23 अक्टूबर 2026 1:29 पूर्वाह्न

डीग दोहरा हत्याकांड : मां और प्रेमी पर जुड़वा बेटों की हत्या का आरोप, पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा

डीग के बडेसरा गांव में जुड़वा भाइयों की हत्या के मामले में मां और कथित प्रेमी की गिरफ्तारी को दर्शाती सांकेतिक क्राइम न्यूज फीचर इमेज।

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रिपोर्ट: हिमांशु मोदी

डीग (राजस्थान)। राजस्थान के डीग जिले के जनूथर थाना क्षेत्र के बडेसरा गांव में 13 वर्षीय जुड़वा भाइयों विनय और विष्णु की हत्या के मामले ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। जिन बच्चों की जिंदगी अभी पढ़ने-लिखने, खेलने और भविष्य के सपने देखने की उम्र में थी, उनकी मौत से गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक तथा आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड का खुलासा करने का दावा करते हुए मृतक बच्चों की मां प्रीति और उसके कथित प्रेमी राजेश जाट को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और पूछताछ के आधार पर दोनों को इस वारदात में आरोपी बनाया गया है।

मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि आरोप मृतक बच्चों के अपने ही पारिवारिक दायरे से जुड़े व्यक्तियों पर लगे हैं। हालांकि, किसी भी आरोपी का दोष अदालत में साबित होना अभी शेष है। पुलिस की जांच, उपलब्ध साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। फिलहाल इस घटना ने बच्चों की सुरक्षा, पारिवारिक रिश्तों और घरेलू परिस्थितियों से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जनूथर के बडेसरा गांव में दो भाइयों की हत्या से मचा हड़कंप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बडेसरा गांव में विनय और विष्णु की हत्या की घटना सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। दोनों भाई जुड़वा थे और उनकी उम्र महज 13 वर्ष बताई गई है। एक ही परिवार के दो बच्चों की असमय मौत ने ग्रामीणों को स्तब्ध कर दिया। घटना की जानकारी फैलते ही गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं और लोग वारदात की सच्चाई जानने के लिए पुलिस की कार्रवाई पर नजर रखने लगे।

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने और आरोपियों तक पहुंचने के लिए जांच की। प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर पारिवारिक परिस्थितियों तथा मृतक बच्चों के आसपास के घटनाक्रम की पड़ताल की गई। पुलिस के अनुसार, पूछताछ और जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए, जिनके आधार पर बच्चों की मां प्रीति और राजेश जाट को गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया, क्योंकि आरोप सीधे बच्चों के निकट पारिवारिक संबंधों से जुड़े लोगों पर केंद्रित हो गए।

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पुलिस जांच में अवैध संबंध उजागर होने के डर की बात सामने आई

पुलिस के अनुसार, इस दोहरे हत्याकांड के पीछे कथित प्रेम संबंध और उसके उजागर होने का डर एक प्रमुख वजह के रूप में सामने आया है। जांच में आरोप लगाया गया है कि प्रीति और राजेश जाट के बीच प्रेम संबंध थे और बच्चों को इस रिश्ते की जानकारी होने के कारण पारिवारिक तनाव पैदा हुआ था। पुलिस का दावा है कि इसी परिस्थिति में दोनों बच्चों को रास्ते से हटाने की साजिश रची गई।

हालांकि, इस कथित उद्देश्य और घटनाक्रम की पुष्टि न्यायिक जांच तथा अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही होगी। किसी भी आपराधिक मामले में केवल आरोप या पूछताछ के दौरान कथित स्वीकारोक्ति को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। पुलिस को वारदात से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर उपलब्ध साक्ष्यों को नियमानुसार अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।

