कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
लखनऊ। सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के आरोपों ने एक बार फिर राजस्व व्यवस्था की निगरानी, भूमि अभिलेखों और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए हैं। सरोजनीनगर तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत खटोला और नीवा से संबंधित एक रिपोर्ट में कई सरकारी गाटों पर कथित कब्जे, प्लाटिंग और व्यावसायिक निर्माण के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में राजस्व विभाग के कर्मचारियों, स्थानीय स्तर के जिम्मेदार लोगों और कथित भूमाफिया के बीच मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
मामले को गंभीर इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि सरकारी भूमि की स्थिति राजस्व अभिलेखों में दर्ज होती है और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक तंत्र की होती है। उत्तर प्रदेश के आधिकारिक भूलेख पोर्टल पर नागरिक सरकारी भूमि, गाटा, भूमि की स्थिति, वाद और विक्रय संबंधी रिकॉर्ड की जानकारी देख सकते हैं।
दो ग्राम पंचायतों की जमीन को लेकर उठे सवाल
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2022 से 2026 के बीच खटोला और नीवा ग्राम पंचायतों में ऊसर, बंजर, नवीन परती, चकरोड और अन्य श्रेणियों में दर्ज भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जे किए गए। रिपोर्ट तैयार करने वाले पक्ष का आरोप है कि कुछ मामलों में सरकारी जमीन पर कब्जे के बाद प्लाटिंग अथवा व्यावसायिक उपयोग किया गया और इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
इन आरोपों का वास्तविक स्वरूप तभी स्पष्ट हो सकता है जब संबंधित गाटों का राजस्व अभिलेख, मौके की पैमाइश, कब्जे की स्थिति, निर्माण की अनुमति, पूर्व शिकायतों और प्रशासनिक कार्रवाई के दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्र जांच कराई जाए।
सरोजनीनगर तहसील प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले गांवों की आधिकारिक सूची में खटोला का नाम दर्ज है। वहीं सरकारी राजस्व न्यायालय के रिकॉर्ड में भी सरोजनीनगर तहसील के खटोला और नीवा से संबंधित भूमि विवादों के मामले दर्ज दिखाई देते हैं।
खटोला में इन गाटा संख्याओं पर लगाए गए आरोप
रिपोर्ट के अनुसार ग्राम पंचायत खटोला में निम्न सरकारी भूमि को लेकर आपत्तियां और अवैध कब्जे के आरोप सामने आए हैं।
गाटा संख्या 260 मि., रकबा 1.1950 हेक्टेयर, भूमि श्रेणी ऊसर बताई गई है। इसके अलावा गाटा संख्या 261 मि., रकबा 0.2400 हेक्टेयर तथा गाटा संख्या 251 मि., रकबा 0.1900 हेक्टेयर को भी ऊसर भूमि के रूप में उल्लेखित किया गया है।
इसी क्रम में गाटा संख्या 268 मि., रकबा 0.2670 हेक्टेयर, गाटा संख्या 267 मि., रकबा 0.0250 हेक्टेयर और गाटा संख्या 265 मि., रकबा 0.0250 हेक्टेयर को नवीन परती भूमि बताया गया है। गाटा संख्या 264 मि., रकबा 0.0460 हेक्टेयर को चकरोड की भूमि बताया गया है।
रिपोर्ट में आरोप है कि इन जमीनों में से करीब दस बीघा भूमि पर कथित रूप से कब्जे या उपयोग की स्थिति पैदा की गई। रिपोर्ट में एक लेखपाल का नाम भी लिया गया है और दावा किया गया है कि कथित अनियमितताओं के बाद संबंधित स्तर पर कार्रवाई हुई थी। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित विभागीय आदेश, जांच रिपोर्ट और वर्तमान तैनाती का आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आना आवश्यक है।
नीवा में भी सरकारी जमीन को लेकर शिकायतों का दावा
रिपोर्ट का दूसरा प्रमुख हिस्सा ग्राम पंचायत नीवा से जुड़ा है। इसमें दावा किया गया है कि सरकारी भूमि की कई गाटा संख्याओं पर कथित रूप से कब्जा किया गया और कुछ स्थानों पर प्लाटिंग तथा व्यावसायिक निर्माण विकसित हुए।
