16 अक्टूबर 2026 6:35 अपराह्न

पहले धमकी की शिकायत, फिर हत्या! चार पुलिसकर्मी निलंबित, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

देवरिया में हत्या के मामले के बाद घटनास्थल पर पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी और जनगणदूत के रिपोर्टर इरफान अली लारी की तस्वीर।

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# पहले धमकी की शिकायत, फिर हत्या! चार पुलिसकर्मी निलंबित, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

**रिपोर्ट: इरफान अली लारी**

उत्तर प्रदेश में एक व्यक्ति की हत्या के मामले ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क पर स्पीड ब्रेकर बनवाने को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि कथित तौर पर हुई मारपीट के बाद एक व्यक्ति की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। वहीं, मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पहले भी जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं और इस संबंध में पुलिस को शिकायत दी गई थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

मामला उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के लार थाना क्षेत्र के भीखम छपरा गांव का है। मृतक की पहचान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता रामेश्वर तिवारी के रूप में हुई है। घटना के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे, घटनास्थल का निरीक्षण किया और परिवार के सदस्यों से जानकारी ली। पुलिस ने मृतक की पत्नी की तहरीर के आधार पर छह नामजद आरोपियों तथा दस अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगाई गई हैं।

## स्पीड ब्रेकर को लेकर शुरू हुआ विवाद जानलेवा मारपीट तक पहुंचा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भीखम छपरा गांव में सड़क पर स्पीड ब्रेकर बनवाने को लेकर रामेश्वर तिवारी और उनके पड़ोसियों के बीच विवाद हुआ था। बताया गया है कि गुरुवार की शाम यह विवाद बढ़ गया और रामेश्वर तिवारी के साथ मारपीट की गई। घटना के बाद परिजन उन्हें उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

एक सड़क पर स्पीड ब्रेकर बनाने जैसे स्थानीय मुद्दे को लेकर शुरू हुआ विवाद आखिरकार मौत की घटना में कैसे बदल गया, यह जांच का महत्वपूर्ण पहलू है। पुलिस को यह पता लगाना होगा कि विवाद की शुरुआत कैसे हुई, मारपीट में किन लोगों की भूमिका रही और घटना के समय वहां कौन-कौन मौजूद था।

हालांकि, किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाएगा। फिलहाल पुलिस ने शिकायत में दर्ज आरोपों के आधार पर कार्रवाई शुरू की है।

घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने, किसी भी संभावित टकराव को रोकने और मामले की जांच को आगे बढ़ाने की है।

## थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों पर गिरी निलंबन की गाज

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपमहानिरीक्षक एस. चनप्पा और पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर मौके पर पहुंचे। वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मृतक के परिजनों से बातचीत कर उनकी शिकायतों तथा घटना से संबंधित परिस्थितियों की जानकारी ली।

इसके बाद पुलिस प्रशासन ने लार थाना प्रभारी राकेश सिंह, उपनिरीक्षक राममूरत तथा बीट पुलिसकर्मियों चंद्रभान और प्रीतम को निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि घटना के साथ-साथ पुलिसकर्मियों की भूमिका और उनके स्तर पर संभावित लापरवाही को भी गंभीरता से देखा जा रहा है।

यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पुलिस को घटना से पहले किसी प्रकार की शिकायत मिली थी या नहीं, शिकायत मिलने पर क्या कार्रवाई की गई और संबंधित अधिकारियों ने विवाद को रोकने के लिए कौन से कदम उठाए थे। यदि पहले से शिकायत उपलब्ध थी, तो उसकी जांच, अभिलेखों की समीक्षा और संबंधित पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय करना आवश्यक होगा।

निलंबन अपने आप में किसी पुलिसकर्मी के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं है। यह विभागीय कार्रवाई की शुरुआत हो सकती है, जिसके बाद तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। मामले में निष्पक्ष जांच के जरिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि पुलिस की कार्यप्रणाली में कहां कमी रही और क्या किसी स्तर पर शिकायत की अनदेखी हुई थी।

## पहले भी जान से मारने की धमकी मिलने का परिजनों का आरोप

रामेश्वर तिवारी के परिवार ने दावा किया है कि पड़ोसियों के साथ उनका विवाद कोई नई बात नहीं थी। परिजनों के मुताबिक, रास्ते को लेकर पहले भी कई बार तनाव की स्थिति बनी थी और परिवार अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित था।

परिवार का कहना है कि 20 जुलाई को भी उन्होंने थाने में सुरक्षा से संबंधित शिकायत दी थी। इसके अतिरिक्त, परिजनों के अनुसार, 19 सितंबर को रामेश्वर तिवारी को जान से मारने की धमकी दी गई थी। परिवार का दावा है कि अगले दिन, यानी 20 सितंबर को, इस संबंध में लार थाने में लिखित सूचना दी गई थी।

परिजनों का आरोप है कि शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने मामले को उस गंभीरता से नहीं लिया, जिसकी जरूरत थी। उनका मानना है कि यदि समय रहते विवाद को सुलझाने, दोनों पक्षों को पाबंद करने या कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने की दिशा में कदम उठाए जाते, तो संभव है कि स्थिति इस हद तक नहीं पहुंचती।

हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए शिकायतों की प्रतियां, थाने में दर्ज प्रविष्टियां, प्राप्ति की तारीख, संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच जरूरी है। अभी परिवार के आरोपों को जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