घर में वारदात के बाद सूखे चारे के ढेर में छिपाए शव

पुलिस की जांच के मुताबिक, कथित वारदात रात के समय घर के भीतर अंजाम दी गई। इसके बाद साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से दोनों बच्चों के शव घर से कुछ दूरी पर स्थित कड़ब यानी सूखे चारे के ढेर में छिपा दिए गए थे। यह विवरण मामले को और भी गंभीर बनाता है, क्योंकि पुलिस अब हत्या के साथ-साथ घटनास्थल, शवों को छिपाने और साक्ष्य मिटाने के कथित प्रयास से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है।

जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि वारदात से पहले और बाद में क्या-क्या हुआ, आरोपियों की भूमिका क्या रही तथा घटनास्थल से कौन-कौन से भौतिक और अन्य साक्ष्य मिले। पुलिस की ओर से वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक तरीकों से पूछताछ किए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे मामलों में फॉरेंसिक जांच, परिस्थितिजन्य साक्ष्य, गवाहों के बयान और घटनाक्रम की समयरेखा जांच को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

64 वर्षीय नाना ने दर्ज कराया हत्या का मामला

इस मामले में मृतक बच्चों के 64 वर्षीय नाना घनश्याम की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने अपनी बेटी प्रीति और राजेश जाट के खिलाफ जनूथर थाने में हत्या का मामला दर्ज कराया। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपों की जांच की और दोनों को गिरफ्तार कर लिया। एक नाना के लिए अपनी बेटी और नाती-पोतों से जुड़े ऐसे घटनाक्रम का सामना करना कितना पीड़ादायक हो सकता है, इसकी कल्पना मात्र से घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

बताया गया है कि प्रीति के पति निरंजन जाट की मृत्यु के बाद वह अपने दोनों जुड़वा बेटों के साथ अपने पिता के घर पर रह रही थी। इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि के बीच दोनों बच्चों की हत्या का मामला सामने आया। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, पारिवारिक परिस्थितियों और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

दोहरी हत्या के खुलासे से क्षेत्र में आक्रोश, कई सवालों के जवाब बाकी

विनय और विष्णु की हत्या के खुलासे के बाद बडेसरा गांव और आसपास के इलाके में गहरा दुख, आक्रोश तथा सनसनी का माहौल बताया जा रहा है। ग्रामीणों के लिए यह घटना केवल दो बच्चों की मौत का मामला नहीं, बल्कि पारिवारिक विश्वास और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा सवाल भी है। जिन बच्चों को परिवार और समाज के संरक्षण में सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए, उनकी हत्या के आरोप अपने ही करीबी लोगों पर लगना लोगों को भीतर तक विचलित कर रहा है।

फिलहाल यह भी आवश्यक है कि घटना को लेकर अपुष्ट दावों और अफवाहों से बचा जाए। पुलिस को जांच के प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष पड़ताल करनी चाहिए और आरोपियों को कानून के तहत न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा। मृतक बच्चों की पहचान और परिवार से जुड़ी संवेदनशील जानकारी का प्रसार भी जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए, ताकि शोकाकुल परिजनों की निजता का सम्मान बना रहे।

पुलिस की आगे की जांच पर टिकी निगाहें

जनूथर थाना क्षेत्र के इस दोहरे हत्याकांड में गिरफ्तारी के बाद अब जांच के शेष पहलुओं का खुलासा होना महत्वपूर्ण है। पुलिस को कथित मकसद, वारदात की परिस्थितियों, शवों को छिपाने के घटनाक्रम और आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाओं से संबंधित साक्ष्यों को स्पष्ट करना होगा। वैज्ञानिक जांच तथा अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर मामले की कड़ियों को जोड़ना और अभियोजन को मजबूत करना आगे की कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

तेरह वर्षीय विनय और विष्णु की मौत ने एक परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया है और पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। अब लोगों की निगाहें पुलिस की आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर हैं। इस संवेदनशील मामले में सच्चाई सामने आना, दोष सिद्ध होने पर जिम्मेदार लोगों को कानून के मुताबिक सजा मिलना और बच्चों की सुरक्षा को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ना बेहद जरूरी है।

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