मेहनत और विश्वास दोनों को चोट पहुंचाती हैं।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दोषियों को बचाने की कोशिश की गई तो विद्यार्थी परिषद बड़ा आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी। आनंद जायसवाल ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखने के लिए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई बेहद जरूरी है।

उनका कहना था कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन केवल आश्वासन देकर मामले को दबाने का प्रयास करेगा तो छात्र संगठन व्यापक जनआंदोलन शुरू करेगा।

शिक्षा व्यवस्था की साख पर उठे सवाल

नगर सह मंत्री अंश प्रताप यादव ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि इससे पूरे शिक्षा तंत्र की साख प्रभावित होती है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है। यदि प्रश्नपत्र पहले से छात्रों तक पहुंच रहे हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है।

अंश प्रताप यादव ने कहा कि ऐसी घटनाओं से विद्यार्थियों का मनोबल टूटता है और योग्य छात्रों में निराशा बढ़ती है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषियों को सार्वजनिक रूप से चिन्हित कर उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

15 दिन में जांच समिति गठित करने का आश्वासन

ज्ञापन सौंपे जाने के बाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने परिषद कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए 15 दिनों के भीतर जांच समिति गठित की जाएगी।

रजिस्ट्रार ने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से कराई जाएगी और यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि विद्यार्थी परिषद ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तय समयसीमा के भीतर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएगा। परिषद ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति की पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

छात्रों में बढ़ रहा आक्रोश

पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद छात्रों के बीच भी नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। कई छात्रों का कहना है कि यदि परीक्षाओं की गोपनीयता ही सुरक्षित नहीं रहेगी तो मेहनती विद्यार्थियों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा।

छात्रों का मानना है कि विश्वविद्यालयों में लगातार सामने आ रही परीक्षा अनियमितताओं पर सरकार और प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे। विद्यार्थियों ने मांग की है कि परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से और अधिक सुरक्षित बनाया जाए ताकि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लग सके।

बड़ी संख्या में मौजूद रहे परिषद कार्यकर्ता

इस दौरान विद्यार्थी परिषद के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें इकाई अध्यक्ष विजय केसरवानी, तहसील संयोजक राजापुर प्रशांत त्रिपाठी, तहसील संयोजक कर्वी पियूष त्रिपाठी, नगर मंत्री शिवरामपुर पवन गुप्ता, अमन तिवारी, नगर सह मंत्री शाश्वत त्रिपाठी, अर्पित तिवारी, निर्भय प्रताप, सतीश निषाद, संस्कार सोनी, हिमांशु रैकवार और नगर सह मंत्री योगेंद्र सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।

परिषद कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि छात्र हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और यदि जरूरत पड़ी तो विश्वविद्यालय परिसर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

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