रिपोर्ट: संजय सिंह राणा
मानिकपुर, चित्रकूट। पाठा क्षेत्र में सिंचाई की समस्या से जूझ रहे किसानों के लिए भरोसा बांध से निकलने वाली नहर एक बड़ा सहारा है, लेकिन इसकी जर्जर और जगह-जगह से कटी पटरी किसानों की मुश्किलें बढ़ा रही है। नहर में पानी छोड़े जाने के बावजूद उसका बड़ा हिस्सा खेतों तक पहुंचने के बजाय रास्ते में ही बह जाता है। नतीजा यह है कि नहर के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता और किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई के लिए परेशान होना पड़ता है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब नहर को पूरी तरह आरसीसी यानी सीमेंट-कंक्रीट से निर्मित कराने की मांग फिर उठाई गई है।
भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के चित्रकूट जिला उपाध्यक्ष एवं मानिकपुर निवासी वरिष्ठ भाजपा नेता जितेन्द्र मोहन शुक्ल ने उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर भरोसा बांध से निकलने वाली नहर को आरसीसी बनवाने की मांग की है। उनका कहना है कि क्षेत्र के किसानों को नियमित और पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नहर का पक्का निर्माण बेहद जरूरी है। उन्होंने इस संबंध में पहले भी पत्राचार कर शासन का ध्यान समस्या की ओर आकर्षित किया था, लेकिन अब तक उनकी मांग के स्थायी समाधान की आवश्यकता बनी हुई है।
नहर की बदहाली से खेतों तक नहीं पहुंच रहा पूरा पानी
मानिकपुर क्षेत्र में खेती-किसानी का बड़ा हिस्सा सिंचाई के उपलब्ध साधनों पर निर्भर है। ऐसे में भरोसा बांध से निकलने वाली नहर आसपास के अनेक गांवों के किसानों के लिए जीवनरेखा जैसी भूमिका निभाती है। मानिकपुर, गुरौला, ऐलहा, बढ़ैया, उमरी और खिचरी सहित आसपास के गांवों के किसानों की फसलों को पानी उपलब्ध कराने में इस नहर का महत्वपूर्ण योगदान है।
समस्या यह है कि नहर की पटरी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी है। कहीं मिट्टी कटकर बह गई है, तो कहीं पटरी की स्थिति इतनी खराब है कि पानी को निर्धारित रास्ते से खेतों तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। जब नहर में पानी छोड़ा जाता है, तब टूटी हुई पटरी से पानी बाहर निकलने लगता है। इससे पानी का प्रवाह प्रभावित होता है और नहर के अंतिम छोर पर स्थित खेतों तक पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पहुंच पाता।
जितेन्द्र मोहन शुक्ल के मुताबिक, नहर की मरम्मत और पक्के निर्माण की समस्या को गंभीरता से लेने की जरूरत है। यदि पानी को बीच रास्ते में बर्बाद होने से बचाया जाए, तो इससे किसानों को सिंचाई का लाभ मिल सकता है। उनका मानना है कि केवल अस्थायी मरम्मत से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए नहर का व्यवस्थित और टिकाऊ निर्माण कराया जाना चाहिए।
पाठा क्षेत्र में सिंचाई के विकल्प सीमित, किसानों की बढ़ती परेशानी
चित्रकूट का पाठा क्षेत्र लंबे समय से पानी की उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों का सामना करता रहा है। मानिकपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में किसानों के सामने सिंचाई के वैकल्पिक साधनों की कमी भी एक बड़ी समस्या है। शुक्ल का कहना है कि क्षेत्र में कई स्थानों पर कुएं और बोरवेल जैसे साधन भी अपेक्षित रूप से सफल नहीं हो पाते। ऐसी परिस्थितियों में किसानों को खेती के लिए भरोसा बांध से निकलने वाली नहर पर निर्भर रहना पड़ता है।
जब यही नहर क्षतिग्रस्त हो और पानी खेतों तक न पहुंचे, तो किसानों के सामने संकट और गहरा जाता है। खेती में बीज, खाद, मजदूरी और जुताई पर खर्च करने के बाद यदि समय पर सिंचाई नहीं हो पाती, तो फसल की पैदावार प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से उन किसानों के लिए स्थिति कठिन हो जाती है जिनके पास सिंचाई का कोई दूसरा भरोसेमंद साधन उपलब्ध नहीं है।
किसान मौसम की अनिश्चितता के बीच अपनी फसल तैयार करने के लिए मेहनत करते हैं। लेकिन खेतों को समय पर पानी नहीं मिलने से उनकी मेहनत और लागत दोनों पर संकट खड़ा हो जाता है। नहर की बदहाली के कारण पानी की उपलब्धता और खेतों तक उसकी वास्तविक पहुंच के बीच जो अंतर पैदा हो रहा है, उसे दूर करना जरूरी है।
ऐलहा-बढ़ैया के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना बड़ी चुनौती
नहर की समस्या का असर केवल उसके आसपास स्थित खेतों तक सीमित नहीं है। नहर के अंतिम छोर पर बसे गांवों के किसानों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। जितेन्द्र मोहन शुक्ल ने विशेष रूप से ऐलहा-बढ़ैया तक पानी नहीं पहुंच पाने की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि नहर का पानी अंतिम टेल तक पहुंचना चाहिए, ताकि वहां के किसानों को भी सिंचाई का पूरा लाभ मिल सके।
