चित्रकूट

रिश्वतखोरी पर बड़ा प्रहार: जमीन की नापजोख के बदले 20 हजार मांगने वाला लेखपाल और निजी कर्मचारी गिरफ्तार

चित्रकूट में एंटी करप्शन का बड़ा एक्शन: जमीन की नापजोख के बदले 20 हजार रिश्वत लेते लेखपाल और निजी कर्मचारी गिरफ्तार

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

चित्रकूट उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत मंगलवार को एक बड़ी कार्रवाई सामने आई। भ्रष्टाचार निरोधक संगठन (एंटी करप्शन टीम) ने जमीन की नापजोख के नाम पर रिश्वत लेने के आरोप में एक लेखपाल और उसके निजी कर्मचारी को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया और सरकारी विभागों में भी इस घटना की चर्चा शुरू हो गई।

एंटी करप्शन टीम द्वारा की गई इस कार्रवाई को जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शिकायतकर्ता किसान की सूचना और प्रमाणों के आधार पर पूरी योजना तैयार की गई थी, जिसके बाद आरोपियों को जाल बिछाकर पकड़ा गया।

जमीन की नापजोख के लिए मांगी गई थी रिश्वत

जानकारी के अनुसार रैपुरा क्षेत्र के एक किसान को अपनी कृषि भूमि की नापजोख करानी थी। इसके लिए उसने संबंधित लेखपाल से संपर्क किया। आरोप है कि लेखपाल ने सरकारी प्रक्रिया पूरी करने के बजाय किसान से कार्य कराने के एवज में 20 हजार रुपये की मांग की।

किसान ने शुरुआत में यह रकम देने से इनकार किया, लेकिन बार-बार दबाव बनाए जाने पर उसने मामले की शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक संगठन से कर दी। शिकायत मिलने के बाद टीम ने पूरे मामले की जांच की और रिश्वत मांगने के आरोप को प्रथम दृष्टया सही पाया। इसके बाद अधिकारियों ने आरोपी को पकड़ने के लिए विशेष रणनीति तैयार की।

एंटी करप्शन टीम ने बिछाया जाल

शिकायत की पुष्टि होने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक टीम ने किसान को अपने संपर्क में रखा। टीम ने उसे आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कराते हुए रिश्वत की रकम उपलब्ध कराई और आरोपियों से तय स्थान पर मिलने को कहा गया।

मंगलवार को जैसे ही किसान निर्धारित स्थान पर पहुंचा और आरोपियों को रुपये सौंपे, पहले से निगरानी कर रही टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों को दबोच लिया। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई रैपुरा थाना क्षेत्र के मैकी मोड़ के पास की गई। टीम ने मौके पर ही रिश्वत की रकम बरामद कर ली और दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।

लेखपाल के साथ निजी कर्मचारी भी गिरफ्तार

इस मामले में केवल लेखपाल ही नहीं बल्कि उसका एक निजी कर्मचारी भी गिरफ्तार किया गया है। जांच में यह बात सामने आई कि रिश्वत की पूरी प्रक्रिया में निजी कर्मचारी की भी सक्रिय भूमिका थी।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सरकारी कर्मचारियों द्वारा निजी व्यक्तियों के माध्यम से ऐसे कार्य कराए जाते हैं, जिससे सीधे तौर पर जिम्मेदारी से बचा जा सके। हालांकि इस बार एंटी करप्शन टीम ने दोनों को एक साथ पकड़कर ऐसे नेटवर्क पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि निजी कर्मचारियों के माध्यम से होने वाले भ्रष्टाचार पर भी सख्ती से कार्रवाई आवश्यक है।

रैपुरा थाने में चल रही कानूनी कार्रवाई

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को रैपुरा थाने लाया गया, जहां उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य संबंधित धाराओं में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। एंटी करप्शन टीम के अधिकारियों ने आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई पूरी करते हुए मामले को आगे की विवेचना के लिए संबंधित इकाइयों को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है।

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सूत्रों के अनुसार आरोपियों से पूछताछ भी की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इससे पहले भी किसी प्रकार की रिश्वतखोरी या अवैध वसूली की शिकायतें उनसे जुड़ी रही हैं या नहीं।

ग्रामीणों में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में इस कार्रवाई की चर्चा है। ग्रामीणों का कहना है कि भूमि संबंधी मामलों में आम लोगों को अक्सर अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नापजोख, सीमांकन, दाखिल-खारिज और अन्य राजस्व कार्यों में रिश्वत मांगने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं।

कई ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि इस कार्रवाई के बाद सरकारी कर्मचारियों में जवाबदेही बढ़ेगी और आम लोगों को राहत मिलेगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि शिकायतकर्ता किसान साहस नहीं दिखाता तो यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दबकर रह जाता। इसलिए भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करने वालों को सुरक्षा और प्रोत्साहन मिलना चाहिए।

भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासन का संदेश

एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई को प्रशासन का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि सरकारी कार्यों के बदले रिश्वत मांगने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि भूमि और राजस्व विभाग आम नागरिकों से सीधे जुड़े हुए विभाग हैं। ऐसे में यदि इन विभागों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए तो लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत हो सकता है। जिले में हुई यह कार्रवाई न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ एक उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि यदि कोई नागरिक साहस के साथ शिकायत करता है तो कानून व्यवस्था उसके साथ खड़ी हो सकती है।

जनता से अपील

भ्रष्टाचार निरोधक विभाग लगातार लोगों से अपील करता रहा है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी किसी कार्य के बदले रिश्वत मांगता है तो उसकी शिकायत तत्काल संबंधित अधिकारियों या एंटी करप्शन हेल्पलाइन पर करें। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है और कानूनी प्रक्रिया के तहत दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

चित्रकूट में हुई यह कार्रवाई इसी बात का प्रमाण है कि जागरूक नागरिक और सक्रिय जांच एजेंसियां मिलकर भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगा सकती हैं।

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