16 अक्टूबर 2026 5:59 अपराह्न

गांधी-शास्त्री जयंती में सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, स्वच्छता और जिम्मेदारी का संकल्प भी

गांधी-शास्त्री जयंती पर विद्यालय में स्वच्छता की शपथ, श्रद्धांजलि और स्वच्छता अभियान

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इरफान अली लारी की रिपोर्ट

सलेमपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर नगर स्थित जी.एम. एकेडमी में श्रद्धा, उत्साह और राष्ट्रीय चेतना से ओतप्रोत कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में विद्यार्थियों, शिक्षकों और विद्यालय स्टाफ ने दोनों महान विभूतियों के जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, सादगी, ईमानदारी, अनुशासन और राष्ट्रसेवा जैसे मूल्यों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने ध्वजारोहण के साथ किया। इसके बाद विद्यालय परिसर राष्ट्रगान और वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से गूंज उठा। राष्ट्रीय पर्व के इस अवसर पर विद्यार्थियों और शिक्षकों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं तथा विद्यालय स्टाफ ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के सम्मान में नारे लगाकर उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

गांधी और शास्त्री के चित्र पर अर्पित किए पुष्प

ध्वजारोहण और राष्ट्रगान के बाद विद्यालय परिसर में महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी के नेतृत्व में शिक्षक-शिक्षिकाओं, विद्यार्थियों और विद्यालय स्टाफ ने दोनों महापुरुषों के चित्रों पर पुष्प अर्पित किए।

इस दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी महान व्यक्तित्व को याद करने का वास्तविक अर्थ केवल उनकी जयंती मनाना नहीं, बल्कि उनके जीवन मूल्यों को व्यवहार में उतारना भी है। गांधी के सत्य, अहिंसा और स्वच्छता के विचार तथा शास्त्री के सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के आदर्श आज भी सार्वजनिक और व्यक्तिगत जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

गांधी-शास्त्री के जीवन और विचारों पर संगोष्ठी

समारोह के अगले चरण में विद्यालय के ऑडिटोरियम में महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन, संघर्ष, विचारों तथा वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता पर संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी का संचालन विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक सुनील कुमार गुप्ता ने किया।

संगोष्ठी में कक्षा आठवीं की छात्रा प्रतिष्ठा पांडेय सहित शिक्षक प्रमोद कुशवाहा, पी. गोस्वामी, धर्मेंद्र मिश्रा, बृजेन्द्र तिवारी, साक्षी उपाध्याय, प्रवीण चतुर्वेदी, मुन्ना चौहान और आशुतोष तिवारी ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने गांधी और शास्त्री के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।

वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज तेजी से तकनीक और सोशल मीडिया के प्रभाव में बदल रहा है, ऐसे समय में सत्य, संयम, जिम्मेदार संवाद और सामाजिक संवेदनशीलता का महत्व और बढ़ जाता है। गांधी के विचारों को केवल इतिहास के एक अध्याय तक सीमित करने के बजाय उन्हें वर्तमान सामाजिक जीवन से जोड़कर देखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

“गांधी जी केवल व्यक्ति नहीं, एक युग थे”

विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के व्यक्तित्व और विचारों को वर्तमान समय के संदर्भ में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में गांधी जी का सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, आत्मसंयम और आपसी सम्मान का संदेश आज भी अत्यंत प्रासंगिक है।

उन्होंने कहा कि तकनीक और सोशल मीडिया के विस्तार ने संवाद को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी है। विद्यार्थियों को किसी सूचना को बिना जांचे आगे बढ़ाने के बजाय तथ्य और सत्य की पहचान करने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने सकारात्मक संवाद, संयमित व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारी को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

प्रधानाचार्य ने गांधी जी के आत्मपरिवर्तन संबंधी विचार का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत स्वयं के आचरण से की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने व्यवहार, विचार और कार्यशैली में सुधार लाता है तो उसका प्रभाव परिवार, विद्यालय और समाज तक पहुंच सकता है।