रिपोर्ट में गाटा संख्या 1214 और 1215, दोनों को 0.013-0.013 हेक्टेयर बंजर भूमि बताया गया है। गाटा संख्या 1221 का रकबा 0.04 हेक्टेयर और इसे भी बंजर भूमि बताया गया है।
इसके अलावा गाटा संख्या 1229 का रकबा 0.0253 हेक्टेयर, गाटा संख्या 1230 का 0.506 हेक्टेयर तथा गाटा संख्या 1231 का 0.568 हेक्टेयर रकबा ऊसर भूमि के रूप में उल्लेखित है। गाटा संख्या 1256 का रकबा 0.20 हेक्टेयर और गाटा संख्या 1257 का 0.010 हेक्टेयर भी ऊसर भूमि बताए गए हैं।
रिपोर्ट में गाटा संख्या 1278, रकबा 0.412 हेक्टेयर, को बंजर तथा गाटा संख्या 1276, रकबा 0.177 हेक्टेयर, को नवीन परती बताया गया है।
इसके अतिरिक्त गाटा संख्या 1159, 0.412 हेक्टेयर; 1147, 0.284 हेक्टेयर; और 1151, 1.577 हेक्टेयर को बंजर भूमि के रूप में दर्ज होने का दावा किया गया है। गाटा संख्या 1117-1118 को चकरोड तथा गाटा संख्या 1110 को ऊसर भूमि बताया गया है। रिपोर्ट में गाटा संख्या 1110 के रकबे को लेकर दो अलग-अलग आंकड़े दिए गए हैं, इसलिए इस बिंदु की आधिकारिक खतौनी और मौके की पैमाइश से पुष्टि जरूरी होगी।
आगे गाटा संख्या 1149, रकबा 0.284 हेक्टेयर, को नहर भूमि; गाटा संख्या 1191, 0.713 हेक्टेयर, को ऊसर; गाटा संख्या 1199, 0.013 हेक्टेयर, को बंजर और गाटा संख्या 1212, 0.079 हेक्टेयर, को भी बंजर भूमि बताया गया है।
शिकायतों और कार्रवाई के बीच का सवाल
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन मामलों को लेकर तहसीलदार से लेकर जिलाधिकारी स्तर तक शिकायतें दी गईं, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इस दावे की पुष्टि के लिए शिकायतों की प्राप्ति संख्या, तारीख, जांच आख्या और निस्तारण रिपोर्ट सार्वजनिक होना महत्वपूर्ण होगा।
दूसरी ओर उपलब्ध सरकारी न्यायिक रिकॉर्ड यह दिखाता है कि नीवा में भूमि कब्जे से संबंधित विवाद पहले भी राजस्व न्यायालय तक पहुंचे हैं। एक मामले में तहसीलदार सरोजनीनगर की जांच रिपोर्ट का उल्लेख है, जिसमें मौके पर भूमि कब्जे से संबंधित तथ्य दर्ज किए गए थे।
इससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में भूमि संबंधी विवादों का प्रशासनिक और न्यायिक रिकॉर्ड मौजूद है, लेकिन इससे रिपोर्ट में लगाए गए प्रत्येक आरोप स्वतः प्रमाणित नहीं हो जाते।
सरकारी जमीन पर कार्रवाई के सरकारी रिकॉर्ड भी मौजूद
सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को लेकर प्रशासन द्वारा कार्रवाई किए जाने के हालिया उदाहरण भी सामने आए हैं। अप्रैल 2026 में सरोजनीनगर क्षेत्र में प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई में करीब 7.75 करोड़ रुपये बाजार मूल्य की सरकारी भूमि कब्जामुक्त कराने की जानकारी प्रकाशित हुई थी।
इसी तरह हरिहरपुर में लगभग 50 हजार वर्गफुट सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने और करीब 30 करोड़ रुपये बाजार मूल्य की भूमि पर अवैध प्लाटिंग से संबंधित कार्रवाई की रिपोर्ट सामने आई थी।
जून 2026 में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण से जुड़े मामलों और आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही के आरोप में सरोजनीनगर तहसील के तीन लेखपालों के निलंबन की भी रिपोर्ट प्रकाशित हुई। प्रशासन की ओर से कहा गया था कि सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराना और शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण राजस्व कर्मियों की जिम्मेदारी है।
इन घटनाओं से एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर सामने आता है—यदि अलग-अलग स्थानों पर सरकारी भूमि को लेकर शिकायतें और कार्रवाई दोनों हो रही हैं, तो जिन गाटों का उल्लेख खटोला और नीवा से संबंधित रिपोर्ट में किया गया है, उनकी वर्तमान स्थिति क्या है?