सिंचाई व्यवस्था में नहर के शुरुआती हिस्से से लेकर अंतिम छोर तक पानी का उचित प्रवाह बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। यदि बीच में पटरी टूटने या अन्य संरचनात्मक खामियों के कारण पानी बह जाता है, तो दूर स्थित खेतों तक पर्याप्त जल उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाता है। इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है।
ऐलहा-बढ़ैया और अन्य अंतिम छोर के गांवों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नहर की पूरी लंबाई का निरीक्षण, क्षतिग्रस्त हिस्सों की पहचान और स्थायी निर्माण की योजना आवश्यक मानी जा रही है। आरसीसी निर्माण की मांग इसी समस्या के समाधान से जुड़ी है।
आरसीसी नहर बनने से पानी की बर्बादी रोकने की उम्मीद
भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष जितेन्द्र मोहन शुक्ल ने मांग की है कि भरोसा बांध से निकलने वाली नहर को पूरी तरह आरसीसी बनाया जाए। उनके अनुसार, नहर का पक्का निर्माण होने से पानी के रिसाव और पटरी कटने से होने वाली बर्बादी को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे पानी को निर्धारित मार्ग से खेतों तक पहुंचाना आसान हो सकता है।
हालांकि, नहर के निर्माण से जुड़ा अंतिम निर्णय संबंधित विभाग की तकनीकी जांच, प्रस्तावित लागत, बजट और स्वीकृत कार्ययोजना पर निर्भर करेगा। इसके लिए नहर की वर्तमान स्थिति का सर्वेक्षण कराना, क्षतिग्रस्त हिस्सों का आकलन करना और पानी की जरूरत के अनुसार निर्माण की रूपरेखा तैयार करना आवश्यक होगा।
किसानों की मांग है कि इस समस्या को केवल मौसमी मरम्मत तक सीमित न रखा जाए। यदि हर साल नहर की पटरी टूटने और पानी बहने की समस्या बनी रहती है, तो इसका असर किसानों की खेती और सिंचाई व्यवस्था पर लगातार पड़ता रहेगा। इसलिए दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री और जलशक्ति मंत्री से हस्तक्षेप की मांग
जितेन्द्र मोहन शुक्ल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह को पत्र भेजकर भरोसा बांध से निकलने वाली नहर के आरसीसी निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि पाठा क्षेत्र के किसानों की सिंचाई संबंधी परेशानियों को देखते हुए इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मानिकपुर और आसपास के गांवों में खेती को टिकाऊ बनाने के लिए पानी की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। नहर के क्षतिग्रस्त होने से जहां पानी की बर्बादी होती है, वहीं अंतिम छोर के किसानों को भी पर्याप्त सिंचाई नहीं मिल पाती। यदि नहर का पक्का निर्माण कराया जाता है और पानी के वितरण की व्यवस्था दुरुस्त होती है, तो इससे क्षेत्र के किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
यह मांग अब संबंधित विभागों के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती है कि भरोसा बांध से निकलने वाली नहर की मौजूदा स्थिति का आकलन कब होगा और किसानों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, किसानों की जरूरत इस बात की है कि नहर की समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि खेतों तक पानी पहुंचे और सिंचाई के अभाव में फसलों को नुकसान न उठाना पड़े।
किसानों को इंतजार, कब सुधरेगी सिंचाई व्यवस्था?
मानिकपुर क्षेत्र के किसानों के लिए नहर केवल पानी लाने का माध्यम नहीं, बल्कि उनकी आजीविका और कृषि उत्पादन से जुड़ी महत्वपूर्ण व्यवस्था है। नहर की पटरी टूटने से पानी का व्यर्थ बहना और अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचना ऐसी समस्याएं हैं जिनका समाधान लंबे समय से अपेक्षित है।
जितेन्द्र मोहन शुक्ल की ओर से दोबारा उठाई गई मांग ने भरोसा बांध नहर की बदहाली और सिंचाई व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज की है। अब निगाहें संबंधित विभागों की कार्रवाई पर रहेंगी कि नहर के निरीक्षण, मरम्मत अथवा आरसीसी निर्माण के संबंध में कोई ठोस पहल की जाती है या नहीं।
यदि शासन और संबंधित विभाग इस मांग पर आवश्यक तकनीकी परीक्षण के बाद कार्ययोजना तैयार करते हैं, तो मानिकपुर, गुरौला, ऐलहा, बढ़ैया, उमरी और खिचरी सहित प्रभावित गांवों के किसानों को लाभ मिल सकता है। फिलहाल, क्षेत्र के किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी फसलों तक पर्याप्त पानी कब पहुंचेगा और भरोसा बांध की नहर कब अपनी उपयोगिता के अनुरूप काम कर सकेगी।













