ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
लखनऊ। सितंबर के अंतिम सप्ताह में उत्तर प्रदेश का मौसम अचानक ऐसा बदला कि लोगों को लगा मानो मानसून विदा लेने के बजाय नई ताकत के साथ लौट आया हो। राजधानी लखनऊ से लेकर गोरखपुर, बस्ती, अयोध्या, सीतापुर, बाराबंकी, चित्रकूट, देवरिया, बलरामपुर और पूर्वांचल के कई जिलों में लगातार तीन दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। गर्मी और उमस से बेहाल प्रदेश को जहां ठंडी हवाओं ने राहत दी, वहीं जलभराव, मकान ढहने, बिजली गिरने और सड़क दुर्घटनाओं ने हालात चिंताजनक बना दिए। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तंत्र ‘अर्नब’ और उससे जुड़े गहरे निम्न दबाव क्षेत्र ने पूरे उत्तर भारत के मौसम का संतुलन बदल दिया है। इसके प्रभाव से उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी वर्षा दर्ज की गई और अनेक जिलों में रेड तथा ऑरेंज अलर्ट जारी करना पड़ा।
बंगाल की खाड़ी से चली हवाओं ने बदला पूरा खेल
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में विकसित गहरे दबाव क्षेत्र ने समुद्री नमी को बड़ी मात्रा में उत्तर भारत की ओर धकेला। यह नमी जब सक्रिय मानसूनी हवाओं और पश्चिमी विक्षोभ से मिली तो बारिश का एक विशाल क्षेत्र तैयार हो गया। परिणामस्वरूप प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार बादल छाए रहे और कई स्थानों पर झमाझम वर्षा होती रही। चक्रवात अर्नब भले ही तट से टकराने के बाद कमजोर पड़ गया हो, लेकिन उसका प्रभाव अभी भी उत्तर भारत के मौसम पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
गर्मी गायब, तापमान में आई बड़ी गिरावट
लगातार वर्षा और सूर्य की किरणों के धरातल तक न पहुंच पाने के कारण तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। कई जिलों में अधिकतम तापमान सामान्य से 5 से 8 डिग्री सेल्सियस तक नीचे पहुंच गया। सुबह और शाम चल रही ठंडी हवाओं ने लोगों को अक्टूबर-नवंबर जैसी अनुभूति कराई। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बादलों की घनी परत और लगातार हो रही वर्षा के कारण धरती की सतह गर्म नहीं हो पाई, जिससे वातावरण में असामान्य ठंडक महसूस हुई।
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राजधानी में सड़कें बनीं तालाब
लखनऊ में लगातार बारिश के कारण अनेक प्रमुख मार्गों पर जलभराव की स्थिति बन गई। निचले इलाकों में लोगों को घरों से निकलना मुश्किल हो गया। कई स्थानों पर वाहन घंटों जाम में फंसे रहे। नगर निगम और प्रशासन को पंप लगाकर पानी निकालना पड़ा। स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अवकाश घोषित करने की नौबत आ गई। सरकारी कार्यालयों तक पहुंचना कई कर्मचारियों के लिए चुनौती बन गया।
पूर्वांचल में बाढ़ जैसे हालात
गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती और संतकबीरनगर जैसे जिलों में भारी बारिश के कारण नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा। कई ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में पानी भर गया। प्रशासन ने बाढ़ संभावित इलाकों पर विशेष निगरानी बढ़ा दी। राप्ती, घाघरा और छोटी सहायक नदियों के किनारे बसे गांवों में लोगों के बीच चिंता का माहौल देखा गया। मौसम विभाग ने इन जिलों को संवेदनशील श्रेणी में रखते हुए लगातार निगरानी की सलाह दी है।
अवध क्षेत्र में बढ़ी किसानों की चिंता
अयोध्या, गोंडा, बाराबंकी, अमेठी, रायबरेली और सुल्तानपुर में धान की फसल पकने की अवस्था में है। ऐसे समय लगातार बारिश किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है। खेतों में पानी भरने से फसल गिरने और गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। हालांकि जिन क्षेत्रों में मानसून के दौरान पर्याप्त बारिश नहीं हुई थी, वहां किसानों ने इस वर्षा को राहत के रूप में भी देखा है।
चित्रकूट और बुंदेलखंड में राहत के साथ खतरा
चित्रकूट, बांदा और आसपास के बुंदेलखंडी जिलों में बारिश ने सूखे जैसे हालात से राहत दी है। जलाशयों और तालाबों में पानी का स्तर बढ़ा है। लेकिन कई ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा है। पहाड़ी ढलानों और जलनिकासी की कमजोर व्यवस्था वाले इलाकों में जलभराव की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ स्थानों पर ग्रामीण संपर्क मार्ग भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
मौतों और हादसों ने बढ़ाई चिंता
भारी बारिश केवल मौसम का बदलाव नहीं लाई, बल्कि अपने साथ कई दुखद घटनाएं भी लेकर आई। अलग-अलग जिलों में बिजली गिरने, दीवार ढहने, पेड़ गिरने और जलभराव से जुड़े हादसों में कई लोगों की जान चली गई। अनेक मकानों को नुकसान पहुंचा और सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए। तेज हवाओं के कारण पेड़ और बिजली के खंभे गिरने की घटनाएं भी सामने आईं। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
क्या कहता है मानसून का आंकड़ा?
