चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
GONDA छत डलवाने के दौरान अचानक शटरिंग भरभराकर गिरने से एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि चार अन्य मजदूर घायल हो गए। हादसा इतना अचानक और भयावह था कि मौके पर मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। शटरिंग के मलबे के नीचे दबे मजदूरों को आसपास के लोगों ने किसी तरह बाहर निकाला और तत्काल उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। हादसे में गंभीर रूप से घायल एक मजदूर ने अस्पताल पहुंचने के बाद दम तोड़ दिया।
यह दर्दनाक घटना स्थानीय कोतवाली कर्नलगंज क्षेत्र के ग्राम पंचायत बिबियापुर गोसाईं के मजरा गोसाईं पुरवा में मंगलवार देर शाम हुई। बताया गया कि निर्माणाधीन मकान की छत डलवाने का काम चल रहा था। इसी दौरान छत के लिए लगाई गई शटरिंग अचानक अपना भार संभाल नहीं सकी और देखते ही देखते पूरी संरचना नीचे आ गिरी। शटरिंग गिरते ही वहां काम कर रहे मजदूर उसके नीचे दब गए।
मलबे के नीचे दबे मजदूर, मची अफरा-तफरी
शटरिंग गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़े। मौके पर पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने राहत और बचाव का प्रयास शुरू किया। मलबे के नीचे दबे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए लोगों ने तत्काल प्रयास किए। हादसे के कारण घटनास्थल पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
ग्रामीणों की मदद से शटरिंग के नीचे फंसे मजदूरों को बाहर निकाला गया। हादसे में करीब चार मजदूर घायल हुए। सभी घायलों को एम्बुलेंस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कर्नलगंज ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने घायलों का उपचार शुरू किया।
इसी दौरान चिकित्सकों ने 28 वर्षीय वासुदेव पुत्र त्रिलोकी को मृत घोषित कर दिया। बताया गया कि वासुदेव झलियन पुरवा का निवासी था। उसकी अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
28 वर्षीय मजदूर की मौत से परिवार में मातम
हादसे में जान गंवाने वाला वासुदेव महज 28 वर्ष का था। वह मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। परिजनों के अनुसार वह परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। उसकी मजदूरी से ही घर की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होती थीं।
वासुदेव की मौत की खबर जैसे ही उसके परिवार और गांव तक पहुंची, वहां मातम पसर गया। पत्नी और छोटे-छोटे तीन बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के अन्य सदस्यों में भी घटना को लेकर गहरा दुख है। मृतक अपने पीछे पत्नी, तीन छोटे बच्चों के अलावा मां, भाई और बहन सहित अन्य परिजनों को छोड़ गया है।
परिजनों के लिए यह हादसा केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि पूरे परिवार के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट लेकर आया है। जिस व्यक्ति की कमाई से परिवार का खर्च चलता था, उसके अचानक चले जाने से परिवार के सामने भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने मृत घोषित किया
शटरिंग गिरने के बाद घायल मजदूरों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कर्नलगंज पहुंचाया गया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध चिकित्सा सुविधा के माध्यम से घायलों का उपचार शुरू किया गया। इसी दौरान चिकित्सकों ने वासुदेव को मृत घोषित कर दिया।
हादसे में घायल अन्य मजदूरों का भी उपचार कराया गया। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन सक्रिय हुआ और मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू की गई। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए गोण्डा स्थित पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया।
प्रशासनिक कार्रवाई के बीच हादसे के कारणों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। निर्माण कार्य के दौरान शटरिंग की मजबूती और सुरक्षा इंतजाम कितने पर्याप्त थे, यह जांच का विषय है। निर्माण स्थल पर काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां बरती गई थीं या नहीं, हादसे के बाद यह सवाल भी लोगों के बीच उठ रहा है।
गांव में पसरा मातम, परिवार पर टूटा रोजी-रोटी का संकट
घटना की जानकारी फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। जिस स्थान पर कुछ समय पहले तक निर्माण कार्य चल रहा था, वहां हादसे के बाद चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ग्रामीणों के बीच मृतक वासुदेव के परिवार की स्थिति को लेकर चिंता दिखाई दी।
ग्रामीणों ने बताया कि वासुदेव मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभाता था। परिवार की आर्थिक स्थिति उसके श्रम पर काफी हद तक निर्भर थी। ऐसे में उसकी असमय मौत ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी के सामने छोटे बच्चों की परवरिश और परिवार की अन्य जिम्मेदारियां बड़ी चुनौती बन गई हैं। मां और अन्य परिजन भी इस घटना से सदमे में हैं। गांव के लोगों का कहना है कि इतनी कम उम्र में वासुदेव का चले जाना परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है।
निर्माण स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों पर फिर उठे सवाल
शटरिंग गिरने की इस घटना ने निर्माण कार्यों के दौरान मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। छत की ढलाई जैसे कार्यों में शटरिंग की मजबूती बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि शटरिंग पर्याप्त रूप से मजबूत न हो या उसके सहारे और भार वहन क्षमता में कोई कमी रह जाए तो ढलाई के दौरान गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
इस हादसे में एक मजदूर की जान चली गई और चार अन्य घायल हो गए। इसलिए निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों के पालन, शटरिंग की गुणवत्ता और मजदूरों के लिए जरूरी सुरक्षा उपायों पर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की जरूरत सामने आती है।
फिलहाल घटना के बाद स्थानीय प्रशासन द्वारा विधिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वहीं हादसे में घायल मजदूरों के उपचार पर भी परिजनों और ग्रामीणों की नजर बनी हुई है।
शटरिंग गिरने से हुई यह दर्दनाक मौत एक परिवार को गहरे सदमे में छोड़ गई है। वासुदेव की मौत से जहां उसके छोटे बच्चों ने कम उम्र में पिता का साया खो दिया, वहीं परिवार ने अपना मुख्य कमाने वाला सदस्य खो दिया। हादसे ने निर्माण कार्यों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।