इस मामले में पुलिस प्रशासन के सामने एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी यह भी है कि वह स्पष्ट करे कि पहले दी गई शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई थी। यदि शिकायतें रिकॉर्ड में मौजूद हैं, तो उनकी जांच से घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में मदद मिल सकती है।

## छह नामजद और दस अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

मृतक की पत्नी की तहरीर के आधार पर पुलिस ने छह लोगों को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज किया है। नामजद आरोपियों में संजय तिवारी, दीपक तिवारी, प्रांजल तिवारी, अभिनीत तिवारी, आदित्य तिवारी और निखिल तिवारी शामिल हैं। इसके अलावा दस अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं। मामले में कुछ महिलाओं को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, पूछताछ के लिए हिरासत में लिए जाने और किसी अपराध में दोष सिद्ध होने के बीच अंतर है। जांच में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाना आवश्यक है।

जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि घटना के समय मौके पर कितने लोग मौजूद थे, मारपीट में किसकी क्या भूमिका थी और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि किन साक्ष्यों से होती है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, चिकित्सकीय दस्तावेज और अन्य प्रासंगिक रिकॉर्ड जांच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

पुलिस ने फिलहाल मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

## परिवार ने पिता और ट्रैक्टर चालक की हत्या का भी किया जिक्र

इस मामले में मृतक के परिजनों ने परिवार के पुराने घटनाक्रम का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, रामेश्वर तिवारी के पिता श्याम नारायण तिवारी की वर्ष 1989 में हत्या हुई थी। इसके अलावा, परिवार का दावा है कि वर्ष 2019 में उनके ट्रैक्टर चालक की भी हत्या कर दी गई थी।

परिवार ने पुराने मामलों का जिक्र करते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। परिजनों का कहना है कि पहले की घटनाओं और पड़ोसियों के साथ लंबे समय से चले आ रहे विवाद के बावजूद सुरक्षा को लेकर पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।

हालांकि, इन पुराने मामलों और मौजूदा हत्या के बीच किसी संबंध को स्थापित करने के लिए अलग-अलग घटनाओं के रिकॉर्ड, जांच के निष्कर्ष और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण जरूरी है। केवल पुराने विवाद या परिवार के आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति अथवा पक्ष को इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

जांच के दौरान पुराने मामलों का रिकॉर्ड प्रासंगिक पाया जाता है, तो पुलिस उनकी परिस्थितियों और वर्तमान घटना से संभावित संबंध की भी पड़ताल कर सकती है। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि परिवार की सुरक्षा संबंधी शिकायतों का इतिहास क्या था और किसी पुराने मामले में क्या कार्रवाई हुई थी।

## गांव में पुलिस बल तैनात, आरोपियों की तलाश जारी

हत्या की घटना के बाद गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस प्रशासन का प्रयास है कि क्षेत्र में शांति बनी रहे और किसी प्रकार की नई अप्रिय घटना न हो। साथ ही, दर्ज मुकदमे के आधार पर आरोपियों की तलाश और जांच की कार्रवाई जारी है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले में जो लोग दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर भी कार्रवाई की गई है। अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना से पहले मिली शिकायतों पर क्या कदम उठाए गए थे और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी किस सीमा तक बनती है।

इस तरह के मामलों में केवल गिरफ्तारी या निलंबन की घोषणा ही पर्याप्त नहीं होती। पीड़ित परिवार को जांच की प्रगति की जानकारी देना, उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखना, गवाहों के बयान दर्ज करना और कानूनी प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाना भी जरूरी है।

## सबसे बड़ा सवाल: शिकायत के बाद भी क्यों नहीं टला विवाद?

रामेश्वर तिवारी की हत्या का मामला कई महत्वपूर्ण सवाल छोड़ता है। क्या परिवार की ओर से पहले दी गई शिकायतें थाने के रिकॉर्ड में मौजूद हैं? क्या शिकायत मिलने पर दोनों पक्षों के बीच विवाद की गंभीरता का आकलन किया गया था? यदि धमकी की लिखित सूचना दी गई थी, तो उस पर क्या कार्रवाई हुई? और क्या संबंधित पुलिसकर्मियों ने अपने कर्तव्यों का पालन किया?

इन सवालों के जवाब जांच के निष्कर्षों और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही सामने आ सकेंगे। यदि शिकायतों पर कार्रवाई में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध विभागीय और कानूनी प्रावधानों के अनुसार कदम उठाए जाने चाहिए। वहीं, यदि जांच में कोई अलग तथ्य सामने आता है, तो उसे भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

किसी भी गांव या कस्बे में सड़क, रास्ते, निर्माण अथवा आपसी विवाद को समय रहते सुलझाना स्थानीय प्रशासन और पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। विवाद बढ़ने की आशंका होने पर शिकायत की गंभीरता को समझना और कानून के मुताबिक कार्रवाई करना जरूरी होता है।

फिलहाल इस मामले में पुलिस प्रशासन ने थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है, छह नामजद और दस अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है तथा आरोपियों की तलाश जारी है। परिजनों के पुराने शिकायतों और धमकी से जुड़े आरोपों की जांच भी इस पूरे घटनाक्रम का अहम हिस्सा है।

अब लोगों की नजर जांच की निष्पक्षता, आरोपियों के खिलाफ होने वाली कानूनी कार्रवाई और पुलिस की जवाबदेही तय करने पर रहेगी। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि रामेश्वर तिवारी की मौत के मामले में वास्तविक घटनाक्रम सामने आए, दोषियों की पहचान साक्ष्यों के आधार पर हो और यदि पहले की शिकायतों पर लापरवाही हुई थी, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय की जाए।

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