प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक लगभग 685 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य औसत के काफी करीब है। हालांकि बारिश का वितरण असमान रहा। कुछ जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई, जबकि कुछ क्षेत्रों में अल्प समय में अत्यधिक बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में ऐसी चरम मौसमी घटनाएं अब अधिक सामान्य होती जा रही हैं।
अभी राहत नहीं, सतर्कता जरूरी
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ समय तक प्रदेश के अनेक हिस्सों में बादल छाए रह सकते हैं और रुक-रुक कर बारिश जारी रह सकती है। हालांकि चक्रवाती तंत्र धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है, लेकिन उसके अवशेष और सक्रिय मानसून अभी भी मौसम को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों, किसानों और नदी किनारे बसे गांवों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत है।
यानी मानसून की विदाई से पहले उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर प्रकृति की ताकत का वह रूप देखा है, जिसने गर्मी को अचानक ठंडक में बदल दिया, लेकिन साथ ही यह भी याद दिला दिया कि मौसम का एक बदला हुआ मिजाज पूरे प्रदेश की रफ्तार को थाम सकता है।
यूपी के 63 जिलों में सामान्य से कई गुना अधिक बारिश
- राहत आयुक्त ने बताया कि प्रदेश के 63 जनपदों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है. पूरे प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान सामान्य से 19 गुना अधिक वर्षा हुई है. फर्रुखाबाद में सामान्य से 200 गुना, कानपुर नगर में 160 गुना तथा कन्नौज, कानपुर देहात एवं हरदोई में 130 गुना अधिक वर्षा दर्ज की गई है.
- उन्होंने बताया कि भदोही, देवरिया एवं अलीगढ़ में सामान्य वर्षा हुई है, जबकि गाजीपुर में सबसे कम वर्षा दर्ज की गई है. वहीं, बागपत, गाजियाबाद, मथुरा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गौतमबुद्धनगर एवं हापुड़ में वर्षा नहीं हुई है.
- उन्होंने बताया कि पिछले 48 घंटों में अतिवृष्टि एवं आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में 15 जनहानि, 4 पशुहानि तथा 117 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है. इसके अतिरिक्त 5 व्यक्ति घायल हुए हैं.
यूपी में आज भी कई जिलों में तेज बारिश
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शनिवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश और तेज हवाओं का अनुमान जताया. विभाग के अनुसार, रविवार को भी कई स्थानों पर बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं.
मौसम विभाग ने बताया कि उत्तर-पूर्वी मध्यप्रदेश और इससे सटे उत्तरी छत्तीसगढ़ के ऊपर बना दबाव क्षेत्र दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ रहा है. शनिवार सुबह साढ़े पांच बजे इसका केंद्र प्रयागराज से करीब 230 किलोमीटर दक्षिण में था.
भारी बारिश से यूपी के अलग-अलग जिलों में कई लोगों की मौत
अमेठी, बहराइच, बांदा, बाराबंकी, बस्ती, फतेहपुर, हमीरपुर, हरदोई एवं कानपुर नगर में 1-1, अयोध्या में 2 और लखीमपुर खीरी में 4 जनहानियां हुई हैं. अमेठी, फर्रूखाबाद, कासगंज, मैनपुरी से एक-एक मकान गिरने की सूचना सामने आई है. बलिया, बलरामपुर, प्रतापगढ़, संतकबीरनगर, वाराणसी में दो-दो मकान क्षतिग्रस्त हुए. जबकि गाजीपुर में 3, कानपुर देहात में 3, बहराइच में 5, सुल्तानपुर में 5, औरया में 7, पीलीभीत में 7, जालौन में 21, बांदा में 32 तथा हरदोई में 14 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं.
हेल्पलाइन नंबर 1070 पर दें सूचना
इधर भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी मौसम पूर्वानुमान एवं चेतावनी के अनुसार आगामी 36 घंटों के बाद मौसम सामान्य होने की संभावना है. इसे देखते हुए राहत आयुक्त ने आमजन से अपील की है कि वे अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें, सुरक्षित स्थानों पर रहें तथा प्रशासन एवं मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें. किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल सहायता के लिए राहत हेल्पलाइन ‘1070’ पर संपर्क कर सूचना दें.