जांच से साफ हो सकती है तस्वीर
सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए केवल शिकायत या आरोप पर्याप्त नहीं होंगे। प्रत्येक गाटा संख्या की वर्तमान खतौनी, खसरा, भू-नक्शा, मौके की पैमाइश, कब्जे की स्थिति, निर्माण की अनुमति, नामांतरण संबंधी रिकॉर्ड और पूर्व शिकायतों की जांच आवश्यक होगी।
इसके साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित भूमि वर्तमान में किस श्रेणी में दर्ज है, उस पर किसका कब्जा है, कोई निर्माण किस अनुमति के आधार पर हुआ है और यदि कब्जा अवैध पाया जाता है तो संबंधित प्रशासन ने अब तक क्या कार्रवाई की है।
उत्तर प्रदेश सरकार का एंटी भू-माफिया पोर्टल सरकारी और निजी संपत्तियों पर अवैध कब्जे की शिकायतों के पंजीकरण तथा कार्रवाई की स्थिति की निगरानी के लिए बनाया गया है। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार इसके माध्यम से शिकायत दर्ज कराने और उस पर हुई कार्रवाई की जानकारी प्राप्त करने की व्यवस्था है।
ऐसे में खटोला और नीवा से संबंधित आरोपों की वास्तविक तस्वीर भी दस्तावेजी जांच से सामने लाई जा सकती है।
आरोपों की पुष्टि के लिए जवाब जरूरी
इस पूरे मामले में संबंधित राजस्व अधिकारियों, लेखपालों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और उन लोगों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है, जिन पर रिपोर्ट में आरोप लगाए गए हैं। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कोई विभागीय जांच हुई है, तो उसका आदेश और निष्कर्ष भी सार्वजनिक होना चाहिए।
इसी तरह यदि किसी गाटा पर अवैध कब्जा प्रमाणित पाया गया है और प्रशासन ने उसे कब्जामुक्त कराया है, तो कार्रवाई का पंचनामा, राजस्व अभिलेख और मौके की रिपोर्ट स्थिति को स्पष्ट कर सकते हैं।
सरकारी भूमि जनता की सामूहिक संपत्ति होती है। इसलिए उसके संरक्षण में किसी भी स्तर की लापरवाही या अवैध कब्जे की शिकायत को केवल राजनीतिक आरोप के रूप में नहीं, बल्कि दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जांचे जाने की आवश्यकता है।
खटोला और नीवा की जिन गाटा संख्याओं का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है, उनकी स्वतंत्र राजस्व जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि वास्तव में कितनी भूमि सरकारी अभिलेखों में दर्ज है, कितने हिस्से पर कब्जे की स्थिति है, क्या कहीं प्लाटिंग अथवा व्यावसायिक निर्माण हुआ है और जिम्मेदारी किस स्तर पर बनती है।
फिलहाल उपलब्ध सामग्री के आधार पर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के आरोप गंभीर जांच का विषय हैं, लेकिन इन्हें अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य मानने से पहले संबंधित राजस्व अभिलेखों, स्थल निरीक्षण और सक्षम अधिकारियों की जांच रिपोर्ट सामने आना जरूरी है।