मोहन द्विवेदी ने कहा कि गांधी जी केवल व्यक्ति नहीं, एक युग थे। उन्होंने उन्हें अहिंसा के पुजारी, युगद्रष्टा, समाज सुधारक, महान स्वतंत्रता सेनानी, राष्ट्रभक्त, सत्यवादी और राष्ट्र की महान विभूति के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि गांधी का जीवन संघर्ष, आत्मअनुशासन और सत्य के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है।

शास्त्री की सादगी और ईमानदारी से प्रेरणा लेने का आह्वान

प्रधानाचार्य ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी का जीवन सादगी, ईमानदारी, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा की भावना का उदाहरण रहा है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए सादगी और नैतिक मूल्यों को बनाए रखना अपने आप में एक बड़ी सीख है। आज की युवा पीढ़ी के सामने अनेक प्रकार की चुनौतियां हैं। ऐसे समय में लाल बहादुर शास्त्री का जीवन विद्यार्थियों को यह संदेश देता है कि पद और प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति का चरित्र, कर्तव्य और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी होती है।

संगोष्ठी में शिक्षकों ने विद्यार्थियों से दोनों महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने तथा अपने दैनिक व्यवहार में अनुशासन, ईमानदारी, स्वच्छता और जिम्मेदारी को शामिल करने का आह्वान किया।

स्वच्छता की शपथ से कार्यक्रम को मिला सामाजिक संदेश

गांधी-शास्त्री जयंती समारोह का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा स्वच्छता अभियान रहा। कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं और छात्र-छात्राओं को स्वच्छता की शपथ दिलाई।

शपथ के माध्यम से विद्यार्थियों को विद्यालय, घर और आसपास के सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने के प्रति जिम्मेदार बनने का संदेश दिया गया। इसके बाद प्रधानाचार्य के नेतृत्व में विद्यालय परिसर और कक्षाओं में स्वच्छता अभियान चलाया गया। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने मिलकर परिसर की साफ-सफाई की तथा स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का संकल्प दोहराया।

स्वच्छता अभियान को महात्मा गांधी के विचारों से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को बताया गया कि स्वच्छता केवल सफाई कर्मचारियों या किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है। प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से ही स्वच्छ वातावरण का निर्माण संभव है। विद्यालय स्तर पर ऐसे अभियान बच्चों में व्यवहारिक जिम्मेदारी और सामुदायिक चेतना विकसित करने में सहायक हो सकते हैं।

मिठाई वितरण के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन

स्वच्छता अभियान के बाद विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षक-शिक्षिकाओं और छात्र-छात्राओं को मिठाई खिलाई। उन्होंने सभी को गांधी जयंती और शास्त्री जयंती की शुभकामनाएं दीं।

विद्यालय में आयोजित गांधी-शास्त्री जयंती समारोह ने राष्ट्रीय पर्व को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों को गांधी और शास्त्री के जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय भावना, विचार-विमर्श और स्वच्छता अभियान को एक साथ जोड़ा गया, जिससे विद्यार्थियों को दोनों महापुरुषों के विचारों को व्यवहारिक जीवन से जोड़ने का अवसर मिला।

समारोह के दौरान यह संदेश भी सामने आया कि राष्ट्र निर्माण केवल बड़े आंदोलनों या महत्वपूर्ण पदों से नहीं होता, बल्कि नागरिकों के छोटे-छोटे जिम्मेदार कार्य भी समाज को दिशा देते हैं। सत्य बोलना, स्वच्छता रखना, अनुशासन का पालन करना, दूसरों का सम्मान करना और अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाना ऐसे ही व्यवहार हैं, जिनसे सामाजिक जीवन मजबूत होता है।

जी.एम. एकेडमी में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को गांधी और शास्त्री के जीवन से जुड़े मूल्यों को समझने और उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया। गांधी का सत्य और अहिंसा का विचार तथा शास्त्री की सादगी और ईमानदारी का उदाहरण विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का विषय बना रहा। स्वच्छता अभियान के साथ संपन्न हुआ यह आयोजन विद्यालय के लिए राष्ट्रीय पर्व को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने वाला अवसर भी रहा।

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